विवेचना: इसराइल से दोस्ती बन गई थी अनवर सादात का 'डेथ वॉरंट'

अनवर सादात
    • Author, रेहान फ़ज़ल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

छह अक्तूबर का मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति अनवर सादात के जीवन में हमेशा से बहुत महत्व रहा है.

1973 को इसी दिन उन्होंने इसराइल से कई बार मुंहकी खाने के बाद स्वेज नहर के पार पहली बार अपने सैनिक उतारे थे.

इस क्षणिक जीत ने उनकी सेना को ग़ज़ब का आत्मविश्वास दिया था और वो पहली बार मिस्र की जनता के सामने सिर उठा कर खड़े हो पाए थे.

इस दिन से उनकी कुछ कड़वी यादें भी जुड़ी हुई थीं. इसी दिन 1973 को उन्होंने अपने छोटे भाई को खो दिया था.

वो मिस्र की वायुसेना में पायलट था और इसराइल पर हुए हमले में उसके विमान को मार गिराया गया था.

6 अक्तूबर, 1981 अनवर सादात की ज़िंदगी का आख़िरी दिन भी साबित हुआ.

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फ़ील्डमार्शल की बेंत भूलना था अपशकुन

उस दिन की शुरुआत एक आम दिन की तरह हुई थी. उस दिन सादात सुबह साढ़े आठ बजे सो कर उठे.

उन्होंने थोड़ी कसरत की. मालिश करवाई और नाश्ता करने के बाद नहाने चले गए.

मिस्र के जानेमाने पत्रकार मोहम्मद हीकाल अपनी बहुचर्चित किताब 'ऑटम ऑफ़ फ़्यूरी: द असैसिनेशन ऑफ़ सादात' में लिखते हैं, "कुछ दिन पहले ही लंदन के उनके दर्ज़ी ने उनकी नई सैनिक वर्दी सिल कर भेजी थी."

अनवर सादात
इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति अनवर सादात के साथ हाथ मिलाते इसराइल के तत्कालीन प्रधानमंत्री मेनाचिम बेगिन, तस्वीर 20 नवंबर, 1977 की है

"उनकी पत्नी जिहान ने नोट किया कि उन्होंने अपने कोट के नीचे बुलेटप्रूफ़ जैकेट नहीं पहन रखी थी. सादात ने सफ़ाई दी कि इसको पहनने से उनकी नई यूनिफ़ॉर्म की शक्ल बिगड़ जाएगी."

"उन्हें याद आ गया कि चार साल पहले उन्होंने अपनी यरूशलम यात्रा के दौरान भी बुलेटप्रूफ़ जैकेट पहनी थी जिससे वो काफ़ी मोटे लग रहे थे."

"जब वो परेड पर जाने के लिए बाहर आए तो मेज़ पर रखा अपना फ़ील्डमार्शल की बेंत उठाना भूल गए. बाद में जेहान ने कहा कि ये भूल एक अपशकुन थी."

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अनवर सादात
इमेज कैप्शन, अनवर सादात की हत्या के समय की तस्वीर

बीबीसी पत्रकार भी मौजूद थे परेड के दौरान

उस समय बॉब जॉबिंस काहिरा में बीबीसी के संवाददाता हुआ करते थे.

एक पत्रकार के लिए किसी सैनिक परेड को कवर करना बहुत बोझिल और 'रूटीन' काम होता है, लेकिन इसके बावजूद वो उस परेड में गए क्योंकि वो अपने बेटे और उसके सबसे अच्छे दोस्त को वो परेड दिखाना चाहते थे.

जॉबिंस बताते हैं, "ये परेड कई घंटों तक चली. मिस्र की सेना काफ़ी बड़ी है और वो उस परेड में कई सौ टैंकों, मिसाइलों और युद्ध असलहों का प्रदर्शन कर रहे थे."

"राष्ट्रपति से लेकर सेना के बड़े-बड़े अफ़सर और कई दूतावासों के सैनिक 'अटैशे' कड़ी धूप में बैठे हुए इस परेड को गुज़रते देख रहे थे."

"इस तरह की परेड का आनंद तभी उठाया जा सकता है जब आपके साथ आपके बच्चे भी हों."

"इसलिए मैंने तय किया कि मैं अपने छोटे बेटे जो उस समय दस साल का था और उसके सबसे अच्छे दोस्त को परेड दिखाने ले जाऊंगा."

"पत्रकारिता की दृष्टि से ये कोई बहुत अक्लमंदी वाला फ़ैसला नहीं था, लेकिन मैंने सोचा कि उन्हें परेड देखने में बहुत मज़ा आएगा."

