मौसम बदलते ही होने वाली एलर्जी या लगातार होते ज़ुकाम से बचने के 9 तरीक़े

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- Author, अमांडा रगेरी
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
- पढ़ने का समय: 9 मिनट
सबसे असरदार दवाओं से लेकर दिक्कत शुरू करने वाले सबसे आम कारणों तक, हम ऐसी वैज्ञानिक सलाह पर नज़र डालते हैं जो आपकी मौसमी तकलीफ़ों को कम कर सकती है.
सूरज चमक रहा है, फूल खिल रहे हैं- लेकिन दुनिया भर के लाखों लोगों की तरह, इस मौसम में आपको भी बार-बार छींक, खांसी और आंखों से पानी आने की समस्या हो सकती है.
दुनिया भर में क़रीब 40 करोड़ लोग एलर्जिक राइनाइटिस से पीड़ित हैं. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हवा में मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले तत्व- जैसे पराग (पोलन), नाक के रास्तों को प्रभावित करते हैं. जब यह समस्या ख़ास मौसम में होती है, तो इसे 'हे फ़ीवर' (Hay Fever) कहा जाता है.
उत्तर अमेरिका में इसे मौसमी एलर्जी भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण कई तरह के पराग या एलर्जी पैदा करने वाले अन्य तत्व की वजह से हो सकते हैं.
हे फ़ीवर के मरीज़ों की संख्या और इसके लक्षणों की तीव्रता लगातार बढ़ती दिख रही है. इसका एक बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है.
अच्छी बात यह है कि अब आपको यह परेशानी चुपचाप सहने की ज़रूरत नहीं है. पिछले कुछ सालों में हे फ़ीवर के इलाज के लिए कई नई और पहले से ज़्यादा असरदार दवाएं उपलब्ध हुई हैं.
साथ ही, रिसर्च से भी यह साफ़ हुआ है कि इन दवाओं का सही समय और तरीक़े से इस्तेमाल कैसे किया जाए.
यहां हम आपको ऐसे नौ तरीक़े बताते हैं जिनसे आप इस मौसम में ख़ुद को एलर्जी से बचा सकते हैं और यह भी जान सकते हैं कि कब डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है.
1. गोली के बजाय नेज़ल स्प्रे का इस्तेमाल करें

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जैसे ही हल्की छींक या एलर्जी के लक्षण शुरू होते हैं, हम में से कई लोग क्लैरिटिन या बेनाड्रिल जैसी खाने वाली दवाओं का सहारा लेते हैं. लेकिन ये दवाएं नेज़ल स्प्रे के मुकाबले कम असरदार होती हैं.
ये पहले पचती हैं और फिर पूरे शरीर में फैलती हैं, जिससे नाक तक पहुंचने वाली दवा की मात्रा कम रह जाती है, जबकि असली ज़रूरत वहीं होती है.
वहीं, नेज़ल स्प्रे सीधे नाक में इस्तेमाल किया जाता है और तुरंत असर दिखाता है. यह सूजन को कम करने वाले कारणों पर सीधे काम करता है, जिससे नाक बंद होना, छींक आना और अन्य लक्षणों में बेहतर राहत मिलती है.
इसी कारण अब बच्चों और बड़ों दोनों के लिए नेज़ल स्प्रे को प्राथमिक उपचार यानी फ़र्स्ट लाइन ऑफ़ ट्रीटमेंट के रूप में सुझाया जाता है.
नेज़ल स्प्रे में सबसे ज़्यादा असरदार कॉर्टिकोस्टेरॉइड (corticosteroid) माने जाते हैं, उसके बाद एंटीहिस्टामीन (antihistamine).
लेकिन पिछले कुछ सालों में एक और बेहतर विकल्प सामने आया है- दोनों का मिला-जुला कॉर्टिकोस्टेरॉइड और एंटीहिस्टामीन स्प्रे. यह सबसे ज़्यादा प्रभावी साबित हुआ है और इसके साइड इफ़ेक्ट भी ज़्यादा नहीं होते.
इंपीरियल कॉलेज लंदन और यूके के रॉयल ब्रॉम्पटन अस्पताल में एलर्जी और श्वसन चिकित्सा के एमेरिटस प्रोफ़ेसर स्टीफन डरहम के अनुसार, अक्सर नेज़ल स्प्रे से आंखों के लक्षण भी अपने-आप ठीक हो जाते हैं. लेकिन अगर आंखों में खुजली बनी रहे, तो ओलोपैटाडीन (olopatadine) वाली आई ड्रॉप्स मददगार हो सकती हैं.
2. नाक खोलने वाले स्प्रे (डीकंजेस्टेंट) से बचें

