धोनी की वापसी में दीवार बन गए हैं केएल राहुल

केएल राहुल
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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

2, 62, 11, 91, 45, 54, 56 और नाबाद 57 ये हैं केएल राहुल की टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अंतिम आठ पारियां.

वहीं, 102, 77, 47, 80 और 19 के स्कोर उन्होंने अपनी अंतिम पांच वनडे पारियों में बनाए हैं.

टी-20 की आख़िरी आठ और वनडे की आख़िरी पांच पारियों में केएल राहुल ने 50 के औसत से अधिक रन बनाए हैं.

ये स्कोर बताता है कि केएल राहुल इन दिनों विपक्षी गेंदबाज़ो पर किस कदर हावी हैं.

ये उनके शानदार फ़ॉर्म का ही परिणाम है कि भारत ने न्यूज़ीलैंड दौरे पर खेली जा रही पांच मैचों की टी-20 सिरीज़ के दो शुरुआती मुक़ाबले भी अपने नाम कर लिए हैं.

जबकि न्यूज़ीलैंड को उसी की ज़मीन पर हराना हमेशा टेढ़ी खीर माना जाता रहा है.

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विराट कोहली की कप्तानी

भारतीय टीम न्यूज़ीलैंड से टी-20 सिरीज़ के अलावा तीन एकदिवसीय और दो टेस्ट मैच भी खेलेगी. विराट कोहली की कप्तानी में भारत ने दौरे की शुरुआत जीत से की.

उसने पांच टी-20 मैचों की सिरीज़ के पहले ही मैच में न्यूज़ीलैंड को एक ओवर बाक़ी रहते छह विकेट से मात दी.

वो भी उस मैच में, जिसमें न्यूज़ीलैंड ने पहले बल्लेबाज़ी की दावत पाकर निर्धारित 20 ओवर में पांच विकेट खोकर 203 रन बनाए थे.

भारत ने भी पलटवार किया और केएल राहुल के 56, विराट कोहली के 45 और श्रेयस अय्यर के नाबाद 58 रन के सहारे जीत अपने नाम की.

सबसे बड़ी बात सलामी बल्लेबाज़ केएल राहुल ने विकेटकीपर और बल्लेबाज़ के रूप में अपनी भूमिका जानदार और शानदार अंदाज़ में निभाई.

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विकेटकीपर की भूमिका

केएल राहुल केवल 27 गेंद पर चार चौके और तीन छक्के जमाते हुए 56 रन बनाकर न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ो का डर ख़त्म कर दिया.

दूसरे, टी-20 मुक़ाबले में भी केएल राहुल ने 50 गेंदों पर तीन चौके और दो छक्कों की मदद से नाबाद 57 रन बनाए और जीत के लिए 133 रन का लक्ष्य हासिल करने में अपना अहम योगदान दिया.

केएल राहुल टी-20 सिरीज़ में विकेटकीपर की भूमिका भी अदा कर रहे है. उनके अलावा श्रेयस अय्यर ने भी 44 रन बनाए.

अब चर्चा गर्म है कि केएल राहुल ने ऋषभ पंत, संजू सैमसन और महेंद्र सिंह धोनी की विकेटकीपर के तौर पर वापसी के तमाम रास्ते बंद कर दिए हैं.

श्रेयश अय्यर
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सही तकनीक का इस्तेमाल

पहले मैच के बाद केएल राहुल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि पिछले 12-15 महीनों में उन्होंने ये सीखा है कि वो अपना खेल खेलें.

उन्होंने अपनी ताक़त का राज़ ख़ुद खोलते हुए कहा कि वो मैदान में कहीं भी शॉट्स लगाएं, लेकिन उसके पीछे सही तकनीक का इस्तेमाल करते है.

इसके अलावा सही पोजीशन में आकर खेलने से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है. भविष्य में भी वो इसी रणनीति के साथ मैदान में उतरने का इरादा रखते हैं.

वो अपने साथी खिलाड़ी श्रेयस अय्यर की तारीफ़ करना भी नही भूलते.

