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यूक्रेन में रूस के ड्रोन हमले जारी, लाखों गाड़ियों के लिए अहम दो पुलों पर हमला
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इमेज कैप्शन, ड्रोन हमले के बाद पुल की एक लेन में बड़ा गड्ढा बन गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ
यूक्रेन की राजधानी किएव में रूस ने लगातार चौथे दिन ड्रोन हमले किए हैं. इन हमलों में शहर के महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाया गया है.
रविवार सुबह पिवनिच्नी (उत्तरी) पुल पर लगातार दूसरे दिन हमला हुआ, जिसमें दो लोग घायल हो गए. पिछले सप्ताह पिवदेन्नी (दक्षिणी) पुल पर भी कई बार हमले किए गए थे.
ताज़ा हमला ऐसे समय हुआ जब जर्मनी के चांसलर फ़्रेडरिक मेर्ज़ यूक्रेन के प्रति समर्थन जताने के लिए अचानक किएव पहुंचे.
रूसी सेना ने कहा है कि वह किएव और यूक्रेन के अन्य क्षेत्रों पर हमले और तेज़ करेगी. रूस का दावा है कि उसने उन दोनों पुलों को निशाना बनाया, जिनका इस्तेमाल यूक्रेनी सैनिकों के आवागमन के लिए किया जाता है.
इन दोनों पुलों से हर रोज़ क़रीब पांच लाख वाहन गुजरते हैं.
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इमेज कैप्शन, शुक्रवार को हुए हमले में एक रूसी ड्रोन ने किएव के पिवदेन्नी (दक्षिणी) पुल के केबलों को निशाना बनाया
हालांकि रूसी हमलों के बावजूद दोनों पुल अभी भी खड़े हैं, लेकिन नुक़सान और यातायात प्रतिबंधों के कारण राजधानी के कई हिस्सों में सड़कों पर जाम के हालात बन गए हैं.
यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, रूस ने रातभर में 135 ड्रोन दागे, जिनमें 52 जेट इंजन वाले ड्रोन शामिल थे. यूक्रेन ने दावा किया कि उसने 125 ड्रोन और अन्य हवाई हमलों को नाकाम कर दिया.
रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि वह पूरे यूक्रेन में हमले तेज़ करेगा.
मंत्रालय के मुताबिक़ यह फैसला ज़ेलेंस्की के उस बयान के जवाब में लिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस की तेल रिफ़ाइनरियों पर यूक्रेन अपने हमले बढ़ाएगा.
पाकिस्तान: इमरान ख़ान को रिहा कराने की मांग को लेकर शुरू हुआ लॉन्ग मार्च: अब तक क्या-क्या हुआ?
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इमेज कैप्शन, पीटीआई के लॉन्ग मार्च में जुटे प्रदर्शनकारी
पाकिस्तान के प्रमुख विपक्षी दल और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) रविवार को लॉन्ग मार्च निकाल रही है.
पीटीआई के आह्वान पर ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के लक्की मरवत ज़िले का गुंडी चौक राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है.
यहां बलूचिस्तान और प्रांत के दक्षिणी इलाक़ों से काफ़िले पहुंच रहे हैं. यह लॉन्ग मार्च इस्लामाबाद तक निकाले जाने की बात कही गई है.
हालांकि गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने चेतावनी दी है कि किसी भी समूह को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा. साथ ही कहा है कि अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने वाले पीटीआई नेताओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.
इस लॉन्ग मार्च का नेतृत्व ख़ैबर पख़्तूनख़्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफ़रीदी कर रहे हैं. इमरान ख़ान की रिहाई की मांग को लेकर यह मार्च बीते महीने निकाला जाना तय हुआ था. फिर सरकार और पीटीआई के बीच चर्चा का दौर चला, जो विफल रहा.
बीबीसी न्यूज़ उर्दू के मुताबिक़, मरवत ज़िला प्रशासन ने डेरा इस्माइल ख़ान डिविज़न के चार ज़िलों में शांति भंग की धारा 144 लागू कर दी है. इसके बावजूद पीटीआई समर्थक मार्च में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे हैं.