"मुझे क्या पता था कि ये परेड उन्हें हिला कर रख देगी और वो उसे ताउम्र नहीं भूल पाएंगे."

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अनवर सादात
इमेज कैप्शन, अनवर सादात की अंतिम यात्रा

कनपटी पर पिस्टल लगा कर रुकवाया गया था ट्रक

अनवर सादात पर हमला करने वालों के रिंग लीडर थे मिस्र की सेना में लेफ़्टिनेंट ख़ालेद इस्लामबोली.

उस दिन वो सुबह तीन बजे उठ गए थे. उन्होंने गोदाम से चार मशीन गनों को निकाल कर उन्हें लोड किया था और अपने साथी अब्बास मोहम्मद से कहा था कि वो उन मशीन गन्स पर कोई निशान लगा दें.

अब्बास ने उनकी नालों पर कपड़े का एक टुकड़ा लगा कर उन्हें बाकी मशीन गन्स के साथ रख दिया था.

ऑडियो कैप्शन, कैसे हुई थी अनवर सादात की हत्या?

अनवर सादात पर लिखी अपनी किताब में मोहम्मद हीकाल लिखते हैं, "ख़ालेद का ट्रक जैसे ही सलामी मंच के सामने पहुंचा उसने अचानक अपनी पिस्टल निकाल कर ड्राइवर की कनपटी पर लगाते हुए कहा, ट्रक रोको."

"ड्राइवर ने इतनी ज़ोर से ब्रेक लगाया कि ट्रक तिरछा हो गया. ट्रक रुकते ही ख़ालेद नीचे कूदा और उसने अफ़रातफ़री फैलाने के लिए दूर से ही सलामी मंच पर ग्रेनेड फेंका."

"वो तेज़ कदमों से सादात की तरफ़ बढ़ा. सादात समझे कि वो उन्हें सैल्यूट करने आ रहा है. सादात ने उसे जवाबी सैल्यूट किया."

"इस बीच अब्बास मोहम्मद ट्रक के पिछले हिस्से से राष्ट्रपति की तरफ़ गोली चलाने लगा."

"उसकी पहली गोली ही सादात की गर्दन में लगी. ये सब इतना अचानक हुआ कि कम से कम तीस सेकेंड तक राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई."

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अनवर सादात
इमेज कैप्शन, हत्या के अगले दिन मिस्र के अख़बार अल मिदान के पहले पन्ने पर प्रकाशित अनवर सादात के पार्थिव शरीर की तस्वीर

अंगरक्षक सुस्त पाए गए

बॉब जॉविंस भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि सादात के अंगरक्षकों की तरफ़ से जवाबी कार्रवाई में थोड़ी देरी हुई.

जॉविंस कहते हैं, "बहुत से सैनिकों के पास तो कोई हथियार ही नहीं थे और मैं समझता हूँ, उनमें से बहुतों को ये समझ में नहीं आ रहा था कि वहाँ हो क्या रहा है?"

"सुरक्षा की दृष्टि से भी सैनिकों को अपने ऑटोमेटिक हथियारों में 'लाइव मैगज़ींस' रखने की अनुमति नहीं दी गई थी."

अनवर सादात
इमेज कैप्शन, मई, 1979 में अनवर सादात इसराइल के दौरे पर गए थे, ये तस्वीर तभी की है. तस्वीर में उनके साथ इसराइल के तत्कालीन विपक्षी नेता शिमोन पेरेज़

कुर्सियाँ फेंक कर सादात को बचाने की कोशिश

मिस्र की वायुसेना के विमानों की कलाबाज़ी के बाद तोपख़ाने की बारी थी. जब एक ट्रक अचानक परेड के रास्ते से हट कर अलग खड़ा हो गया तो स्टैंड्स पर बैठे दर्शकों ने समझा कि शायद ट्रक ख़राब हो गया है.

मोहम्मद हीकाल लिखते हैं, "पहली बार दर्शकों को तब लगा कि कुछ गड़बड़ है जब उन्होंने हवा में दो ग्रेनेड फेंके जाते देखे."

"इसके बाद तो गोलीबारी शुरू हो गई. सादात के सबसे नज़दीक उनके अंगरक्षक ब्रिगेडियर अहमद सरहान थे."

बाद में उन्होंने जाँच आयोग को बताया, "मैं राष्ट्रपति की तरफ़ चिल्लाते हुए दौड़ा राष्ट्रपति महोदय नीचे झुकिए. लेकिन तब तक देर हो चुकी थी."

