वाराणसी: गंगा में नाव पर चिकन पकाने और शराब पीने का आरोप, 24 घंटे में मिली ज़मानत

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गंगा नदी में नाव पर कथित तौर पर चिकन पकाने और शराब का सेवन करने से जुड़ा एक मामला सामने आया है. ये मामला वाराणसी के दशाश्वमेध घाट का है.
इस मामले में पांच नामज़द और एक अज्ञात के ख़िलाफ़ 23 जून को दशाश्वमेध थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई थी और अगले ही दिन यानी 24 जून को सभी को ज़मानत मिल गई.
कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 20-20 हज़ार रुपये के दो-दो ज़मानती बॉन्ड जमा करने की शर्त पर पांचों अभियुक्तों को ज़मानत दे दी है.
इन पांचों अभियुक्तों का नाम दीपक कुमार, अजय साहनी, अरुण कुमार साहनी, अनुराग निषाद और राहुल साहनी हैं.
अदालत में बचाव पक्ष की ओर से पैरवी अधिवक्ता विकास सिंह ने की है.
मामला संज्ञान में कैसे आया?
दशाश्वमेध क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त अतुल अंजान त्रिपाठी ने बीबीसी को बताया, "यह मामला हमारे संज्ञान में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के ज़रिए आया था. हमने स्वतः संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस अधिकारी की ओर से तहरीर दिलवाई, जिसके आधार पर मुक़दमा दर्ज किया गया. इसके बाद वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया."
उन्होंने बताया कि वीडियो पुराना प्रतीत होता है.
उनके मुताबिक़, "वीडियो में दिखाई दे रहे युवक ठंड के कपड़े पहने हुए हैं, जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि यह वीडियो पुराना है. अभियुक्तों ने भी पूछताछ में बताया है कि यह घटना इसी वर्ष जनवरी-फ़रवरी के बीच की है. पांचों अभियुक्तों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच है."
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो गंगा नदी के बीचों-बीच का नहीं है. उनके मुताबिक़, युवक दशाश्वमेध घाट के किनारे बंधी एक नाव पर बैठकर चिकन बना रहे थे और शराब का सेवन कर रहे थे.
हालांकि वायरल वीडियो से यह स्पष्ट नहीं होता कि नाव नदी के बीच थी या किनारे पर खड़ी थी.
पुलिस के मुताबिक़, अभियुक्तों ने पूछताछ में कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि ऐसा करना क़ानून का उल्लंघन है और इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हो सकती हैं.
अभियुक्तों पर कौन सी धाराएं लगाई गईं?

बीबीसी को मिली एफ़आईआर की कॉपी के मुताबिक़ पुलिस ने अभियुक्तों पर बीएनएस की धारा 196(2) और 299 के तहत मुक़दमा दर्ज किया है.
बीएनएस की धारा 196(2) उन मामलों से जुड़ी है जिनमें किसी धार्मिक स्थल या धार्मिक आयोजन के दौरान ऐसा काम किया जाए, जिससे अलग-अलग समुदायों के बीच वैमनस्य या तनाव पैदा होने की आशंका हो या फिर सार्वजनिक सौहार्द प्रभावित हो. इस धारा में अधिकतम 5 साल तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है.
वहीं बीएनएस की धारा 299 उन कृत्यों से संबंधित है जिन्हें किसी धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान कर धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने के प्रयास के रूप में देखा जाता है. इसमें अधिकतम 3 साल तक की सज़ा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है?
वायरल वीडियो में कुछ युवक एक नाव पर सवार दिखाई देते हैं. नाव पर रखे स्टोव पर चिकन पकता नज़र आता है, जबकि पास में बीयर की कई बोतलें भी दिखाई देती हैं. वीडियो में एक युवक यह कहते हुए भी सुनाई देता है कि वे सभी पार्टी कर रहे हैं.
सभी ने स्वेटर और जैकेट पहने हुए हैं जिससे स्पष्ट है कि वीडियो ठंड के वक़्त की है.

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नाव किसकी थी?
कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि जिस नाव पर युवक चिकन बना रहे थे और शराब का सेवन कर रहे थे, वह बीजेपी पार्षद अगस्तकुंडा सत्यनारायण सहनी की है.
बीबीसी ने इस संबंध में सत्यनारायण सहनी से बात की. उन्होंने कहा, "यह नाव हमारी नहीं थी. यह सिंधिया घाट, यानी गंगा पार की नाव थी. इन लोगों ने उस नाव को हमारी नाव के पास बांध रखा था. हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. वीडियो कब का है, नाव किसकी है, हमें कुछ नहीं पता. हमारे ऊपर ग़लत आरोप लगाए जा रहे हैं. पुलिस अपनी जांच कर रही है, सच सामने आ जाएगा."
हालांकि, सहायक पुलिस आयुक्त का कहना है कि संबंधित नाव सत्यनारायण सहनी के परिवार की ही थी.
मुस्लिम युवकों को मिली थी 60 दिन बाद ज़मानत

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इससे पहले मार्च महीने में भी गंगा नदी से जुड़ा एक मामला काफ़ी चर्चा में रहा था. आरोप था कि कुछ मुस्लिम युवक इफ़्तार के दौरान नाव पर बैठकर चिकन बिरयानी खा रहे थे और उसके अवशेष गंगा नदी में फेंक दिए गए थे.
इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 युवकों को गिरफ्तार किया.
तक़रीबन 60 दिन जेल में गुज़ारने के बाद सभी 14 मुसलमान लड़कों को ज़मानत मिल पाई थी.
इस मामले में पुलिस ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ सात धाराओं में केस दर्ज किया था, जिनमें भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की छह धाराएं थीं.
ये हैं- बीएनस 298, 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करना), 196 (1) (बी) (सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश), बीएनएस 270 (सार्वजनिक उपद्रव), 279 (सार्वजनिक झरने या जलाशय के पानी को गंदा करना) और 223-बी (लोक सेवक की आज्ञा की अवहेलना करना).
इसके साथ ही पुलिस ने जल अधिनियम 1974 की धारा 24 के तहत भी केस दर्ज किया था. यह धारा कहती है कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर किसी भी धारा में कोई विषैला या हानिकारक पदार्थ नहीं डालेगा. इन सभी आरोपों की सज़ा सात साल से कम है.
हालिया मामले में इतनी जल्दी ज़मानत मिल जाने पर एआईएमआईएम प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल भी उठाए हैं.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "वेज चिकन पार्टी थी शायद... कल तक गंगा में इफ़्तार करने से जिनकी भावनाएं आहत हो रही थीं, आज उसी गंगा में चिकन और शराब की पार्टी से किसी की भावनाएं आहत क्यों नहीं हो रही हैं? शायद इसलिए कि इस बार पार्टी करने वाले दूसरे समुदाय के हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.






















