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लाइव, पाकिस्तान: नूर मुक़द्दम के हत्यारे की मौत की सज़ा बरक़रार

अदालत ने कहा कि मामले में मौजूद स्पष्ट और ठोस सबूतों को देखते हुए सज़ा पर पुनर्विचार की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती.

सारांश

लाइव कवरेज

अरशद मिसाल, चंदन कुमार जजवाड़े

  1. पाकिस्तान: नूर मुक़द्दम के हत्यारे की मौत की सज़ा बरक़रार

    पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित नूर मुक़द्दम हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त ज़हीर जाफर की मौत की सज़ा के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका (रिव्यू अपील) खारिज कर दी है. अदालत ने मृत्युदंड को बरकरार रखा है.

    अदालत ने कहा कि मामले में मौजूद स्पष्ट और ठोस सबूतों को देखते हुए सज़ा पर पुनर्विचार की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती.

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अब ज़हीर जाफर के पास केवल दया याचिका (मर्सी पिटिशन) दायर करने का विकल्प बचा है.

    इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ ज़हीर जाफर की अपील खारिज कर दी थी. जस्टिस हाशिम काकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था.

    अपील खारिज होने के बाद ज़हीर जाफर ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया है.

    इससे पहले, इस्लामाबाद हाई कोर्ट भी मौत की सज़ा के खिलाफ ज़हीर जाफर की याचिका खारिज कर चुका है.

    नूर मुक़द्दम की जुलाई 2021 में हत्या कर दी गई थी. उसी दिन पुलिस ने ज़ाहिर जाफर को गिरफ्तार कर लिया था. फरवरी 2022 में उसे मौत की सज़ा सुनाई गई थी. नूर की हत्या से पूरे पाकिस्तान में ग़ुस्से की लहर पैदा हो गई थी. सोशल मीडिया पर अभियुक्त के ख़िलाफ़ एक कैंपेन शुरू कर दी गई थी और लोगों ने उसके लिए मौत की सज़ा की मांग की थी.

    नूर को हत्या से पहले अभियुक्त ने टॉर्चर किया था.

    नूर मुक़द्दम हत्याकांड में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने ज़हीर जाफर को बलात्कार और हत्या, दोनों मामलों में मृत्युदंड दिया था. हालांकि, बाद में अपील की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने बलात्कार के मामले में दी गई मौत की सज़ा को घटाकर आजीवन कारावास में बदल दिया था.

    वहीं, हत्या के मामले में ज़हीर जाफर को दी गई मौत की सज़ा सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी थी.

  2. वेनेज़ुएला की कार्यकारी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की, इन मुद्दों पर हुई चर्चा

    वेनेज़ुएला की कार्यकारी राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज बुधवार को 5 दिनों के दौरे पर भारत पहुंची थीं. आज यानी गुरुवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैदराबाद हाउस में मुलाक़ात की.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वेनेज़ुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के साथ व्यापक बातचीत की.

    उन्होंने कहा, "दोनों नेताओं ने भारत-वेनेज़ुएला संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और ऊर्जा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा तथा ऑटोमोबाइल सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की नई संभावनाओं पर चर्चा की."

    रणधीर जयसवाल ने आगे लिखा, "नेताओं ने आपसी रुचि के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने के अपने संकल्प को भी दोहराया."

  3. कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता बोले, 'हम किसी भी हिंसा का समर्थन नहीं करते'

    कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि 6 जून को होने वाला प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा.

    उन्होंने कहा, "हमने और अभिजीत दीपके ने शुरुआत से यह बात बार-बार कही है कि किसी भी प्रकार का प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा. कॉकरोच जनता पार्टी और यह आंदोलन किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता है."

    उन्होंने आगे कहा, "हम देख रहे हैं कि कल से सोशल मीडिया पर कई अकाउंट्स से अफ़वाहें फैलाई जा रही हैं कि दिल्ली में यह होगा, वह होगा. हम साफ़ कर देना चाहते हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगी."

    उन्होंने दिल्ली पुलिस से निवेदन किया है कि वे ऐसे वीडियो देखें तो फ़ौरन कार्रवाई करें.

    दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि वे 6 जून को भारत लौटेंगे. उन्होंने कहा कि वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे.