गुंडी चौक और आसपास के इलाक़ों में मोबाइल फ़ोन सेवाएं बाधित होने की ख़बरें हैं, जिससे लोगों से संपर्क करने में दिक्कत आ रही है.
अपर साउथ वज़ीरिस्तान में पुलिस ने पीटीआई कार्यकर्ताओं के एक काफ़िले को रोकने की कोशिश की. रिपोर्ट्स के मुताबिक़, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे गए, जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस्लामाबाद मार्च में शामिल होने के लिए मकीन क्षेत्र से निकला काफ़िला भारी पुलिस बल की मौजूदगी के कारण आगे नहीं बढ़ सका.
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इमेज कैप्शन, गृह मंत्री मोहसिन नक़वी पेशावर पहुंचे हैं
गृहमंत्री नक़वी ने पेशावर पहुंचकर चेताया
लॉन्ग मार्च निकाले जाने के बीच गृह मंत्री मोहसिन नक़वी पेशावर पहुंचे और गवर्नर हाउस में गवर्नर फ़ैसल करीम कुंदी से मुलाक़ात की.
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने कहा है कि सरकार और पीटीआई के बीच बातचीत समाप्त हो चुकी है.
लाहौर में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान मोहसिन नक़वी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी की जान जाती है तो इसकी ज़िम्मेदारी सुहैल अफ़रीदी पर होगी.
दूसरी ओर, पीटीआई महासचिव सलमान अकरम राजा ने दावा किया कि बातचीत विफल होने की मुख्य वजह यह थी कि सरकार चाहती थी कि ख़ैबर पख़्तूनख़्वा सरकार प्रांत में आतंकवाद-रोधी अभियानों और उपायों का समर्थन करे.
हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा,'पाकिस्तान को जानकारी लीक करने के आरोप में रिटायर सैनिक समेत दो गिरफ़्तार'
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इमेज कैप्शन, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान को सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देने के आरोप में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया है कि गिरफ़्तार किए गए दो अभियुक्तों में सेना का एक सेवानिवृत्त जवान भी शामिल है, जिसे संविदा के आधार पर दोबारा नियुक्त किया गया था.
सरमा ने कहा कि यह कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर की गई है.
हालांकि इन दोनों की पहचान और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के प्रकार को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है.
दिल्ली में ज्ञानेश कुमार और दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, देखिए तस्वीरों में
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इमेज कैप्शन, प्रदर्शन में वामपंथी नेता वृंदा करात और अन्य प्रदर्शनकारी महिलाओं ने हिस्सा लिया. वामपंथी संगठन, छात्र संगठन समेत कई लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने उतरे. दिल्ली पुलिस पर आरोप है कि शनिवार को प्रदर्शन के दौरान दो महिला पत्रकारों और एक प्रदर्शनकारी पर यौन हमले किए गए.
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इमेज कैप्शन, दिल्ली में आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने रविवार को इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक 'सिटिज़न्स मार्च' निकाला
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इमेज कैप्शन, महिला पत्रकारों और एक प्रदर्शकारी के साथ हुई यौन हिंसा के मामले में केस दर्ज करने की मांग को लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया
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इमेज कैप्शन, एफ़आईआर दर्ज करने की मांग कर रही आइसा की नेता नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया गया
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इमेज कैप्शन, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने एक पोस्ट में ख़ुद के बारे में कहा, "सिटीज़न मार्च के दौरान आज भी निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर की ओर जाते हुए पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया."
यमन के हूती विद्रोहियों ने एक अहम सप्लाई रूट को कथित तौर पर काट दिया
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इमेज कैप्शन, हूती विद्रोही (फ़ाइल फ़ोटो)
यमन के हूती विद्रोहियों ने एक अहम सप्लाई रूट को कथित तौर पर काट दिया है. इसका दावा समाचार एजेंसी एएफ़पी ने किया है.
