दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म 'सतलुज' को ओटीटी से हटाने पर क्या बोले पंजाब के मंत्री

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दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म सतलुज को ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ज़ी 5 से हटाने पर पंजाब के मंत्री ने प्रतिक्रिया दी है.
पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस मामले में समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''1992 से 1997 के बीच पंजाब में कांग्रेस सरकार के दौरान राज्य के युवाओं पर बहुत अत्याचार हुए थे. उन घटनाओं को दिखाने वाली फ़िल्म पर प्रतिबंध लगाना बिल्कुल ग़लत है. ऐसा लगता है अकाली दल, बीजेपी और कांग्रेस आपस में मिल चुके हैं क्यों कि ये फ़िल्म इन तीनों पार्टियों के कच्चे चिट्ठे को उजागर करती है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे पंजाब के नौजवानों पर हमला होता था. उन्हें मारा जाता था.''
उन्होंने कहा, ''दिलजीत दोसांझ ने अच्छी फ़िल्म बनाई है. ये पंजाब के इतिहास पर है. इस फ़िल्म को बैन करना बिल्कुल गलत है. इसे तुरंत रिलीज किया जाना चाहिए.''
दिलजीत दोसांझ ने इससे पहले फ़िल्म को हटाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में कहा था, "मुझे पहले से ही लग रहा था कि ऐसा होगा. जिसकी (जसवंत सिंह खालड़ा) आवाज़ को 1995 में भी दबाया गया और आज 2026 है. कमाल की बात है. हद हो गई है. हम 2026 में जी रहे हैं और कहां खड़े हैं. आज भी आप बात नहीं करने दे रहे हो. कोर्ट ने जो फ़ैसले दिए हैं हम उसी पर बात कर रहे हैं. कोई नई बात नहीं कर रहे हैं. ये बात मेरी समझ से पूरी तरह बाहर है."
दिलजीत दोसांझ ने कहा था, "मुझे इस बात की ख़ुशी है कि ये फ़िल्म कुछ लोगों तक पहुंच गई है. ये लोगों की फ़िल्म है. ये रुक नहीं सकती."
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म 'सतलुज' नाम से ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ज़ी-5 पर तीन जुलाई को रिलीज़ हुई थी, लेकिन पांच जुलाई को इसे प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया.




















