अमीरों के इस शहर में कचरे की सूनामी का ख़तरा

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या
    • Author, डेविड रॉबसन
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
  • प्रकाशित

हांगकांग अपनी ऊंची इमारतों, चमक-दमक भरी ज़िंदगी और खान-पान के लिए मशहूर है. यहां की अमीरी के क़िस्से दुनियाभर में मशहूर हैं.

हांगकांग कारोबार का भी बड़ा केंद्र है. मगर इन दिनों हांगकांग को एक बहुत बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है और ये चुनौती है कचरा.

हांगकांग में इस वक़्त कचरे से निपटना यहां के प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. हांगकांग में जगह की वैसे ही भारी कमी है.

यहां दो हज़ार वर्ग किलोमीटर के दायरे में क़रीब 70 लाख लोग रहते हैं. मकाऊ और सिंगापुर के बाद ये दुनिया की तीसरी सबसे घनी आबादी वाली जगह है.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

कचरे की चुनौती

ऐसे में कचरा फेंकने के ठिकाने भी बेहद कम हैं. कचरे के बड़े होते ढेर, हांगकांग को पर्यावरण की आपदा की तरफ़ धकेल रहे हैं.

यहां के लोग, हांगकांग का प्रशासन, यहां के नेता सबके सब इस विकराल होती चुनौती से परेशान हैं.

हम आप तो कचरे को ज़रा भी गंभीरता से नहीं लेते, इकट्ठा किया और बाहर फेंक दिया. मगर हांगकांग के लोगों के लिए ये विकल्प नहीं है.

यहां कचरा फेंकने के 13 ठिकाने पहले ही भर चुके हैं. अब इनके ऊपर पार्क, गोल्फ़ कोर्स और खेल के मैदान बना दिए गए हैं.

अब हांगकांग में कचरा फेंकने के सिर्फ़ तीन ठिकाने बचे हैं.

और जिस तेज़ी से उनमें कूड़ा जमा हो रहा है, उससे वो दिन दूर नहीं जब हांगकांग में कचरा फेंकने की जगह ही नहीं बचेगी.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

हांगकांग से सबक

हांगकांग में हर साल क़रीब 37 लाख टन कचरा जमा होता है.

हांगकांग की चाइनीज़ यूनिवर्सिटी के चैन किंग मिंग कहते हैं कि 2020 तक हांगकांग में कचरा फेंकने की जगह ख़त्म हो जाएगी.

ये दावा सिर्फ़ चैन का नहीं, हांगकांग का पर्यावरण संरक्षण विभाग भी यही कहता है. चैन एक पर्यावरणविद् भी हैं और नेता भी.

वो हांगकांग की नियो डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं.

दोनों रोल निभाने के चलते चैन को पता है कि हांगकांग सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी तौर पर कचरे की इस बाढ़ की कैसी चुनौती झेल रहा है.

चैन चेतावनी देते हैं कि बाक़ी दुनिया को हांगकांग से सबक़ लेने की ज़रूरत है. अगर हम वक़्त पर नहीं चेते तो हांगकांग आज जिस मुश्किल से दो-चार है, आगे चलकर दुनिया का हर शहर और देश उसका सामना करेगा.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

खुली अर्थव्यवस्था

चैन कहते हैं कि दुनिया के हर देश में शहरों की आबादी बढ़ रही है. ये आबादी रोज़ाना ढेर सारा कचरा पैदा करती है. जिसे ठिकाने लगाने के ठिकाने बहुत कम हैं.

हांगकांग में तो सैलानी भी ख़ूब आते हैं. हर साल यहां क़रीब छह करोड़ सैलानी आते हैं. इनमें से 70 फ़ीसद तो चीन से ही आते हैं.

लोगों को हांगकांग का खान-पान और यहां के शॉपिंग मॉल ख़ूब लुभाते हैं.

इन सैलानियों का आना हांगकांग की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद ज़रूरी है. मगर इनकी वजह से भी भारी तादाद में कचरा पैदा होता है.

