हरमनप्रीत कौर: मोगा से निकली वो क्रिकेट कप्तान जिसने भारत को जीतना सिखाया

हरमनप्रीत कौर
    • Author, संजय किशोर
    • पदनाम, क्रिकेट पत्रकार
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

वर्ष 2017. ग्राउंड डर्बी. 115 गेंदें और नाबाद 171 रन.

वर्ल्ड कप फ़ाइनल और भारत के बीच ऑस्ट्रेलिया दीवार बनकर खड़ा था. लेकिन हरमनप्रीत कौर ने उस दीवार को देखने से ही इनकार कर दिया.

गेंद बार-बार सीमा-रेखा के पार जाती रही और जिस मुल्क में महिला क्रिकेट को अब तक बहुत सीमित ध्यान मिलता था, वह अचानक सिर उठाकर देखने लगा.

भले ही फ़ाइनल में भारत की टीम हार गई, लेकिन एक नई शुरुआत तो पहले ही हो चुकी थी.

आज विश्व क्रिकेट में अगर महिला क्रिकेट को गंभीरता, लोकप्रियता और दर्शक मिल रहे हैं, तो इस कामयाबी के पोस्टर पर हरमनप्रीत कौर की तस्वीर ज़रूर होगी.

21वीं सदी की भारतीय महिला क्रिकेट की सबसे असरदार शख़्सियतों में हरमनप्रीत का नाम झूलन गोस्वामी और मिताली राज के साथ लिया जाता है.

नौ साल बाद 6 अक्तूबर 2026 को हरमनप्रीत कौर ने क्रिकेट के तीनों फ़ॉर्मेट की कप्तानी छोड़ दी और बस चंद लफ़्ज़ कहे- मैंने अपना फ़र्ज़ निभा दिया.

उन लफ़्ज़ों में कोई कड़वाहट नहीं थी. सिर्फ़ सुकून था.

मोगा की वो लड़की

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हरमनप्रीत का जन्म 8 मार्च 1989 को पंजाब के मोगा में हुआ. एक ऐसे क़स्बे में, जिसे क्रिकेट के सितारे गढ़ने के लिए नहीं जाना जाता था.

वह एक साधारण सिख परिवार में पली-बढ़ीं. न लड़कियों की कोई टीम थी, न कोई अकादमी, और मोहल्ले को एक लड़की के मैदान में खेलने पर अपनी राय देने की पूरी फ़ुर्सत थी.

उनके पिता हरमंदर सिंह भुल्लर ज़िला अदालत में क्लर्क थे और ख़ुद भी खेलों से गहरा रिश्ता रखते थे.

वह वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और क्लब क्रिकेट खेल चुके थे. वे ताने सुनते रहे और उन्हें अनसुना करते रहे. बेटी लड़कों के साथ गली क्रिकेट खेलती रही, कभी-कभी बल्ला न मिलने पर हॉकी स्टिक से, और गेंद फिर भी वहीं जाती रही जहाँ वह भेजना चाहती थीं.

फिर एक दिन कमलदीश सिंह सोढ़ी की नज़र उन पर पड़ी. एक क्रिकेट-प्रेमी स्कूल संचालक, जो अक्सर उसी मैदान में टहलने आया करते थे.

उन्होंने अपनी जेब से मदद की, उनके माँ-बाप को मनाया कि बेटी को खेलने दिया जाए और उन्हें ज्ञान ज्योति स्कूल की क्रिकेट अकादमी में दाख़िला दिलाया.

उनके बेटे यादविंदर उनके पहले कोच बने. एक पिता का ख़ामोश यक़ीन और एक कोच का भरोसा, यही उस इमारत की पहली दो ईंटें थीं जो आगे चलकर खड़ी हुई.

क्रिकेट में लंबा सफ़र

कोच अमोल मजूमदार के साथ हरमनप्रीत कौर
इमेज कैप्शन, कोच अमोल मजूमदार के साथ हरमनप्रीत कौर

20 वर्ष की उम्र में 2009 के वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ उन्होंने भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एंट्री की.

उस वक़्त वे मध्यम तेज़ गेंदबाज़ी करने वाली ऑलराउंडर थीं, जो आगे चलकर ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ बनीं. वे बल्ला अपने आदर्श वीरेंदर सहवाग की तरह घुमाती थीं.

तीन साल बाद वर्ष 2012 में उन्हें पहली बार भारत की कप्तानी करने का मौक़ा मिला. उन्होंने ग्वांगझोउ में पाकिस्तान को हराकर भारत को टी20 एशिया कप का ख़िताब दिलाया और फिर घरेलू ज़मीन पर बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दोनों सफ़ेद गेंद की सिरीज़ में भी जीत हासिल की.