"उनका पूरा शरीर ख़ून से लथपथ था. मैंने अपनी रिवॉल्वर निकाली और उस दिशा में पाँच फ़ायर किए जिधर से गोलियाँ आ रही थीं."

"ख़ालेद और अब्दुल सलाम दोनों के पेट में गोलियाँ लगीं, लेकिन उन्होंने इसके बावजूद सलामी मंच पर गोलियाँ चलाना जारी रखा."

पूर्व प्रधानमंत्री और पहले पुलिस में रह चुके ममदू सलेम ने जिस स्थान पर अनवर सादात बैठे थे, इस उम्मीद में कुर्सियाँ फेंकनी शुरू कर दीं कि इससे उन्हें कुछ आड़ मिल जाएगी.

सादात की बगल में बैठे उप राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को एक खरोंच तक नहीं आई, लेकिन सादात के एडीसी जनरल हसन आलम, उनके निजी फ़ोटोग्राफ़र और बिशप सामवील मारे गए.

अनवर सादात
इमेज कैप्शन, एलेक्जेंड्रिया में एक सुबह पत्नी जेहान के साथ राष्ट्रपति अनवर सादात, तस्वीर जुलाई, 1972 की है

सादात की पत्नी भी मौजूद थीं परेड में

इस बीच बॉब जॉविंस ज़मीन पर लेट चुके थे.

जॉविंस बताते हैं, "मैंने अपना सिर नीचे की तरफ़ झुका लिया, लेकिन शायद इसकी ज़रूरत नहीं थी क्योंकि सारी गोलीबारी मुख्य मंच के बीचोंबीच हो रही थी."

"जब मैं अपने को बचाने के लिए नीचे गिरा तो बच्चे पीछे के स्टैंड की तरफ़ दौड़ते हुए चले गए. मेरे ख़याल से गोलियाँ काफ़ी देर तक चलीं."

उधर, सादात की पत्नी जेहान सादात सलामी मंच के ऊपर की खिड़की से ये परेड देख रही थीं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "जब ये शुरू हुआ तो मेरे अंगरक्षकों ने मुझे धक्का दे दिया क्योंकि गोलियाँ खिड़की की तरफ़ से आ रही थीं. मैंने कहा, तुम ये क्या कर रहे हो?"

"उन्होंने कहा ये हमारा कर्तव्य है मैडम. हमारा काम आपकी सुरक्षा करना है. जब गोलियाँ चलनी बंद हुईं तो मैं खिड़की की तरफ़ भागी, ये देखने के लिए कि वहाँ हो क्या रहा है."

"लेकिन मैं उन्हें देख नहीं पाई. वहाँ से सीधे मैं अस्पताल गई. डाक्टरों का प्रमुख वहाँ मौजूद था. मैंने उनसे कहा कि मुझे मेरे पति के पास ले चलिए."

"उन्होंने कहा, मैं आपको वहाँ नहीं ले जा सकता. जब उन्होंने ये कहा तो मैं समझ गई कि हुआ क्या है."

अनवर सादात
इमेज कैप्शन, हत्या के दिन परेड की सलामी लेते होस्नी मुबारक और अनवर सादात (दाहिने)

हुस्ने मुबारक ने किया सादात की मौत का एलान

जब जॉविंस परेड स्थल से अपनी कार से बीबीसी दफ़्तर की तरफ़ भागे तो उन्हें पता नहीं था कि अनवर सादात जीवित हैं या नहीं.

लेकिन थोड़ी देर बार मिस्र के तत्कालीन उप राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने टीवी और रेडियो पर एलान किया, "मिस्र, अरब देशों और पूरी दुनिया को ये बताते हुए मेरी ज़ुबान कांप रही है कि हमारे हीरो और योद्धा अनवर- अल- सादात हमारे बीच अब नहीं हैं."

अनवर सादात
इमेज कैप्शन, कैंप डेविड में अनवर सादात, अमरीकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर और इसराइल के प्रधानमंत्री मेनाचिम बेगिन के साथ, तस्वीर सितंबर, 1978 की है

सादात को निशाना बनाने की वजह

आख़िर क्या वजह थी कि एक ज़माने में अरब जगत के हीरो रहे अनवर सादात को 'इजिप्शियन इस्लामिक जेहाद' ने अपने हमले का निशाना बनाया?

प्रोफ़ेसर आफ़ताब कमाल पाशा जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं और जिन्होंने अनवर सादात पर ख़ासा शोध किया है, बताते हैं, "मैं मिस्र में पाँच साल रहा हूँ अपनी पीएचडी के सिलसिले में और एक राजनयिक के तौर पर भी."