  4. ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई बोले, 'दुश्मन हार चुका है'

    इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के संस्थापक रुहोल्लाह ख़ुमैनी की पुण्यतिथि पर पिछले छह सालों से ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई भाषण देते थे. लेकिन इस साल ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई का एक लिखित संदेश पढ़कर सुनाया गया.

    ये संदेश तेहरान के अस्थायी इमाम-ए-जुमा मोहम्मद जवाद हाज-अली-अकबरी ने पढ़ा.

    बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक, संदेश में कहा गया,"हमारे सशस्त्र बलों के बहादुर जवानों के सामने दुश्मन को हार का सामना करना पड़ा है. ख़ास तौर पर सैन्य लड़ाई और मैदानों और सड़कों पर मिली कड़ी जवाबी कार्रवाई के कारण दुश्मन को गहरी और अपमानजनक हार झेलनी पड़ी है."

    संदेश में आगे कहा गया, "दुश्मन अपनी संयुक्त रणनीति को दो बातों पर केंद्रित कर रहा है. पहली, जनता के धैर्य और सहनशक्ति को कमज़ोर करना, और दूसरी देश के अधिकारियों की सोच और निर्णय लेने की प्रक्रिया में गलतियां पैदा करना."

    मोजतबा ख़ामेनेई के हवाले से कहा गया कि दुश्मन का सबसे बड़ा हथियार लोगों के बीच शक, अविश्वास और मतभेद पैदा करना है.

    उन्होंने दुश्मन की योजनाओं को नाकाम करने के लिए लोगों से एकजुट रहने, आपसी भरोसा बनाए रखने और मजबूती से एकजुट रहने की अपील की है.

    जारी संदेश में यह भी कहा गया,"इन बातों को मजबूत करने में सरकारी अधिकारियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. ऐसा कोई भी काम, जिससे लोगों में निराशा, अविश्वास या हताशा पैदा हो, देश और उसके लोगों के दुश्मनों की मदद करने जैसा माना जाएगा."

    रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद से ईरान के सर्वोच्च नेता सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं. उनकी ओर से केवल लिखित संदेश जारी किए गए हैं, जिन्हें दूसरे लोग सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाते रहे हैं.

  5. राष्ट्रपति ट्रंप बोले, 'ईरान के साथ हफ़्ते के आख़िर तक डील हो सकती है'

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह के आख़िर तक ईरान के साथ समझौता होने की संभावना व्यक्त की है.

    बीबीसी उर्दू के मुताबिक, वह व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे, तभी उनसे पूछा गया कि क्या कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद भी युद्धविराम लागू है?

    इसके जवाब में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "हर चीज किसी न किसी वजह से होती है."

    ट्रंप ने कहा कि कुवैत में ईरानी हमले से एक रात पहले अमेरिकी सेना ने ईरान पर "बहुत जोरदार प्रहार" किया था.

    गौरतलब है कि कल ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की एक नई लहर देखी गई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले किए और उन्हें "आत्मरक्षा" की कार्रवाई बताया.

    ईरान ने कहा कि उसने मिसाइलों और ड्रोन से क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है.

    व्हाइट हाउस में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "हम ईरानियों पर बहुत सख्ती से हमला कर रहे हैं, इसलिए कुछ चीजें किसी वजह से होती हैं."

    हालांकि, ट्रंप के मुताबिक अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बेहतरीन सेना है, जिसकी मदद से ईरान की कार्रवाइयों को नियंत्रित किया गया था, इसलिए ये हालिया हमले कोई बड़ी बात नहीं हैं.

  6. एफ़डब्लूआईसीई ने बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के बहिष्कार की अपील वापस ली, निकिता यादव

    भारतीय फ़िल्म से जुड़ी एक बड़ी यूनियन ने अपनी वह अपील वापस ले ली है, जिसमें उसने अपने सदस्यों से बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह के साथ काम न करने को कहा था.

    यह अपील रणवीर सिंह के एक आने वाली फ़िल्म से कथित तौर पर अचानक बाहर हो जाने के बाद की गई थी.

    फ़ेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज़ (एफ़डब्लूआईसीई) ने पिछले महीने यह अनौपचारिक बैन तब लगाया था, जब 'डॉन 3' के प्रोड्यूसर्स ने शिकायत की थी कि रणवीर सिंह ने फ़िल्म की शूटिंग शुरू होने से महज़ कुछ हफ़्ते पहले ही फ़िल्म छोड़ दी.