2013 के वर्ल्ड कप में उन्होंने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हार में भी शतक जड़ा और विरोधी कप्तान शार्लट एडवर्ड्स ने इस पारी की खुलकर तारीफ़ की.

उसी पारी ने बता दिया था कि यह नाम याद रखने लायक़ है. 2016 में उन्हें भारत की नियमित टी-20 कप्तान की ज़िम्मेदारी मिली.

उसी साल ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उन्होंने उस वक़्त भारत का सबसे बड़ा सफल टी20 लक्ष्य का पीछा किया. इसी का इनाम था सिडनी थंडर के साथ बिग बैश का क़रार, जो किसी भी भारतीय क्रिकेटर के लिए पहला था.

अगले साल जून में वे इंग्लैंड की किया सुपर लीग में सरे स्टार्स से जुड़ने वाली पहली भारतीय बनीं.

और फिर आई वह 171 नाबाद की पारी.

उस पारी ने भारत को 2005 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप फ़ाइनल तक पहुँचाया और मोगा की एक लड़की को पूरे मुल्क की कहानी बना दिया.

कुछ ही हफ़्तों बाद तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें अर्जुन पुरस्कार दिया.

कप्तान, जिसने भारत को जीतना सिखाया

हरमनप्रीत कौर
इमेज कैप्शन, हरमनप्रीत कौर ने मिताली राज के बाद भारतीय टीम की कमान संभाली थी

उनकी कप्तानी बेबाक थी, बेख़ौफ़ थी और बदलाव लाने वाली थीं.

रणनीति और टीम-शीट से कहीं बढ़कर उन्होंने यह बदल दिया कि भारत ख़ुद को किस नज़र से देखता है.

बल्लेबाज़ी में वे हमेशा बेख़ौफ़ आक्रामक रहीं और कप्तानी तथा रणनीतिक समझ ने वक़्त के साथ उस आक्रामकता में परिपक्वता जोड़ दी.

2022 में मिताली राज के संन्यास के बाद वनडे टीम की बागडोर भी उन्हीं के हाथ आई.

उसी साल भारत ने उनकी अगुवाई में एशिया कप जीता. 2023 में उनकी अगुवाई में भारत ने हांगझोउ एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीता.

उसी साल उन्होंने मुंबई इंडियंस को पहली वीमेन्स प्रीमियर लीग का चैम्पियन बनाया.

पहले तीन सीज़न में मुंबई ने दो ख़िताब जीते और 2025 की जीत में हरमनप्रीत ने वह कर दिखाया जो कप्तान से उम्मीद की जाती है. पाँच ओवर के भीतर मुंबई के दोनों सलामी बल्लेबाज़ लौट चुके थे, तब उन्होंने 44 गेंदों पर 66 रन बनाकर दिल्ली कैपिटल्स से मैच छीन लिया.

दिसंबर 2023 सफ़ेद जर्सी में शायद उनका सबसे यादगार हफ़्ता था. टेस्ट कप्तान के रूप में अपने पहले मैच में उन्होंने नवी मुंबई में 49 और नाबाद 44 रन बनाए और भारत ने इंग्लैंड को 347 रनों से हराया, जो महिला टेस्ट इतिहास की सबसे बड़ी जीत थी.

कुछ ही दिन बाद मुंबई में वे उस ऑस्ट्रेलियाई टीम के ख़िलाफ़ टेस्ट जीत दिलाने वाली भारत की पहली कप्तान बनीं, जो महिला क्रिकेट की सबसे कामयाब टीमों में शुमार है.

ऑस्ट्रेलिया की कप्तान एलिसा हीली ने तब कहा था कि हरमनप्रीत ने भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी को आधुनिक क्रिकेट के मैदान में ला खड़ा किया है.

लेकिन उनके सफ़र का सबसे अहम लम्हा 2025 में आया और फिर सामने ऑस्ट्रेलिया ही था.

2017 की उस पारी की तरह, इस बार भी वे भारतीय महिला क्रिकेट के सबसे बड़े लम्हे के बीचों-बीच खड़ी थीं.

वर्ल्ड कप सेमी फ़ाइनल में उन्होंने 89 रन बनाए और जेमिमा रोड्रिग्स के साथ 167 रनों की साझेदारी की.

इस साझेदारी ने भारत को एक रिकॉर्ड सफल रन-चेज़ के साथ फ़ाइनल तक पहुँचाया.

कुछ ही दिन बाद भारत ने दक्षिण अफ़्रीका को हराकर अपना पहला वर्ल्ड कप जीता अपने घर में और ट्रॉफ़ी हरमनप्रीत के हाथों में थी.

