टिकट कलेक्टर से ट्रॉफ़ी कलेक्टर बनने तक का सफ़र

महेंद्र सिंह धोनी
    • Author, नीरज झा
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

महेंद्र सिंह धोनी आज 37 साल के हो गए हैं लेकिन क़रीब अपने 15 साल के अंतर्राष्ट्रीय करियर में उन्होंने जो धूम मचाई है, ऐसा इससे पहले शायद ही किसी और ने किया होगा.

धोनी ने जो क्रिकेट जगत में यश और सम्मान कमाया है वो शायद ही किसी और खिलाड़ी या कप्तान को नसीब हुआ होगा. आज खेल प्रेमियों और ख़ासकर उनके चाहनेवालों के लिए बहुत बड़ा दिन है और पूरे देश में उनके प्रशंशक आज जमकर जश्न मना रहे हैं. सोशल मीडिया पर तो उनके लिए सवेरे से बधाइयों का तांता लगा हुआ है.

यही नहीं गत रात भारत-इंग्लैंड के बीच खेला गया दूसरा टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच उनका 500 वां मैच था. इस मुकाम को छूने वाले सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ के बाद धोनी तीसरे ऐसे भारतीय खिलाड़ी हैं.

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महेंद्र सिंह धोनी

माही का लकी 7 नंबर

इस सात तारीख़ का धोनी की ज़िन्दगी के साथ एक अटूट रिश्ता रहा है और धोनी ने भी खुलकर सात अंक के साथ अपने रिश्ते को पूरी दुनिया के सामने बयां किया है. धोनी कहते हैं कि जब वो पहली बार भारतीय टीम के साथ केन्या गए तो वो अपने लिए जर्सी नंबर ढूंढ रहे थे. उस समय सात नंबर खाली था और वह उन्हें मिल गया.

धोनी का इस अंक के साथ एक रिश्ता जुड़ गया. हालांकि यह भी एक संयोग ही है कि उनका जन्म साल के सातवें महीने के सातवें दिन ही हुआ.

सिर्फ़ उनके जर्सी का नंबर ही नहीं बल्कि सात नंबर आपको उनके हर बाइक और सभी कार पर अंकित दिखेगा.

यही नहीं वो 'सेवेन' नाम के एक परफ्यूम और डीओ के ब्रांड एम्बैस्डर भी हैं. इसके अलावा माही ने 'फिटसेवन' के नाम से देश-विदेश में जिम की एक चेन खोली है.

महेंद्र सिंह धोनी

आईसीसी की तीनों ट्रॉफी पर कब्ज़ा

धोनी पहले ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने आईसीसी के तीन सबसे बड़े इवेंट पर कब्ज़ा जमाया है. 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप को कौन भूल सकता है. पहली बार कप्तानी कर रहे धोनी ने ना सिर्फ अपनी बल्लेबाज़ी से टीम को शिखर तक पहुंचाया बल्कि कप्तानी का ऐसा नमूना पेश किया की जिसका उदाहरण आज भी बड़े-बड़े मैनेजमेंट स्कूल के कोर्स में पढ़ाया जाता है.

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेले गए फ़ाइनल में जिस भरोसे के साथ उन्होंने आख़िरी ओवर जोगिन्दर शर्मा को पकड़ाया था. उसी कप्तान के भरोसे को जोगिन्दर ने जीत में तब्दील कर दिया और रातों-रात स्टार बन गए.

यह तो सिर्फ़ धोनी के कप्तानी का पहला ट्रेलर था, इसके बाद तो उन्होंने कई ऐसे अजूबे किये वो लोगों के लिए भूलना आसान नहीं होगा.

2011 वर्ल्ड कप में मिली जीत की पूरी स्क्रिप्ट एम.एस. धोनी ने मानो जैसे ख़ुद ही लिखी हो. फ़ाइनल का वो मुक़ाबला शायद ही कोई भूल पायेगा, जब कप्तान ने अपने आपको प्रमोट कर बैटिंग ऑर्डर में युवराज सिंह से पहले बल्लेबाज़ी करने मैदान पर उतर गए और टीम को जीत दिलाकर ही पवेलियन वापस लौटे.

धोनी ने अपनी कप्तानी में टीम को 28 साल बाद जीत दिलाई और फ़ाइनल में धोनी का वो छक्का तो शायद ही कोई इस जनम में भूल पायेगा.

इसी छक्के को लेकर सुनील गावस्कर ने कहा था, जब मेरी आख़िरी साँसें चल रही होंगी और कोई एक चीज़ जिसे मैं देखना चाहूंगा वो होगा फाइनल में धोनी का मैच विनिंग छक्का.

यही नहीं आईसीसी की तीसरी ट्रॉफी यानी चैंपियंस ट्रॉफी, जिसे मिनी वर्ल्ड कप भी कहा जाता है. उस पर भी 2013 में उनकी टीम ने जीत हासिल कर एक इतिहास रच दिया. वो आईसीसी की तीनों ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के पहले कप्तान हैं. इस रिकॉर्ड की बराबरी शायद ही कोई कर पायेगा.

