अब लगेगा कुश्ती में ग्लैमर का तड़का

    • Author, राखी शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

कुछ महीने पहले आमिर ख़ान ने कहा था कि उनकी आने वाली फ़िल्म 'दंगल' के बाद कुश्ती भारत में और लोकप्रिय हो जाएगी.

हर काम टाइम पर करने वाले मिस्टर परफेक्शिनिस्ट आमिर ख़ान से लेकिन लगता है इस बार चूक हो गई.

आमिर की फ़िल्म 'दंगल' इस साल तो कम से कम रिलीज़ नहीं होगी, लेकिन कुश्ती को लोकप्रीय बनाने इसकी ग्लैमराइज़्ड लीग- प्रो कुश्ती लीग पहले आ रही है.

कुश्ती जैसा खेल भी ग्लैमराइज़ हो सकता है. इसका उदाहरण है भारतीय पहलवान महावीर सिंह और उनकी पहलवान बेटियों गीता और बबीता फोगाट पर बनी रही फ़िल्म 'दंगल'.

इस फ़िल्म में महावीर सिंह का किरदार आमिर ख़ान निभाएंगे.

आमिर का मानना है, "कुश्ती शायद दुनिया का सबसे पुराना खेल है. फिर भी इस खेल को हम उतनी अहमियत नहीं देते."

वो कहते हैं, "ये एक मज़ेदार खेल है. अगर हम पर्दे पर इस खेल की कहानी सही तरीके से दिखा पाए, तो कुश्ती को इससे काफी फ़ायदा मिलेगा."

कुश्ती में ग्लैमर

नवंबर में भारत में प्रो-कुश्ती लीग शुरू हो रही है जिसमें अन्य पहलवानों समेत दुनियाभर के बीस ओलम्पिक पदक विजेता हिस्सा लेंगे.

2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों की गोल्ड मेडल विजेता और महावीर सिंह की बेटी गीता फोगाट इनमें से एक हैं.

गीता कहती हैं, "कुश्ती में भी ग्लैमर का तड़का लगने वाला है. नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को इसका काफी फ़ायदा मिलेगा."

उनका कहना है, "लोग अभी सिर्फ उन खिलाड़ियों को जानते हैं जो ओलम्पिक में मेडल लेकर आए हैं. इस लीग से उन पहलवानों को भी पहचान मिलेगी जो कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स जैसे खेलों में भी मेडल जीतते हैं."

शून्य से करोड़ों का सफ़र

1952 के हेल्सिंकी ओलम्पिक्स में केडी जाधव ने ब्रॉन्ज़ जीतकर भारत को कुश्ती में पहला मेडल दिलाया था.

उन्हें ईनाम के तौर पर कोई प्रोत्साहन राशि नहीं मिली थी. तब जाधव को शायद ही अंदाज़ा रहा होगा कि एक दिन इसी खेल में करोड़ों बरसेंगे.

19 करोड़ 26 लाख रूपये. ये वो रकम है जो प्रो कुश्ती लीग में ईनाम और नीलामी राशि के तौर पर पहलवानों के बीच बांटी जाएगी.

हेल्सिंकी खेलों से अबतक 63 सालों में कुश्ती ने एक लम्बा वक्त तय किया है. अख़ाड़े से लेकर मैट तक और अबतक इसके काफी दांव पेंच बदल चुके हैं.

2008 बीजिंग ओलम्पिक्स में ब्रॉन्ज और 2012 लंदन ओलम्पिक्स में भारत को रजत पदक जीतने वाले सुशील कुमार हालांकि मानते हैं कि इस खेल का नंबर आने में अब भी देर नहीं हुई.

वो कहते हैं, "इस लीग के शुरू होने का इससे अच्छा समय नहीं हो सकता था. ओलम्पिक्स नज़दीक है. हमारे खिलाड़ी लीग की तैयारियां ओलम्पिक्स को ध्यान में रखकर करेंगे."

उनके मुताबिक़, "जितने ज़्यादा विदेशी खिलाड़ी हमारे यहां आकर खेलेंगे, हमारा खिलाड़ियों को उतना ही अधिक एक्सपोजर मिलेगा."

पैसों के साथ पहचान भी

बजरंग कुमार केवल 22 साल के हैं और 61 किलो वर्ग फ्रीस्टाइल में भारत को 2014 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों का रजत पदक दिला चुके हैं.

हरियाणा के झज्जर जिले से आने वाले बजरंग कहते हैं, "इस तरह की लीग का आयोजन खिलाड़ियों के लिए बेहद ज़रूरी है. जो पहचान और पैसा उन्हें देश के लिए खेलकर नहीं मिलता, वो इन लीग के ज़रिए मिल जाता है. काफी वक्त से हमें ऐसे ही मौके का इंतज़ार था."

प्रो-कुश्ती लीग 8 से 29 नवंबर तक भारत के छह शहरों में खेली जाएगी.

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