हांगकांग की एक और मुश्किल है. यहां खुली अर्थव्यवस्था है. जिसका मतलब ये कि यहां की सरकार लोगों की ज़िंदगी में और कारोबार में बहुत कम दखल देती है.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

चीन की सरकार

इसलिए घर हों या कारखाने, अपनी मर्ज़ी से चलते हैं. ऐसे में उनसे कचरा निकलने की तादाद बढ़ती जाती है.

पहले तो हांगकांग अपना काफ़ी कचरा चीन को निर्यात कर देता था. चीन के कारोबारी उस कचरे से फ़ायदे की चीज़ें छांट लेते थे. बाक़ी कचरा डंप कर दिया जाता था.

लेकिन जब इस कचरे से चीन के शहरों के लिए पर्यावरण की चुनौती खड़ी होने लगी, तो चीन की सरकार ने हांगकांग से कचरे के आयात पर रोक लगा दी.

चीन की सरकार ने कहा कि पहले हांगकांग में कचरा छांटा जाए, तभी वो उसके आयात की मंज़ूरी देंगे.

मतलब ये कि कचरे में से धातुएं, प्लास्टिक जैसी चीज़ें अलग-अलग की जाएं, जिनका दोबारा इस्तेमाल हो सकता है.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

कचरा टैक्स

साथ ही बायो-वेस्ट यानी ऐसा कचरा जो सड़ जाता है, वो हांगकांग में ही रह जाए, इसकी मांग भी चीन ने की.

हांगकांग में पर्यावरण के लिए काम करने वाले डग वूडरिंग कहते हैं कि हांगकांग ने अब तक ऐसी तकनीक में निवेश नहीं किया जो कचरे को रिसाइकिल करके फिर से इस्तेमाल लायक़ बना सके.

यही वजह है कि बार-बार चेतावनी के बाद भी घरों और कारखानों से निकलने वाले कचरे की तादाद पर रोक नहीं लग सकी है.

हांगकांग के प्रशासन ने कई साल पहले प्रस्ताव दिया था कि कचरे पर टैक्स लगाया जाए. हर घर से हर महीने तीन से पांच सौ रुपए कचरा टैक्स के नाम पर वसूले जाएं.

इससे लोग कचरे को लेकर जागरूक होंगे और कम कूड़ा जमा करेंगे.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

पर्यावरण संरक्षण

हांगकांग के पड़ोसी देश ताइवान और दक्षिण कोरिया की राजधानी सिओल में कचरा टैक्स लगाकर कूड़े की तादाद में तीस फ़ीसद तक की कटौती की गई है.

हांगकांग के पर्यावरण संरक्षण विभाग ने कचरे के निपटारे के लिए लंताऊ द्वीप पर कचरा जलाने की एक फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव रखा है.

इसमें 10 अरब डॉलर का ख़र्च आएगा. लेकिन कचरा जलाने के बाद इसे ठिकाने लगाने के लिए कम जगह की ज़रूरत होगी. हालांकि स्थानीय लोग इसके विरोध में हैं.

क्योंकि इससे आबो-हवा ख़राब होने का डर है.

चैन कहते हैं कि कचरे के निपटारे के लिए फूड प्रोसेसिंग प्लांट लगाना ज़्यादा बेहतर विकल्प है. इस प्लांट में होटलों और रेस्टोरेंट से निकले कचरे को रिसाइकिल किया जा सकेगा. इससे निकली खाद का इस्तेमाल हांगकांग में हो सकेगा. आज की तारीख़ में तो हांगकांग खाद भी नीदरलैंड जैसे देशों तक से मंगाता है. इस कचरे को रिसाइकिल करके इससे ऊर्जा पैदा की जा सकेगी. बायोगैस की मदद से कारें चलाई जा सकती हैं.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

कचरे का फिर से इस्तेमाल

चैन मानते हैं कि कचरे को ठिकाने लगाने के लिए हॉन्ग कॉन्ग को कम से कम बीस ऐसे प्लांट लगाने की ज़रूरत है. पर इससे फ़ायदा ये होगा कि हॉन्ग कॉन्ग अपने कचरे का फिर से इस्तेमाल कर सकेगा.

