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हमें उबासी क्यों आती है?
बरसों से ये सवाल, साइंस की सबसे बड़ी मिस्ट्री में से एक बना हुआ है कि ये उबासी होती क्या है?
ये कोऑर्डिनेटेड मूवमेंट की एक सिरीज़ है, जिसमें मुंह के रास्ते हवा शरीर में जाती है, ईयरड्रम स्ट्रेच होते हैं और फिर साँस बाहर छोड़ी जाती है.
हम उबासी क्यों लेते हैं, इसे लेकर कई थ्योरी हैं.
एक थ्योरी कहती है कि उबासी से सांस लेने में आसानी होती है.
ऐसा करने से शरीर में ज़्यादा ऑक्सीजन जाती है और इसी प्रक्रिया में ज़्यादा कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है.
दूसरी थ्योरी में इसकी वजह थर्मोरेगुलेशन को बताया जाता है. इसका मतलब ये है कि जब दिमाग़ का टेम्परेचर बढ़ता है तो हमें उबासी आती है.
अगर आप थक गए हैं या बोर हो रहे हैं, तो दिमाग़ गर्म होने लगता है, और उबासी एयर-कंडिशन की तरह काम करती है.
जब हम बाहर की ठंडी हवा भीतर खींचते हैं तो वो ख़ून में घुलती है और ठंडा ब्लड दिमाग़ या स्कल की तरफ़ पुश होता है.
ऐसा होने पर दिमाग़ कूल डाउन होता है. ये एक तरह से रिबूट होता है और आप ज़्यादा अलर्ट हो जाते हैं.
पैंडिकुलेशन भी हमारे दिमाग़ और शरीर को कूल डाउन करता है. ये उस स्ट्रेच या अँगड़ाई का मेडिकल नेम है, जो हम अक्सर उबासी लेने के बाद करते हैं.
इंसान ही नहीं, बल्कि जानवर भी ऐसा करते हैं. अक्सर बिल्लियों और कुत्तों को आपने ऐसा करते देखा होगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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