दुनिया के बीचोंबीच एक 'अजीबोग़रीब म्यूज़ियम'

इस्टेल, फ़ेलिशिया ली
    • Author, ऐनी बर्क
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

क़रीब तीस साल पहले याक-आंद्रे इस्टेल ने अपनी पत्नी से कहा, "हम रेगिस्तान में बैठकर सोचेंगे कि आगे क्या करना है."

ये कोई सनसनीख़ेज़ प्रस्ताव तो था नहीं. लेकिन, इस्टेल की पत्नी फ़ेलिशिया ली को अपने शौहर की अजीबो-ग़रीब आदतों का बख़ूबी अंदाज़ा था.

साल 1971 में इस्टेल अपनी उस वक़्त होने वाली पत्नी ली को लेकर दो इंजन वाले हवाई जहाज़ से दुनिया का चक्कर लगाने निकल पड़े थे.

उस विमान में शेवर्ले कार के बराबर भी जगह नहीं थी.

उससे भी पहले इस्टेल दुनिया को इस बात के लिए पुरज़ोर तरीक़े से राज़ी करने में जुटे हुए थे कि वो उड़ते विमान से छलांग लगाएं!

पचास के दशक में याक-आंद्रे इस्टेल अमरीकी मरीन के तौर पर कोरियाई युद्ध में हिस्सा ले चुके थे.

इस्टेल, फ़ेलिशिया ली

रोमांचक खेल

जब वो जंग के मोर्चे से लौटे, तो उन्होंने पैराशूट की मदद से ऐसा तरीक़ा निकाला कि कोई भी उड़ते हुए विमान से छलांग लगा ले.

उस दौर में 2500 फुट की ऊंचाई से छलांग लगाने का ये सनक भरा और ख़ुदकुशी वाला क़दम कहा जाता था.

मगर, आज वही जुनून स्काईडाइविंग के जोखिम भरे, मगर बहुत रोमांचक खेल का नाम है. इस्टेल की पत्नी फेलिशिया ली, स्पोर्ट्स इलस्ट्रेटेड पत्रिका की रिपोर्टर थीं.

तभी, उनकी मुलाक़ात होने वाले पति इस्टेल से हुई. उस वक़्त तक इस्टेल अमरीका भर में पैराशूट जंपिंग के जन्मदाता के तौर पर मशहूर हो चुके थे.

अपनी पत्रिका के लिए इस्टेल का इंटरव्यू करने के लिए फ़ेलिशिया उनसे मिलीं, तो उन्हें दिल दे बैठीं.

आख़िर फ़ेलिशिया को भी तो जोखिम भरे रोमांचक क़दम उठाने में लुत्फ़ आता था.

इस्टेल, फ़ेलिशिया ली

सोनोरन रेगिस्तान

इस्टेल कहते हैं, "अगर मैं अपनी बीवी फ़ेलिशिया से कहूं कि कल हम मंगल ग्रह पर जा रहे हैं, तो वो पूछेगी कि क्या-क्या सामान पैक करना है."

ली और इस्टेल के साहसिक काम करने के इसी जुनून ने 1980 में उन्हें नए मिशन पर जाने का रास्ता दिखाया.

1980 के दशक में ये जोड़ा कैलिफ़ोर्निया के दक्षिणी-पूर्वी इलाक़े में स्थित शहर युमा के पास बसने आ गया.

ये जगह एरिज़ोना से गुज़रने वाले अमरीकी हाइवे इंटरस्टेट 8 के क़रीब था.

यहां पर याक-आंद्रे इस्टेल ने कई दशक पहले क़रीब 2600 एकड़ ज़मीन पहले से ही ख़रीदी हुई थी. ये जगह सोनोरन रेगिस्तान के दायरे में आती है.

इस जगह पर मौजूद पानी के सोते के अलावा दिलचस्पी की कोई चीज़ नहीं थी. लेकिन, इस्टेल और उनकी पत्नी को ये शांत और ख़ूबसूरत जगह बहुत पसंद आई.

इस्टेल, फ़ेलिशिया ली

दुनिया का केंद्र

बालू के टीलों और एक पार्क के सिवा यहां कुछ नहीं था. यानी, इस्टेल और उनकी पत्नी ने एक वीरान रेगिस्तान में अपना बसेरा बनाया था.

1985 में इस्टेल ने कैलिफ़ोर्निया के स्थानीय प्रशासन को अपनी ज़मीन में विश्व का आधिकारिक केंद्रीय ठिकाना बनाने के लिए मना लिया.

अब धरती गोल है. तो, किसी भी ठिकाने को कहा जा सकता है कि वो दुनिया का केंद्र है.