उन्होंने माना कि जब मैच एक स्थिति में आकर फंस गया था वहं श्रेयस अय्यर ने बेहद परिपक्व पारी खेली और भारत को जिताया.

न्यूज़ीलैंड के विभिन्न आकार के मैदान को लेकर भी उन्होंने माना कि इसके लिए उन्होंने ख़ास तैयारी की है.

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लाइन और लेंग्थ

केएल राहुल अपनी विकेटकीपिंग को लेकर भी बेहद खुश है.

उनका कहना है कि आईपीएल में एक सलामी बल्लेबाज़ के अलावा दस्ताने पहनकर मैदान में उतरने का अनुभव उनके काम आया.

इसका फ़ायदा वह गेंदबाज़ो को भी पहुंचाते हैं और उन्हें बताते हैं कि विकेट का बर्ताव कैसा है और उन्हें किस लाइन और लेंग्थ के साथ गेंद करनी चाहिए.

इससे कप्तान को भी फिल्डिंग सजाने में मदद मिलती हैं. केएल राहुल मानते हैं कि इससे ख़ासकर 20 ओवर के मैच में कैसे शॉट्स खेले जाएं, ये समझ में आता है.

विकेटकीपर के तौर पर अतिरिक्त ज़िम्मेदारी को निभाने में वोआनंद महसूस करते हैं.

ऋषभ पंत
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कामयाबी का सिलसिला

अब अगर उनके विकेटकीपिंग करने से कप्तान विराट कोहली को एक अतिरिक्त खिलाड़ी को खिलाने का मौक़ा मिल रहा है तो ये दूसरे विकेटकीपर ऋषभ पंत और संजू सैमसन के लिए ख़तरे की घंटी भी है.

अगर केएल राहुल की कामयाबी का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा तो हो सकता है कि ऋषभ पंत और संजू सैमसन के लिए इसी साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले आईसीसी टी-20 विश्व कप में खेलने का सपना पूरा ना हो सके.

इसे लेकर क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन भी मानते हैं कि अगर केएल राहुल बहुत ही ख़राब विकेटकीपिंग करें या उनकी बल्लेबाज़ी फॉर्म ना रहे तो ही चयनकर्ता किसी और विकेटकीपर के नाम पर ध्यान दें. इसके अलावा ऋषभ पंत, संजू सैमसन या धोनी कुछ ऐसा करिश्मा कर दें कि चयनकर्ता उन्हें टीम में शामिल करने पर मजबूर हो जाएं वर्ना तो उनके लिए मुश्किल है ही.

सौरव गांगुली
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आईसीसी विश्व कप

कप्तान विराट कोहली के अलावा बीसीसीआई के अध्यक्ष पूर्व कप्तान सौरव गांगुली भी केएल राहुल की दोहरी भूमिका और कामयाबी से खुश है.

ख़ुद सौरव गांगुली अपनी कप्तानी में यही रोल कभी राहुल द्रविड़ से भी निभवा चुके है. साल 2003 में दक्षिण अफ्रीका में हुए आईसीसी विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में भारत के कप्तान सौरव गांगुली थे और उन्होंने विकेटकीपिंग की ज़िम्मेदारी राहुल द्रविड़ को दी थी.

विराट कोहली तो यह कहकर उन्हें हरी झंडी दे ही चुके है कि केएल राहुल जब तक फॉर्म में है उनसे विकेटकीपिंग कराते रहेंगे.

रही बात महेंद्र सिंह धोनी को तो उन्हें टीम में वापसी के लिए आईपीएल की परीक्षा से गुजरना होगा. आईपीएल ही उनके बचे-खुचे भविष्य का पैमाना है.

महेंद्र सिंह धोनी
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तकनीक में सुधार

वैसे केएल राहुल को इस बात का मलाल भी है कि कई बार उन्हें टीम से बाहर बैठना पड़ा, लेकिन वह इससे निराश नही हुए और दमदार वापसी की.

दरअसल, उन्होंने घरेलू क्रिकेट में जमकर रन बनाए और चयनकर्ताओं पर दबाव बनाया कि वह उन्हें टीम में जगह दे.