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हर नेज़ल स्प्रे एक जैसा नहीं होता. कई लोग बंद नाक से राहत पाने के लिए डीकंजेस्टेंट स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इससे समस्या और बढ़ सकती है.
डीकंजेस्टेंट स्प्रे जिनमें ऑक्सीमेटाज़ोलिन, फिनाइलएफ्रिन या ज़ाइलोमेटाज़ोलिन जैसे तत्व होते हैं, जो नाक की सूजन को कम करके काम करते हैं.
ये खून की नसों को सिकोड़ देते हैं, जिससे नाक के अंदर की सूजी हुई परत छोटी हो जाती है और आपको सांस लेने में आसानी होती है.
लेकिन अगर इनका लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए- आमतौर पर 5 दिन से ज़्यादा, तो खून की नसें इस दवा पर निर्भर होने लगती हैं. फिर जब आप स्प्रे नहीं लेते, तो नाक की सूजन और ज़्यादा बढ़ जाती है.
इससे नाक पहले से ज़्यादा बंद होने लगती है, जिसे 'रीबाउंड कंजेशन' कहा जाता है. ऐसी स्थिति में कई लोग अनजाने में स्प्रे का और ज़्यादा इस्तेमाल करने लगते हैं. लंबे समय तक इसका इस्तेमाल करने से नुक़सान और आदत पड़ने का ख़तरा भी हो सकता है.
3. अगर एंटीहिस्टामीन की गोली लेते हैं, तो 'सेकंड-जनरेशन' दवा चुनें
अगर आप गोली लेने का फैसला करते हैं, तो नई पीढ़ी की दवाएं चुनें, जैसे सिटिरिज़िन (certirizine - Zyrtec), लोराटाडिन (loratadine - Claritin) या फेक्सोफेनाडिन (fexofenadine - Allegra). ये दवाएं ज़्यादा असरदार होती हैं और पुरानी दवाओं के मुकाबले कम नींद लाती हैं.
पहली पीढ़ी की दवाएं, जैसे डाइफेनहाइड्रामिन (Benadryl), क्लोरफेनिरामिन या डॉक्सिलामिन, अक्सर ज़्यादा सुस्ती और नींद का कारण बनती हैं.
एलर्जी से जुड़ी रिसर्च और शिक्षा पर केंद्रित एनजीओ 'यूफोरिया' के उपाध्यक्ष और यूके स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज हॉस्पिटल लंदन में मानद सलाहकार एलर्जिस्ट और राइनोलॉजिस्ट ग्लेनिस स्कैडिंग कहते हैं, "हालांकि कई बार लोग एक साथ गोली और नेज़ल स्प्रे दोनों लेने लगते हैं, लेकिन यह आमतौर पर 'पैसे की बर्बादी' है. नेज़ल कॉर्टिकोस्टेरॉइड के साथ एंटीहिस्टामीन गोली लेने से ज़्यादा अतिरिक्त फ़ायदा नहीं मिलता."
4. एलर्जी का मौसम शुरू होने से पहले ही इलाज शुरू करें

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अक्सर लोग तब दवा शुरू करते हैं जब लक्षण दिखने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. बेहतर परिणाम के लिए एलर्जी सीज़न शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले ही नेज़ल स्प्रे का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए.
एक ट्रायल में पाया गया कि जिन लोगों ने पराग (पोलन) का मौसम शुरू होने से चार हफ्ते पहले स्प्रे इस्तेमाल करना शुरू किया, उन्हें उन लोगों की तुलना में ज़्यादा राहत मिली, जिन्होंने लक्षण आने के बाद इलाज शुरू किया.
5. दवा नियमित रूप से लें, भले ही उस दिन लक्षण न हों
डरहम कहते हैं कि "जब लोग कहते हैं कि दवा काम नहीं कर रही, तो इसके पीछे आमतौर पर दो कारण होते हैं- या तो दवा सही तरीके से नहीं ली जा रही होती है, या नियमित रूप से नहीं ली जा रही होती है."
रोज़ एक ही समय पर दवा लें, चाहे उस दिन लक्षण हों या नहीं. साथ ही, दवा की सही मात्रा का पालन करना भी ज़रूरी है.
एक ट्रायल में पाया गया कि जिन लोगों ने कॉर्टिकोस्टेरॉइड और एंटीहिस्टामीन वाले स्प्रे का दिन में दो बार इस्तेमाल किया, उन्हें एक बार इस्तेमाल करने वालों से ज़्यादा फ़ायदा मिला.
6. नेज़ल स्प्रे सही तरीक़े से इस्तेमाल करें
सही दवा चुनने के बाद भी कई लोग नेज़ल स्प्रे ग़लत तरीके़ से इस्तेमाल करते हैं. आम ग़लती यह है कि लोग बोतल को नाक के अंदर बहुत ऊपर तक डाल देते हैं, सिर पीछे झुका लेते हैं, स्प्रे करते हैं और फिर ज़ोर से सूंघते हैं. इससे दवा नाक में रहने की बजाय गले की तरफ चली जाती है.
जबकि दवा को असर करने के लिए नाक के अंदर ही रहना ज़रूरी होता है.
इसके बजाय, नाक को हल्का ऊपर उठाएं और स्प्रे को इस तरह डालें कि उसका रुख़ उसी तरफ के कान की ओर हो. सही एंगल पाने के लिए आप उल्टे हाथ का इस्तेमाल कर सकते हैं.
स्प्रे को नाक के अंदर बहुत ज़्यादा नहीं डालना चाहिए- क़रीब 6 मि.मी., लगभग एक चौथाई इंच ही पर्याप्त है.