लेकिन, इस्टेल ने अपनी ज़मीन पर स्मारक बनाकर इसे दुनिया का आधिकारिक केंद्रीय स्थान घोषित कर दिया.

अब ऐसे मील के पत्थर के आस-पास कोई शहर नहीं, तो कम से कम एक क़स्बा तो होना चाहिए था. तब, इस्टेल ने फेलिसिटी नाम का शहर बसाने का फ़ैसला किया.

यहां कुल 15 लोग रहते हैं. उन सब ने मिलकर इस्टेल को शहर का मेयर भी चुन लिया है. लेकिन, इस्टेल अपने इस तुग़लक़ी शहर का मेयर बनकर ही संतुष्ट नहीं हुए.

इस्टेल, फ़ेलिशिया ली

इंसानियत की डायरी

उनका इरादा ग्रेनाइट से एक ऐसा स्मारक बनाने का था, जिसे दूसरी दुनिया से आने वाले लोग भी इंसानियत की डायरी समझें.

तो, इस्टेल ने सबसे पहले कोरियाई युद्ध के दौरान के अपने साथियों के नाम खुदवाने के लिए ग्रेनाइट का एक स्मारक बनवाया.

इसके अलावा इस्टेल ने बीच रेगिस्तान में जहां पढ़ाई की थी वहां का स्मारक यानी प्रिंसटन यूनिवर्सिटी का मेमोरियल भी बनवाया.

इसके बाद इस्टेल ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान फ्रांस से भागे अपने परिवार की बातें ग्रेनाइट पर खुदवा दीं. इस्टेल के पिता फ्रांस के नेता चार्ल्स डे गॉल के सलाहकार रहे थे.

उनकी मां, विश्व युद्ध के दौरान स्वयंसेवक रही थीं. असल में याक-आंद्रे इस्टेल का इरादा कोई मामूली स्मारक बनाने का नहीं था.

वो रेगिस्तान में एक भव्य स्मारक बनाना चाहते थे. उन्होंने इंजीनियरों से ग्रेनाइट का ऐसा स्मारक बनाने को कहा जो साल 6000 तक चल सके.

इस्टेल, फ़ेलिशिया ली

'द म्यूज़ियम ऑफ़ हिस्ट्री इन ग्रेनाइट'

साल 1991 में ये तिकोना स्मारक बन कर तैयार हो गया. ये क़रीब 100 फुट लंबा, 4.5 फुट ऊंचा और ग्रेनाइट के 60 पैनलों को मिलाकर बना था.

इसके भीतर लोहे का कवच लगाया गया था, जिसे काफ़ी गहराई तक गाड़ा गया था.

इसके तैयार होने के बाद इस्टेल ने तय किया कि वो कोरियाई युद्ध में मारे गए अपने साथियों की याद में स्मारक बनवाएंगे.

इसके बाद तीसरा, चौथा और पांचवां स्मारक बनाया गया. आज सोनोरम के रेगिस्तान में इस्टेल के बनवाए ग्रेनाइट के 20 स्मारक खड़े हैं.

इसे 'द म्यूज़ियम ऑफ़ हिस्ट्री इन ग्रेनाइट' का नाम दिया गया है. इस्टेल कहते हैं कि जब मंगलवासियों को धरती के बारे में जानना होगा, तो, वो यहीं आएंगे.

ग्रेनाइट के स्मारकों पर इस्टेल ने दुनिया की तमाम बातों को उकेर रखा है. इनमें बिग बैंग थ्योरी से लेकर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा तक का ज़िक्र है.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 1
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 1

मानवता का इतिहास

यहां पर आकर आप हिंदुत्व भी सीख सकते हैं और यहां से आप जीसस, एट्टिला और पाइथागोरस के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं.

यहां पर अमरीकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का मशहूर गेटिसबर्ग भाषण भी दर्ज है और चांद तक के सफ़र को भी तफ़्सील से बयां कर दिया गया है.

यहां पर आतंकवाद के बारे में भी अंकित किया गया है. इसके अलावा मानवता के इतिहास के कुछ पन्ने भी यहां ग्रेनाइट की चट्टानों पर दर्ज किए गए हैं.

इस स्मारक के लिए रिसर्च का काम फेलिशिया करती हैं. वो ऑक्सफोर्ड, ब्रिटैनिका और लारोस की किताबों की मदद से जानकारियां जुटाती हैं. फिर इस्टेल उसे लिखते हैं.

और उसके बाद दोनों मिलकर आख़िरी ड्राफ्ट तैयार करते हैं. जब लिखने का काम पूरा हो जाता है. तो मज़दूर उसे ग्रेनाइट पर उकेरते हैं.