केएल राहुल ने बिना किसी दबाव के अपनी क्षमता को बढ़ाया और अपनी तकनीक में सुधार किया.

उन्होंने अपना पूरा ध्यान अपने खेल पर केंद्रित किया और इसका इनाम भी उन्हें भारतीय टीम में जगह बनाने से मिला.

केएल राहुल आईपीएल को अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से अलग मानते हैं लेकिन साथ ही ये भी मानते हैं कि कामयाबी या नाकामी सहना भी वहीं से आता है. साथ ही हज़ारों दर्शकों के शोर में कैसे दबाव पर काबू पाया जाता है, ये भी सीखने को मिलता है.

केएल राहुल
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श्रीलंका और इंग्लैंड के ख़िलाफ़

केएल राहुल अब सीख गए हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अनुरूप कैसे अपने आपको ढाला जाता है.

केएल राहुल साफ़-साफ़ कहते हैं कि एक बल्लेबाज़ को रन बनाकर और एक गेंदबाज़ को विकेट लेकर ही आत्मविश्वास आता है.

केएल राहुल एकदिवसीय क्रिकेट में तब देखते-देखते ही रातों-रात हीरो बन गए जब उन्होंने साल 2016 में ज़िम्बॉब्वे के ख़िलाफ़ हरारे में खेलते हुए अपने पहले ही मैच में नाबाद 100 रन ठोक दिए.

उसके बाद इंग्लैंड के ख़िलाफ़ घरेलू सिरीज़ में वो नाकाम रहे, और कुछ ऐसा ही उनके साथ श्रीलंका और इंग्लैंड के ख़िलाफ़ उन्हीं की ज़मीन पर हुआ.

लेकिन पिछली पिछली 10 एकदिवसीय पारियों में उन्होंने दो शतक के अलावा तीन अर्धशतक भी जमाए हैं.

इनमें श्रीलंका के ख़िलाफ़ 2019 में इंग्लैंड में हुए विश्व कप में जमाया गया शतक भी शामिल है.

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ऑफ़ स्टंप के बाहर जाती गेंद

केएल राहुल को टेस्ट क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का अभी पूरी तरह परिचय देना है. शुरुआत में ऑफ़ स्टंप के बाहर जाती गेंद से छेड़खानी उन पर भारी रही है.

उनके लिए भारत का ऐतिहासिक ऑस्ट्रेलिया दौरा कुछ ख़ास नही रहा. 2019 में हुए उस दौरे में उन्होंने तीन टेस्ट मैच में बस एक 44 रन की ठीक-ठाक पारी खेली.

उसके अलावा वह चार बार दहाई तक भी नही पहुंचे. यही कारण था कि उन्होंने टीम में भी अपनी जगह खो दी.

उन्होंने अपनी आख़िरी टेस्ट सिरीज़ वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ उसी की ज़मीन पर खेली.

मयंक अग्रवाल के अलावा रोहित शर्मा की एक सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर कामयाबी ने उन्हें टेस्ट टीम से बाहर रहने को मजबूर कर दिया.

इससे पहले रही सही कसर टेलिविज़न के एक कार्यक्रम में महिलाओं पर विवादित टिप्पणी ने पूरी कर दी जिसमें उनके साथ हार्दिक पांड्या भी थे.

केएल राहुल और हार्दिक पांड्या
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बल्लेबाज़ के रूप में कामयाब

केएल राहुल और हार्दिक पांड्या पर कड़ी कारवाई करते हुए बीसीसीआई ने भारी भरकम जुर्माना ठोका. ख़ैर वो बीते कल की बात है.

लेकिन टी-20 में केएल राहुल एक बेहद ज़बरदस्त बल्लेबाज़ के रूप में कामयाब हुए. पिछली 10 पारियों में उन्होंने छह अर्धशतक जमाए हैं.

अगर केएल राहुल न्यूज़ीलैंड में इसी तरह कामयाब हुए और उसके बाद आईपीएल में भी उनका जलवा बरक़रार रहा तो टी-20 विश्व कप में वह कप्तान विराट की ऐसे ही पहली पसंद होंगे जैसे अब हैं.

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