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इसके बाद सिर को थोड़ा आगे झुकाएं और स्प्रे करें. कोशिश करें कि तुरंत नाक न साफ़ करें. इससे दवा नाक के सही हिस्से तक पहुंचती है और वहीं बनी रहती है, बजाय इसके कि तुरंत बाहर निकल जाए.
7. आई ड्रॉप्स का सही इस्तेमाल ज़रूरी
कई लोग सिर पीछे झुकाकर दवा सीधे आंख के ऊपर डालने की कोशिश करते हैं. लेकिन इससे अक्सर दवा बाहर निकल जाती है या आंख की सतह पर ठीक से फैल नहीं पाती.
इसके बजाय, सिर को एक तरफ झुकाएं, फिर आंख के अंदरूनी कोने में ड्रॉप डालें और हल्की पलक झपकाएं. इससे दवा आंख में बराबर तरीके से फैल जाती है और ज़्यादा असर करती है.
8. एलर्जी बढ़ाने वाले कारणों से बचें
दवा के अलावा, उन चीज़ों से दूरी बनाना भी ज़रूरी है जो एलर्जी बढ़ाती हैं. जैसे- खिड़कियां बंद रखना, यहां तक कि रात में भी, बाहर जाते समय सनग्लासेस या मास्क पहनना.
बाहर से आने के बाद अच्छी तरह हाथ-मुंह धोना या नहाना भी ज़रूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि पराग जैसे एलर्जी पैदा करने वाले तत्व आपके बालों और चेहरे पर चिपक जाते हैं. ये न सिर्फ़ आपको परेशान करते रहते हैं, बल्कि आपके बिस्तर और फ़र्नीचर तक भी फैल सकते हैं.

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9. अगर परेशानी बनी रहे, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी न करें
कई लोग हे फ़ीवर को आम मौसमी समस्या मानकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं. लेकिन ऐसा करना सही नहीं है और यह नुक़सानदायक भी हो सकता है.
यह समस्या कम समय और लंबे समय दोनों में आपकी जीवन गुणवत्ता, सांस लेने की क्षमता, नींद और बच्चों में पढ़ाई पर असर डाल सकती है.
अमेरिका के न्यू जर्सी में बाल एलर्जी विशेषज्ञ और बच्चों में एलर्जिक राइनाइटिस पर 2023 की एक समीक्षा के लेखक बैरी कोहेन कहते हैं, "अक्सर लोग इसे यह कहकर टाल देते हैं कि 'अरे, ये तो बस नाक बहने की मामूली समस्या है', लेकिन अगर आप साल में तीन महीने तक भी इससे परेशान रहते हैं, तो यह एक गंभीर बात है."
अगर आप सही तरीके से इलाज कर रहे हैं और फिर भी राहत नहीं मिल रही, तो अपने फैमिली डॉक्टर से ज़रूर मिलें.
कुछ मामलों में यह हे फ़ीवर नहीं, बल्कि अस्थमा या सांस से जुड़ी कोई अन्य बीमारी भी हो सकती है.
यहां तक कि अगर यह हे फ़ीवर ही हो, तब भी कुछ लोगों को अन्य इलाज जैसे एलर्जन इम्यूनोथेरेपी से फ़ायदा मिल सकता है. यह इलाज लंबे समय तक गंभीर लक्षणों को कम करने में मदद करता है, जिससे आप बिना परेशानी के गर्मियों का आनंद ले सकें.

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अहम जानकारी: इस लेख में दी गई सभी जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है. इसे आपके अपने डॉक्टर या किसी अन्य स्वास्थ्य‑विशेषज्ञ की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. इस वेबसाइट की सामग्री के आधार पर किसी उपयोगकर्ता द्वारा किए गए किसी भी निदान के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है और न ही इसकी कोई क़ानूनी जवाबदेही है. बीबीसी यहां सूचीबद्ध किसी भी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है और न ही उन साइटों पर बताए गए या सुझाए गए किसी व्यावसायिक उत्पाद या सेवा का समर्थन करता है. अगर आपको अपने स्वास्थ्य को लेकर किसी भी तरह की चिंता हो, तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें.
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