साथ ही वुडरिंग सलाह देते हैं कि हॉन्ग कॉन्ग के लोगो को कचरे को अलग-अलग रखने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए. जो बायोवेस्ट, प्लास्टिक और कांच-धातुओं को अलग-अलग करके रखें. गीले और सूखे कचरे को भी अलग रखा जाए. इससे उन्हें छांटने के झंझट से बचा जा सकेगा. जो कचरा रिसाइकिल नहीं किया जा सकता, उसमें से काम की चीज़ें निकालने में सहूलत होगी. चीन भी ऐसे छांटे हुए कचरे के आयात की इजाज़त दे देगा.

वुडरिंग कहते हैं कि लोगों को कचरे के बढ़ते ख़तरे के प्रति आगाह करना होगा, ताकि वो कूड़ा कम पैदा करें. रेस्टोरेंट से लेकर घरों तक प्लास्टिक फूटप्रिंट का हिसाब रखा जाए, ताकि लोगों को मालूम हो कि वो कितना कचरा पैदा करते हैं. और उस तादाद को कम करें.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

वियतनाम और फिलीपींस

हांगकांग का एक रेस्टोरेंट, पैसिफ़िक कॉफी तो कॉफ़ी के कप के ढक्कन को वापस करने पर एक कप कॉफ़ी मुफ़्त में देता है.

वुडरिंग के मुताबिक़ ये तो महज़ शुरुआत है. पर ये अच्छी शुरुआत है. हांगकांग की अपने कचरे की दिक़्क़त भर नहीं.

इसके पड़ोसी देश भी समंदर में कचरे को ठिकाने लगा रहे हैं, जो लहरों के साथ कई बार हांगकांग के समुद्री किनारों पर जमा हो जाता है.

ये कचरा चीन, वियतनाम और फिलीपींस से आने की आशंका जताई जा रही है.

डग वुडरिंग बताते हैं कि ये कचरा ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से समंदर में फेंका जा रहा है. ख़ास तौर से चीन के पर्ल नदी के डेल्टा में काफ़ी कचरा फेंका जा रहा है.

हॉन्ग कॉन्ग में कचरे की समस्या

कचरे का ग्लेशियर

हांगकांग के पास स्थित चीन के एक द्वीप वायलिंगडिंग में तो कचरे का इतना बड़ा ढेर लग गया है कि वो बीस मंज़िला इमारत जैसा दिखता है.

वुडरिंग जैसे जानकार डर जताते हैं कि किसी समुद्री तूफ़ान की सूरत में कचरे की ये इमारत ढह जाएगी. तब ये कचरा हांगकांग के लिए मुसीबत बन सकता है.

वो इसे कचरे का ग्लेशियर कहते हैं, जो थोड़ा-थोड़ा टूटकर समंदर में गिर रहा है.

चैन मिंग किंग कहते हैं कि हांगकांग के लोग बातें ख़ूब कर रहे हैं. कचरे को लेकर फ़िक्र जता रहे हैं. मगर एक्शन कम ही हो रहा है. कूड़े से निपटने के नुस्खे तो तमाम सुझाए जा रहे हैं. लोगों को जागरूक करने की बातें हो रही हैं. मगर अमल में इतनी देरी हो रही है कि शायद जब तक अमल हो, तब तक बहुत देर हो जाए.

यानी हांगकांग पर कचरे की सूनामी आने का ख़तरा मंडरा रहा है. ये बाक़ी दुनिया के लिए भी सबक़ है.

(बीबीसी फ़्यूचर पर इस स्टोरी को इंग्लिश में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी फ़्यूचर कोफ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)