अपनी मां, बचपन, जेन जी, गांधी और आंबेडकर पर क्या बोलीं अरुंधति राय
'जब मैं नहीं रहूंगी, तो बस मेरे शब्द ही मायने रखेंगे...' ये शब्द हैं अरुंधति रॉय के. भारत की एक जानी-मानी लेखिका, जिन्हें उनकी किताब 'द गॉड ऑफ़ स्मॉल थिंग्स' के लिए प्रतिष्ठित बुकर प्राइज़ से सम्मानित किया जा चुका है.
अरुंधति अपनी किताबों के साथ-साथ अपने विचारों को लेकर भी अक्सर चर्चा में रहती हैं. पिछले साल उनकी किताब 'मदर मैरी कम्स टू मी' आई. इसमें उन्होंने अपनी मां से जुड़ी यादों को साझा किया है.
अरुंधति ने अपने बचपन की यादों, लेखिका बनने के सफ़र, हाल ही में हुए सीजेपी के प्रोटेस्ट से लेकर गांधी और आंबेडकर के बारे में खुलकर बात की है.
देखिए रूपा झा और बीबीसी की अलग-अलग भारतीय भाषाओं के पत्रकारों के साथ अरुंधति रॉय की यह ख़ास बातचीत.
वीडियो एडिटिंगः देवाशीष कुमार
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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