    बॉयकॉट वापस लेने का यह फ़ैसला तब आया, जब ख़बरों के मुताबिक़ रणवीर सिंह ने फ़ेडरेशन को एक लीगल नोटिस भेजा. हालाँकि बीबीसी ने यह नोटिस नहीं देखा है.

    साल 2023 में अनाउंस हुई फ़रहान अख़्तर की 'डॉन 3' को बॉलीवुड की सबसे कामयाब और लंबे समय तक चलने वाली एक्शन फ़्रैंचाइज़ी में से एक का अगला चैप्टर बताया गया था.

    साल 1978 में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के लीड रोल वाली फ़िल्म डॉन रिलीज़ हुई थी और बाद में फ़रहान अख़्तर ने शाहरुख़ ख़ान को लीड रोल में लेकर साल 2006 में इसका रीमेक बनाया था.

    फिर शाहरुख़ ख़ान को ही लेकर फ़रहान ने डॉन-2 भी बनाई थी.

    इस फ़्रैंचाइज़ी को इसके अगले चैप्टर में आगे बढ़ाने के लिए रणवीर सिंह को चुना गया था.

  7. अब तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक इस लाइव ब्लॉग के ज़रिये ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल रात दस बजे तक आप तक ताज़ा ख़बरें पहुंचाएंगे.

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर मौजूद कुछ अहम ख़बरों को आप उनके साथ दिए गए लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते हैं.

  8. भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव मंजूर, अब होगा 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय', शुरैह नियाज़ी, भोपाल से, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए

    मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का फैसला लिया गया है. इसके मुताबिक़, अब विश्वविद्यालय का नया नाम 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' होगा.

    यह फैसला विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में बुधवार को लिया गया.

    राजा भोज की ऐतिहासिक विरासत के साथ ही साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम पर करने का प्रस्ताव रखा गया.

    बैठक में मौजूद कार्य परिषद सदस्य और विश्वविद्यालय की अरबी-पर्शियन विभाग की प्रमुख डॉक्टर ताहिरा अब्बासी ने प्रस्ताव काविरोध किया. उन्होंने कहा कि बरकतउल्ला भोपाली ख़ुद एक स्वतंत्रता सेनानी थे, इसलिए इस विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदला जाना चाहिए.

    इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नाम बदलने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. हालांकि अंतिम रूप से नाम में बदलाव लागू होने के लिए राज्य सरकार और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं की औपचारिकताएं पूरी की जानी बाक़ी हैं.

    यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉक्टर एबी सिंह ने पत्रकारों को बताया कि नाम बदलने के संबंध में दो फैसला लिया गया है उसका प्रस्ताव जल्द ही शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1970 में भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी. बाद में साल 1988 में इसका नाम स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी चिंतक मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान में बदलकर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय रखा गया था.

    मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली (1854–1927) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे और भारत की पहली निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री थे.

    उनका जन्म भोपाल में हुआ था. वे विदेशों में रहकर भारत की आज़ादी के लिए सक्रिय अभियान चलाते रहे.

    वे गदर आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं में शामिल थे. उन्होंने जापान, अमेरिका, जर्मनी और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों में रहकर ब्रिटिश साम्राज्य के ख़िलाफ़ जनमत तैयार किया. उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अंतरराष्ट्रीय चेहरों में गिना जाता है.

  9. पीएम मोदी के ख़िलाफ़ टिप्पणी के लिए बीजेपी ने राहुल गांधी पर लगाया दुष्प्रचार का आरोप

    बीजेपी ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस दावे पर पलटवार किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक साल के बाद पद पर नहीं रहेंगे.

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ बीजेपी ने राहुल गांधी पर दुष्प्रचार का आरोप लगाया.

    केंद्र में सत्ता पर बैठी बीजेपी ने यह भी कहा कि देश में एकमात्र आपातकाल पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने लगाया था.

    लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने बुधवार को दावा किया कि मोदी एक साल के बाद प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे क्योंकि ''जो व्यवस्था कभी उनके नियंत्रण में थी वह अब हिल गई है और अंदर ही अंदर ध्वस्त हो रही है.''

    बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने पीटीआई से बातचीत में कहा, "राहुल गांधी ये जान चुके हैं कि वो लोकतांत्रिक रूप से देश की जनता का भरोसा नहीं जीत सकते, तो वो अब लोकतंत्र, भारत की स्थिरता और सुरक्षा का ही विरोध करने लग गए हैं "

  10. जाने-माने फ़िल्म निर्माता पहलाज निहलानी का निधन, रवि जैन, मुंबई से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए

    जाने-माने फ़िल्म निर्माता पहलाज निहलानी का गुरुवार सुबह मुम्बई में निधन हो गया है.