टेस्ट क्रिकेट में भी धोनी अपनी कप्तानी में टीम को नंबर एक तक पंहुचा दिया था.

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महेंद्र सिंह धोनी

कप्तान बनने की दिलचस्प कहानी

धोनी को मिली कप्तानी के पीछे भी एक ज़बरदस्त कहानी है. शुरुआत में बीसीसीआई टी-20 को इतना तवज्जो नहीं दे रही थी. यहाँ तक की 2007 में होने वाले पहले टी -20 वर्ल्ड कप में टीम तक भेजने को भी तैयार नहीं थी.

आईसीसी के दबाव के बाद बड़ी मुश्किल से बीसीसीआई टीम भेजने को राज़ी हुई. राहुल द्रविड़, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली जैसे बड़े-बड़े नामों ने इस टी-20 वर्ल्ड कप से किनारा कर लिया था.

कायदे से इंडिया ने अपनी 'बी' टीम साउथ अफ्रीका भेजी थी और कप्तानी थमा दी थी धोनी के हाथों में.

लेकिन धोनी को इस फॉर्मेट की पूरी समझ थी. ना सिर्फ़ अपनी बेहतरीन कप्तानी से टीम को ट्रॉफी दिलाई बल्कि अपने बल्ले से भी 120 गेंद खेलकर 154 रनों का योगदान दिया.

महेंद्र सिंह धोनी

एक बेहतरीन खिलाड़ी और टीम प्लेयर

धोनी हमेशा से ही एक टीम प्लेयर रहे हैं और सिर्फ़ और सिर्फ़ टीम के लिए ही सोचते है. यही वजह रही की वो कप्तान होने के बावजूद ज़्यादातर छह और सात नंबर पर ही बैटिंग करते रहे. इसके बावजूद वनडे में उनकी औसत क़रीब 51 की है, जबकि टी-20 जैसे फॉर्मेट में भी उन्होंने क़रीब 36 की औसत से रन बनाए हैं. टेस्ट में भी उनका तकरीबन 38 का औसत है.

धोनी वनडे क्रिकेट में सबसे ज़्यादा छक्के लगाने वाले भारतीय खिलाड़ी हैं. उन्होंने अब तक कुल 217 छक्के जड़े हैं.

कुछ अलग है बात

धोनी जिन्होंने करियर की शुरुआत टिकट कलेक्टर से शुरू की थी और बाद में भारत के लिए ट्रॉफी कलेक्टर बन गए. स्वभाव से बहुत विनम्र इंसान है. विनम्र इतने की हाल फ़िलहाल में आयरलैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टी-20 मैच में वो प्लेइंग एलेवेन का हिस्सा नहीं थे.

लेकिन इस खिलाड़ी की महानता देखिए. ड्रिंक्स लेकर चले गए बीच मैदान में पानी पिलाने. क्रिकेट की दुनिया में ऐसी घटना आपने कितनी बार देखी होगी.

धोनी जब अपना पद्म-भूषण पुरस्कार लेने पहुंचे तो हर कोई हैरान रह गया क्योंकि धोनी क्रिकेटर की ड्रेस में नहीं बल्कि सेना के अफ़सर की वर्दी पहनकर वहां पहुंचे थे. लेफ्टिनेंट कर्नल धौनी ने भी वर्दी का पूरा सम्मान रखा और बाक़ायदा पूरी ड्रिल करते हुए राष्ट्रपति के पास पहुंचे. पहले उन्हें सेल्यूट किया और फिर सम्मान लिया.

धोनी ने बताया की पद्म भूषण पुरस्कार बड़े सम्मान की बात है और इसे सेना की वर्दी में लेना तो इस ख़ुशी और सम्मान को दस गुना बढ़ा देता है.

महेंद्र सिंह धोनी

धोनी हैं कमाल

धोनी लिमिटेड ओवर्स के उस्ताद है और इसमें वो महारत हासिल कर चुके है. उनकी कप्तानी में भारत ने 151 जीत हासिल की हैं. तकनीकी तौर पर वो कोई बहुत बेहतरीन बल्लेबाज नहीं है, लेकिन टीम को जब भी उनकी ज़रूरत पड़ी, उन्होंने बल्ले का सही इस्तेमाल किया.

उनकी कप्तानी ने मॉडर्न क्रिकेट की पूरी तस्वीर ही बदल दी, जहाँ लोग कप्तानी का जौहर अपनी आक्रामकता से दिखाते थे. कैप्टन कूल माही ने अपनी विनम्रता और शीतलता से टीम को शिखर तक पंहुचा दिया. उनके इसी अंदाज़ की पूरी दुनिया कायल है.

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महेंद्र सिंह धोनी

शायद ही किसी ने धोनी को किसी दूसरे खिलाड़ी पर गरजते या बरसते देखा होगा. दुनिया के दूसरों देशों के खिलाड़ियों से भी शायद ही उनकी कभी लड़ाई हुई होगी.

वो क्रिकेट का जवाब क्रिकेट से देने में यक़ीन रखते हैं और यही उन्हें महान बनाता है. हम चाहते हैं कि क्रिकेट का ये सितारा हमेशा ही चमकता रहे और टीम को जीत दिलाता रहे.

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