द लेंस: क्या सीजेपी भविष्य में युवाओं की राजनीति का नया मंच बन सकती है?

वीडियो कैप्शन, क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट पहले के छात्र आंदोलनों से अलग है?
द लेंस: क्या सीजेपी भविष्य में युवाओं की राजनीति का नया मंच बन सकती है?
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दिल्ली की सड़कों पर जारी युवाओं का प्रदर्शन अब धीरे-धीरे देश के कई हिस्सों में फैल गया है.

प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी मांग ये है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें. इस आंदोलन की शुरुआत कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर व्यंग्य और मीम्स के ज़रिए हुई थी.

इन विरोध प्रदर्शनों में आ रहे युवा बेरोज़गारी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर गहरी नाराज़गी दिखा रहे हैं. दिल्ली में जारी आंदोलन को और गति तब मिली, जब सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इसके समर्थन में आए.

गुरुवार-शुक्रवार की रात केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में वांगचुक ने अनशन भले ही तोड़ दिया हो, मगर देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन जारी है.

20 जुलाई को सीजेपी के 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिस पर युवाओं के साथ सख़्ती के आरोप लगे लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं हटे.

इससे जुड़े कई सवाल भी हैं. क्या सरकार युवाओं की नाराज़गी को समझने में चूक गई है? क्या जेन-ज़ी के विरोध प्रदर्शन पहले के छात्र आंदोलनों से अलग है? क्या सीजेपी आने वाले समय में युवाओं की राजनीति का एक नया चेहरा बन सकती है? सरकार आगे क्या करेगी?

'द लेंस' के आज के एपिसोड में ऐसे सभी सवालों पर चर्चा की गई. इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुईं द हिंदू की असोसिएट और पॉलिटिकल एडिटर निस्तुला हेबर और वरिष्ठ पत्रकार स्मिता शर्मा, जो अब स्वतंत्र रूप से पत्रकारिता करती हैं.

नोट: द लेंस का ये एपिसोड शुक्रवार 24 जुलाई को रिकॉर्ड किया गया है.

प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर, सईदुज़्जमान

गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव

वीडियो एडिटिंगः जमशैद अली ख़ान

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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