    पहलाज निहलानी के परिवार के एक सदस्य ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में उनकी मौत की पुष्टि की. वो पिछले कुछ महीनों से काफ़ी बीमार चल रहे थे.

    फिल्म निर्माता होने के अलावा वो सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके थे और सेंसर चीफ़ के तौर पर उनका कार्यकाल बोर्ड के इतिहास में सबसे विवादास्पद साबित हुआ.

    तमाम विवादों के बाद उन्हें 9 साल पहले 2017 में सेंसर चीफ़ के पद से हटाकर प्रसून जोशी को अध्यक्ष बनाया गया था.

    पहलाज निहलानी ने 'आग ही आग', 'इल्ज़ाम', 'शोला और शबनम', 'आंखें' जैसी सुपरहिट फ़िल्में बनाकर एक निर्माता के तौर पर पहचान बनाई थी.

    गोविंदा, चंकी पांडे, नीलम जैसे मशहूर कलाकारों, के करियर को अहम मकाम दिलाने में पहलाज निहलानी का ही हाथ माना जाता है.

    उनका अंतिम संस्कार आज यानी गुरुवार दोपहर 3 बजे सांताक्रूज़ हिंदू श्मशान घाट पर किया जाएगा.

  11. नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे के ताज़ा आंकड़ों पर कांग्रेस ने बीजेपी को घेरा

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नेशलन फ़ैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है.

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मोदी सरकार न सिर्फ़ स्वास्थ्य और पोषण के मामले में भारत की महिलाओं और बच्चों के साथ धोखेबाज़ी की है, बल्कि वह जानबूझकर ऐसे अहम आंकड़े को भी छिपाती है, जो उसकी नाकामियों को उजागर करता है.''

    उन्होंने आगे लिखा, ''नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे-6 (एनएफ़एचएस-6) के आंकड़ों ने बीजेपी की नाकाबिलियत को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है. हर 5 में से 1 बच्चा गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार है. भारत के एक-तिहाई बच्चों का वज़न कम है. 6 से 23 महीने की उम्र के 84% से ज़्यादा बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता.''

    खड़गे ने लिखा है कि 15 से 49 साल की उम्र की 57% महिलाएँ एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं और हर 5 में से 1 महिला कुपोषित है.

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर आंकड़ों को चुनकर छिपाने, कमज़ोर तबके को उनके हाल पर छोड़ देने का आरोप लगाया.

    गौरतलब है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने साल 2023-24 के नेशलन फ़ैमिली हेल्थ सर्वे-6 के आंकड़े जारी किए हैं.

  12. भारत में इसराइल के राजदूत ने ईरान पर हमले के बारे में क्या कहा

    भारत में इसराइल के राजदूत रूवेन अज़ार ने आरोप लगाया है कि ईरान बहुत ही बुरे इरादे के साथ बड़े पैमाने पर तबाही मचाने वाले हथियार बनाने की होड़ में लगा हुआ था.

    उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, “हम कई सालों से कूटनीति, राजनीतिक और आर्थिक दबाव के ज़रिए ईरानी शासन को अपना रवैया बदलने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इससे कोई फ़ायदा नहीं हुआ, अब हम उन्हें सैन्य तरीकों से मनाने की कोशिश कर रहे हैं.”

    उन्होंने कहा, ”हमने शुरू में ही कह दिया था कि हमारा ईरान पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है... उन्होंने असल में बिना किसी वजह के अपने पड़ोसियों पर हमला किया है. मुझे लगता है कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे.”

    उन्होंने इस बातचीत में दावा किया कि ईरानी शासन इस सारी बयानबाज़ी के बावजूद कि वह युद्ध में विजयी हुआ है, वह असल में एक बहुत ही कमज़ोर स्थिति में है.

    रूवेन अज़ार ने पहलगाम हमले की तुलना सात अक्तूबर 2023 को इसराइल पर हुए हमले से की.

  13. बद्रीनाथ-केदारनाथ यात्रा: बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से की ये अपील

    बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ सोहन सिंह ने दोनों तीर्थस्थलों की यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं से अपील की है.

    समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, ''अब धीरे-धीरे बरसात का मौसम भी आने वाला है. यहाँ भीड़ बहुत ज़्यादा है और जोशीमठ को वन-वे भी किया गया है. जो लोग यहाँ आ रहे हैं वे अपना रजिस्ट्रेशन ज़रूर कराएं. इससे हमारे पास एक आंकड़ा रहता है.''

    उन्होंने कहा है कि जो लोग बद्रीनाथ-केदारनाथ यात्रा पर आ रहे हैं वो अपने ठहरने की व्यवस्था पहले से कर के आएं, ताकि बाद में होने वाली तकलीफ़ से बचा जा सके.

    उन्होंने कहा, ''यात्रियों को थोड़ा कष्ट ज़रूर होगा क्योंकि भीड़ ज़्यादा है और कतारें लंबी लग रही हैं. दर्शन करने में थोड़ा वक़्त ज़रूर लग सकता है इसलिए धैर्य बनाकर रखें.''

    बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. दोनों ही तीर्थस्थलों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ अब तक दस लाख से श्रद्धालुओं ने केदारनाथ धाम की यात्रा की है, जबकि सवा आठ लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए हैं.

  14. फ़िल्म अभिनेता प्रकाश राज ने कॉकरोच जनता पार्टी को दिया समर्थन, जानिए क्या कहा

    फ़िल्म अभिनेता प्रकाश राज ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' को समर्थन देने की घोषणा की है और कहा है कि वो इसके लिए 6 जून को दिल्ली आने की कोशिश करेंगे.

    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वो 6 जून को भारत लौटेंगे और दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करके शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग करेंगे.

    अभिजीत दीपके फ़िलहाल अमेरिका में हैं. उन्होंने वहां पर बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया है.

    अभिजीत दीपके नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.

    प्रकाश राज ने लद्दाख़ के पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक की एक एक्स पोस्ट को शेयर भी किया है.

    प्रकाश राज ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "मैं 6 तारीख को वहाँ पहुँचने की कोशिश कर रहा हूँ, ताकि सबसे प्रासंगिक 'कॉकरोच आंदोलन' के प्रति अपनी एकजुटता दिखा सकूँ."

    "मैं अभी एक फ़िल्म की शूटिंग के सिलसिले में काफ़ी दूर हूँ (यह मेरी पहले से तय ज़िम्मेदारी है), फिर भी मैं वहाँ पहुँचने की पूरी कोशिश कर रहा हूँ. सभी युवा 'कॉकरोचों' से मेरा आग्रह है कि वे रेंगते हुए वहाँ पहुँचें."

    इससे पहले सोनम वांगचुक ने एक्स पर लिखा है, "अगर हम नहीं, तो कौन? अगर अभी नहीं, तो कब? अगर 5 जून तक हालात नहीं बदलते, तो मैं 6 जून को दिल्ली में सीजेपी सदस्यों के साथ शामिल हो जाऊँगा."

    उन्होंने लिखा है, "अगर हालात इतने बिगड़ जाएँ, तो किसी भी स्वाभिमानी मंत्री को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए... लाखों युवाओं की ज़िंदगी पर पड़ने वाले असर की तो बात ही छोड़िए, बल्कि इससे तो भारत का भविष्य ही दाँव पर लग जाता है."

  15. बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर के प्राइवेट हॉस्पिटल में आग लगने से कई लोगों की मौत

    बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में एक प्राइवेट हॉस्पिटल के आईसीयू में आग लगने से कई लोगों की मौत हो गई है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ ज़िले के प्रसाद हॉस्पिटल में यह घटना हुई है.

    स्थानीय ज़िलाधिकारी ने बताया है कि हॉस्पिटल के आईसीयू में आग लगने से कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है.

    बाद में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस हादसे में चार लोगों की मौत की पुष्टि की और मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की.

    इस घटना में और भी लोगों के प्रभावित होने की आशंका है और कई ख़बरों में मारे गए लोगों की संख्या क़रीब दस बताई जा रही है, जबकि कई लोग घायल भी हैं. मृतकों और घायलों में से ज़्यादातर हॉस्पिटल में भर्ती मरीज़ बताए जा रहे हैं.

    यह घटना गुरुवार तड़के क़रीब 3 बजे की है. आईसीयू में आग लगने के बाद कई मरीज़ों को अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

    ज़िलाधिकारी के मुताबिक़ पहली नज़र में यह घटना शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई दिखती है. हालाँकि इस मामले में पूरी जानकारी जांच की बाद ही मिल पाएगी.

    कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें दिख रहा है कि हॉस्पिटल से मरीज़ों को बाहर निकाला जा रहा है.

  16. इसराइल और लेबनान के बीच इस शर्त के साथ हुआ युद्धविराम समझौता, डेविड ग्रिटन और हेलेन सुलीवन

    अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा है कि इसराइल और लेबनान ने सीज़फ़ायर लागू करने पर सहमति जताई है, हालाँकि इसके लिए एक शर्त यह है कि हिज़्बुल्लाह को अपने हमले पूरी तरह रोकने होंगे.

    यह सहमति तब बनी जब बुधवार को दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमलों में कम से कम नौ लोग मारे गए और हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल पर रॉकेट हमले किए.

    अमेरिकी विदेश विभाग ने बयान में कहा, "सभी देशों ने इस बात की पुष्टि की है कि इसराइल और लेबनान के बीच संबंधों का भविष्य दोनों संप्रभु सरकारों को ही तय करना चाहिए. उन्होंने किसी भी देश या नॉन स्टेट एक्टर की ओर से लेबनान के भविष्य को बंधक बनाने के किसी भी प्रयास को ख़ारिज किया."

    यह समझौता इस शर्त पर भी आधारित है कि दक्षिणी लेबनान में इसराइल के नियंत्रण वाले उस क्षेत्र से "हिज़्बुल्लाह के सभी लड़ाकों को हटा दिया जाए". यह इलाक़ा लिटानी नदी से लेकर सीमा तक फैला हुआ है और जिसे समझौते में 'साउथ लिटानी सेक्टर' कहा गया है.

    मार्च के अंत में, इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा था कि आईडीएफ़ दक्षिणी लेबनान के एक बड़े इलाक़े में एक सुरक्षा क्षेत्र स्थापित करेगा, और जब तक उत्तरी इसराइल सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक विस्थापित हुए हज़ारों निवासियों को वहां वापस लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

    यह सीज़फ़ायर समझौता सोमवार को हुई एक आंशिक सीज़फ़ायर सहमति के बाद आया है. लेबनान ने कहा था कि इस सहमति के तहत इसराइल बेरूत पर बमबारी नहीं करेगा, जिसके बदले में हिज़्बुल्लाह इसराइल पर हमला नहीं करेगा.

    दोनों देश 22 जून को फिर मिलेंगे ताकि "एक व्यापक समझौते तक पहुंचने के मक़सद से" आगे की बातचीत की जा सके. हिज़्बुल्लाह ने अभी तक इस घोषणा पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है.

  17. ईरान युद्ध पर राष्ट्रपति ट्रंप को अमेरिकी संसद ने दिया बड़ा झटका, क्वासी ग्यांफ़ी असीडू, वॉशिंगटन

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान में सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाने से रोकने के लिए अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स ने एक प्रस्ताव पास किया है.

    यह प्रस्ताव 208 के मुक़ाबले 215 वोटों से पास हुआ. ऐसा तब संभव हुआ जब चार रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेटिक पार्टी का साथ दिया.

    अमेरिकी संसद में युद्ध को लेकर असहमति का ऐसा सार्वजनिक प्रदर्शन कभी-कभार ही देखने को मिलता है.

    ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका ने इसी साल फ़रवरी में युद्ध शुरू किया था. यह चौथी बार है जब हाउस ने ट्रंप की युद्ध संबंधी शक्तियों पर लगाम लगाने की कोशिश की है.

    आलोचकों का कहना है कि ट्रंप ने इन शक्तियों के लिए संसद की मंज़ूरी नहीं ली थी.

    हाउस के इस प्रस्ताव को अभी भी रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली अमेरिकी सीनेट की मंज़ूरी मिलना बाकी है.

    भले ही यह प्रस्ताव सीनेट में पास हो जाए, लेकिन इस बात की संभावना कम ही है कि यह ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह से रोक पाएगा.

    ट्रंप इस प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो इसे रद्द करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत होगी.

    सीनेट ने मई में भी इसी तरह का एक प्रस्ताव आगे बढ़ाया था. सात पिछली नाकाम कोशिशों के बाद यह प्रस्ताव आगे बढ़ा था, लेकिन अभी तक इस पर पूरे सदन में वोटिंग नहीं हुई है.