सम्मान और पहचान

हरमनप्रीत कौर
इमेज कैप्शन, हरमनप्रीत कौर ने 37 साल की उम्र में टीम की कप्तानी छोड़ दी

हरमनप्रीत के खाते में मैदान की कामयाबी के साथ कई बड़े व्यक्तिगत सम्मान भी जुड़े.

2023 में वह विज़्डन क्रिकेटर्स ऑफ़ द ईयर चुनी जाने वाली भारत की पहली महिला क्रिकेटर बनीं.

उसी साल उन्हें TIME100 Next में भी जगह मिली और बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं की प्रतिष्ठित सूची में भी शामिल किया गया.

मई 2026 में पद्मश्री का सम्मान मिला.

उन्होंने कहा था कि वे वर्ल्ड कप, अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री का ख़्वाब देखा करती थीं. अब तीनों उनके नाम थे.

2026 की गर्मी मुश्किल निकली. भारत इंग्लैंड में टी20 वर्ल्ड कप के ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया और जुलाई में लॉर्ड्स के एकमात्र टेस्ट के लिए टीम गिरे हुए हौसले के साथ पहुँची.

यह उस मैदान पर खेला गया पहला महिला टेस्ट था, पुरुषों के 150 टेस्ट के बाद, और हरमनप्रीत जानती थीं कि इस इंतज़ार में कितना वक़्त लगा.

मैच की पूर्व संध्या पर उन्होंने कहा, "शायद देर हो गई है, पर इतनी भी नहीं कि बहुत देर हो जाए."

उन्होंने 121 गेंदों पर 58 रन बनाए और इसी पारी में 9,000 अंतरराष्ट्रीय रन का आँकड़ा पार किया.

मिताली राज और स्मृति मंधाना के बाद वे यह मुक़ाम छूने वाली सिर्फ़ तीसरी भारतीय महिला बनीं.

भारत ने वह मैच 270 रनों से जीता.

सितंबर में दुबई में वे 150 अंतरराष्ट्रीय टी-20 में किसी राष्ट्रीय टीम की कप्तानी करने वाली पहली खिलाड़ी बनीं, चाहे पुरुष हो या महिला.

आठ दिन बाद भारत ने श्रीलंका को 72 रनों से हराकर रिकॉर्ड आठवीं बार एशिया कप जीता.

और उसके 23 दिन बाद उन्होंने वह ख़त लिखा.

बेहतरीन रिकॉर्ड

हरमनप्रीत कौर साथी खिलाड़ियों के साथ

कप्तानी छोड़ते वक़्त उनके खाते में 9,191 अंतरराष्ट्रीय रन, आठ शतक और 44 अर्ध शतक दर्ज हैं.

स्कोरकार्ड में एक और हरमनप्रीत भी दर्ज है और वो है गेंदबाज़ हरमनप्रीत.

उन्होंने अभी तक 75 अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए हैं. इनमें नवंबर 2014 में मैसूर में अपने दूसरे टेस्ट में ही लिए गए वे नौ विकेट भी शामिल हैं, जब उन्होंने भारत को दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ पारी की जीत दिलाई थी.

कोई प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं हुई, बस इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट आई, जिसमें साफ़ उनकी अपनी आवाज़ सुनाई देती थी.

हरमनप्रीत ने लिखा कि उन्होंने अपना "ख़ून, पसीना, वक़्त" दिया और ऐसे फ़ैसले लिए जो "हमेशा समझे नहीं गए, हमेशा आसान नहीं थे", लेकिन सब इसलिए कि दूसरे आगे बढ़ सकें.

उन्होंने कहा कि उन्होंने "सबसे मुश्किल दौर, टूटे दिल, आलोचनाएँ" भी देखीं और बुलंदियाँ भी.

हरमनप्रीत ने लिखा- मैं आज भरे दिल से, लेकिन पूरे सुकून के साथ कप्तानी छोड़ रही हूँ.

उन्होंने बताया कि ये सुकून इस यक़ीन से आया कि उनकी टीम में "हुनर, किरदार, यक़ीन और एक भविष्य" है.

37 बरस की उम्र में वे संन्यास नहीं ले रहीं.

वे बस बोझ उतार रही हैं. प्लेइंग इलेवन चुनने की ज़िम्मेदारी, निगाहों की जाँच-परख और एक अरब उम्मीदों का बोझ.

जो बचता है, वही है जो मोगा की उस लड़की ने शुरू में चाहा था- एक बल्ला, एक जर्सी और एक खुला मैदान.

"कप्तानी ख़त्म होती है, लेकिन सफ़र जारी रहता है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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