"मैं उस जगह पर पचासियों बार गया हूँ, जहाँ सादात की हत्या की गई थी. मैं जब भी वहाँ से गुज़रता था वो पूरा मंज़र मेरी आँखों के सामने आ जाता था."

"मिस्र में 80 फ़ीसदी लोग मुसलमान हैं. करीब 20 फ़ीसदी लोग कॉप्टिक ईसाई हैं. वहाँ 1926 से 'अख़वानुल मुस्लिमीन' यानी 'मुस्लिम ब्रदरहुड' का एक समूह सक्रिय है."

"बहुदलीय व्यवस्था के दिनों में भी ये समूह ख़ासा शक्तिशाली था. यह फ़लस्तीन की जंग के दौरान और नासिर के शासनकाल में बहुत लोकप्रिय हो गया था."

ऑडियो कैप्शन, 73 साल पहले हिरोशिमा और नागासाकी के ऊपर जब 'सूरज फटा' था

"उन्होंने इसके प्रति बहुत कड़ा रुख अपनाया क्योंकि उनके ऊपर एलेक्ज़ेंड्रिया में एक हमला हुआ था जिसके पीछे 'अख़वानुल मुस्लिमीन' का हाथ बताया जाता था."

"साल 1955 से 1970 में जब तक नासिर सत्ता में थे 'अख़वानुल मुस्लिमीन' के लोगों को या तो जेल में डाल दिया गया था या मार दिया गया था."

"जब सादात सत्ता में आए तो उन्होंने इस संगठन के कई लोगों को रिहा कर दिया. वामपंथियों को बैलेंस करने के लिए वो उनका समर्थन भी लेने गए."

"इस्लामिक जेहाद उसी संगठन से निकला हुआ एक ग्रुप है जिसकी नीतियाँ इसराल और अमरीका के ख़िलाफ़ जगज़ाहिर हैं."

"सादात का इन देशों से नज़दीकी बढ़ाना उन्हें पसंद नहीं आया और उन्होंने 6 अक्तूबर, 1981 को उनकी हत्या करके बता दिया कि वो उनको किस हद तक नापसंद करते थे."

अनवर सादात
इमेज कैप्शन, कैंप डेविड समझौते के दौरान इसराइली प्रधानमंत्री मेनाचिम बेगिन के साथ राष्ट्रपति सादात

अपने ही 'डेथ वॉरंट' पर हस्ताक्षर

अनवर सादात की पत्नी जेहान सादात का मानना है कि इसराइल के साथ शांति समझौता कर सादात ने खुद अपने 'डेथ वॉरंट' पर हस्ताक्षर किए थे.

जेहान कहती हैं, "जब से मेरे पति इसराइल गए थे, हर बार, हर दिन, हर मिनट जब भी वो किसी वजह से या किसी बैठक में भाग लेने बाहर जाते थे, मुझे यही अंदेशा रहता था कि सुरक्षित वापस नहीं आ पाएंगे और उन्हें मार दिया जाएगा."

"उन्हें कई धमकियाँ भी मिली थीं कि उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा. उनको इसका पता था. मुझे इसका पता था. लेकिन मैं इस बारे में उनसे बात नहीं करती थी क्योंकि मैं उनका मनोबल गिराना नहीं चाहती थीं."

पाँच लोगों को सादात की हत्या की साज़िश रचने और उन पर गोली चलाने के लिए मौत की सज़ा दी गई."

"गिरफ़्तार किए गए लोगों को बुरी तरह से पीटा गया. विडंबना ये है कि ख़ालेद से उसी अस्पताल में पूछताछ शुरू हुई जहाँ सादात का शव रखा हुआ था."

"शुरू में जाँचकर्ताओं ने ख़ालेद को ये कह कर तोड़ने की कोशिश की कि सादात अभी भी जीवित हैं. वो सिर्फ़ घायल भर हुए हैं. लेकिन ख़ालिद उनके झांसे में नहीं आया."

उसने कहा, "आप मुझे बेफकूफ़ नहीं बना सकते. मैंने उसके शरीर में 34 गोलियाँ मारी हैं."

जेहान सादात इस समय 85 साल की हैं और उनकी गिनती मिस्र के बड़े मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में होती है.

बॉब जाविंस बीबीसी की नौकरी छोड़ चुके हैं और उनके बेटे जो उनके साथ उस परेड को देखने गए थे जहाँ सादात की हत्या हुई थी, इस समय मिस्र में रह कर नौकरी कर रहे हैं.

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