कई बार रेगिस्तान की गर्मी से बचने के लिए उकेरने का काम रात में होता है. और ग्रेनाइट पर केवल शब्द नहीं लिखे जाते.

अमरीकी राष्ट्रपति जेम्स मेडिसन

उन्हें इलस्ट्रेशन के ज़रिए विस्तार से समझाने का काम भी होता है. अब छोटे से स्मारक में मानवता का पूरा इतिहास तो दर्ज नहीं हो सकता.

तो, इस्टेल कई बार कुछ चीज़ों को जोड़ कर स्मारक के कुछ हिस्सों की थीम तय करते हैं.

जैसे कि हम्मूराबी की संहिता और मशहूर टेन कमांडमेंट्स को क़ानून के शुरुआती विचार शीर्षक से दर्ज किया गया है.

इस्टेल की निजी दिलचस्पी की चीज़ों जैसे पैराशूटिंग के बारे में विस्तार से लिखा गया है. कई शिलालेख तो मज़ेदार हैं.

जैसे कि 1809 में अमरीकी राष्ट्रपति जेम्स मेडिसन ने एक बीयर मंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था.

इसके अलावा एक जगह टीवी रिमोट के म्यूट बटन के बारे में लिखा गया है, क्योंकि इस्टेल इसे बहुत बड़ा आविष्कार मानते हैं.

पृथ्वी का केंद्र

वो, बातें दर्ज करने के दौरान तथ्यों का बहुत ख़याल रखते हैं. एकतरफ़ा बातें नहीं दर्ज की जाती हैं.

म्यूज़ियम देखने आने वाले यहां सर्दियों के दिनों में आना पसंद करते हैं, जब तापमान कम होता है, यानी नवंबर से मार्च महीने के बीच.

लोग यहां के रेस्टोरेंट में बैठकर सुस्ता भी सकते हैं. एक वीडियो पैनल पर इस मेमोरियल के बारे में शॉर्ट फ़िल्म भी सैलानियों के लिए चलाई जाती है.

इस्टेल की ज़मीन पर कई अजीबो-ग़रीब चीज़ें भी देखने को मिलती हैं. जैसे कि एफ़िल टॉवर की असली सीढ़ियों का एक हिस्सा.

या फिर रोम के सिस्टीन चैपल में माइकल एंजेलो के बनाए बुत आर्म ऑफ़ गॉड की नक़ल.

यहां पर 21 फुट ऊंचा गुलाबी रंग का ग्रेनाइट का खोखला पिरामिड भी है. इसी के भीतर एक प्लेट पर इस जगह को पृथ्वी का केंद्र बताया गया है.

बहुत सी बातें...

दो से तीन डॉलर में आप पूरे स्मारक का चक्कर लगा सकते हैं. यहां तस्वीरें खिंचवाने के लिए आपको पैसे देने होंगे.

इस रेगिस्तानी स्मारक की सबसे ऊंची इमारत सफ़ेद रंग का चर्च है. इस्टेल और उनकी पत्नी इस स्मारक के पास ही बने अपने खुले से मकान में रहते हैं.

90 साल की उम्र में भी इस्टेल के हौसले में कोई कमी नहीं आई है. वो अभी यहां और भी बहुत कुछ तामीर करना चाहते हैं.

अभी भी ग्रेनाइट के ख़ाली पैनल पड़े हुए हैं. जिस पर बहुत सी बातें लिखी जानी बाक़ी हैं.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 2
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 2

इस्टेल, इस स्मारक के बारे में आने वाले ऑनलाइन कमेंट को ख़ुद पढ़कर हर एक का जवाब देते हैं. भले ही वो उनकी बुराई करने वाले ही क्यों न हों.

"कभी अगर दूसरी दुनिया के बाशिंदे धरती पर आए, तो उनके बनाए स्मारकों में घूमकर एलियन्स को इंसानियत के बारे में मोटा-मोटा अंदाज़ा तो हो ही जाएगा."

इस्टेल को लगता है कि एक वक़्त ऐसा आएगा, जब इंसान दूसरे ग्रहों ही नहीं सितारों पर भी कॉलोनी बसाएगा.

वहां से कोई इंसान कभी धरती पर लौटा, तो उसके लिए यहां एक संदेश लिखा गया है, "भविष्य के मानव, जो धरती से दूर बसेरा बनाएंगे, वो यहां आकर हम सबका सामूहिक इतिहास जान लें और हमसे लगाव पैदा करें."

छोड़िए YouTube पोस्ट, 3
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 3

(बीबीसी ट्रैवल पर इस लेख को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. बीबीसी ट्रैवल को आपइंस्टाग्राम,फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)