पाकिस्तान: नूर मुक़द्दम के हत्यारे की मौत की सज़ा बरक़रार
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित नूर मुक़द्दम हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त ज़हीर जाफर की मौत की सज़ा के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका (रिव्यू अपील) खारिज कर दी है. अदालत ने मृत्युदंड को बरकरार रखा है.
अदालत ने कहा कि मामले में मौजूद स्पष्ट और ठोस सबूतों को देखते हुए सज़ा पर पुनर्विचार की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती.
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अब ज़हीर जाफर के पास केवल दया याचिका (मर्सी पिटिशन) दायर करने का विकल्प बचा है.
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ ज़हीर जाफर की अपील खारिज कर दी थी. जस्टिस हाशिम काकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था.
अपील खारिज होने के बाद ज़हीर जाफर ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया है.
इससे पहले, इस्लामाबाद हाई कोर्ट भी मौत की सज़ा के खिलाफ ज़हीर जाफर की याचिका खारिज कर चुका है.
नूर मुक़द्दम की जुलाई 2021 में हत्या कर दी गई थी. उसी दिन पुलिस ने ज़ाहिर जाफर को गिरफ्तार कर लिया था. फरवरी 2022 में उसे मौत की सज़ा सुनाई गई थी. नूर की हत्या से पूरे पाकिस्तान में ग़ुस्से की लहर पैदा हो गई थी. सोशल मीडिया पर अभियुक्त के ख़िलाफ़ एक कैंपेन शुरू कर दी गई थी और लोगों ने उसके लिए मौत की सज़ा की मांग की थी.
नूर को हत्या से पहले अभियुक्त ने टॉर्चर किया था.
नूर मुक़द्दम हत्याकांड में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने ज़हीर जाफर को बलात्कार और हत्या, दोनों मामलों में मृत्युदंड दिया था. हालांकि, बाद में अपील की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने बलात्कार के मामले में दी गई मौत की सज़ा को घटाकर आजीवन कारावास में बदल दिया था.
वहीं, हत्या के मामले में ज़हीर जाफर को दी गई मौत की सज़ा सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी थी.