बीबीसी न्यूज़ फ़ारसी ने एएफ़पी के हवाले से बताया, यमन में एक पुलिस सूत्र ने कहा, "हमें जानकारी मिली है कि हूतियों ने सफ़िया इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया है, मुख्य सड़क को बंद कर दिया है और पुलिस स्टेशन पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है."
ग़ौरतलब है कि ईरान समर्थित हूती राजधानी सना को छोड़कर बाब अल-मंदब स्ट्रेट और लाल सागर के पूर्वी तट के लगभग पूरे हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं.
अगर हूती अदन तक पहुंच जाते हैं, तो यमन व्यावहारिक रूप से दो हिस्सों, पूर्वी और पश्चिमी यमन में बंट जाएगा.
समाचार एजेंसी ने यह भी बताया कि यमनी सेना के तीन सूत्रों ने इलाक़े और सप्लाई रूट पर हूतियों के क़ब्ज़े की पुष्टि की है. उनका कहना है कि हूतियों ने ताइज शहर को प्रभावी रूप से घेर लिया है.
रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने ताइज से अदन जाने वाली मुख्य सड़क पर यातायात भी रोक दिया है. इस इलाक़े में लड़ाई जारी है.
हूती पिछले कई दिनों से ताइज पर क़ब्ज़ा करने के लिए बड़ा अभियान चला रहे हैं. उनकी योजना वहां से आगे बढ़कर अदन की ओर जाने की है.
अदन, यमन की सरकारी सेना के नियंत्रण वाला सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है. इस सेना को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां बोले- 'लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना मनमानी है'
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इमेज कैप्शन, जस्टिस भुइयां (फ़ाइल फ़ोटो)
वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (स्पेशल इंटेसिव रिवीज़न) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिले मतदान के अधिकार से कोई भी प्राधिकरण छेड़छाड़ नहीं कर सकता.
कानूनी मामलों की समाचार वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक़, उन्होंने स्पष्ट कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है और न ही कोई संस्था मतदाताओं के अधिकारों को मनमाने ढंग से प्रभावित कर सकती है.
जस्टिस भुइयां ने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वोट करने के अधिकार से वंचित हो जाते हैं तो ऐसी प्रक्रिया को मूल रूप से मनमाना कहा जाएगा.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी तरह के तर्क से इसे सही नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने यह भी कहा कि किसी मतदाता का नाम एक बार वोटर लिस्ट में दर्ज हो जाने के बाद उसे बिना नोटिस दिए और सुनवाई का अवसर दिए हटाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि केवल डेड वोटर के केस में यह अपवाद हो सकता है.
जस्टिस भुइयां ने कहा कि ऐसा कोई कदम न तो कोई प्राधिकरण उठा सकता है और न ही कोई अदालत उसे मंज़ूरी दे सकती है.
ईरान का दावा, 'अमेरिका ने मध्यस्थों के ज़रिए भेजे कुछ प्रस्ताव'
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इमेज कैप्शन, मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने ईरानी नेतृत्व में अहम भूमिकाएं निभाई हैं, वो इस समय संसद के स्पीकर हैं
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने दावा किया है कि अमेरिका ने हाल के दिनों में एक मध्यस्थ के ज़रिए कुछ प्रस्ताव भेजे हैं.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, उन्होंने संसद के सत्र में कहा, "अमेरिकी अधिकारी मीडिया में कुछ और कहते हैं, लेकिन हाल ही में उन्होंने मध्यस्थों के ज़रिए प्रस्ताव भेजे हैं."
हालांकि, ग़ालिबाफ़ ने इन प्रस्तावों का ब्योरा नहीं दिया. उन्होंने कहा कि "जब तक इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के आधार पर रखी गई हमारी सात शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक होर्मुज़ स्ट्रेट नहीं खोला जाएगा."
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा है कि सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के तहत काम करने वाली छह सदस्यीय समिति अमेरिका के साथ होने वाली वार्ताओं का नेतृत्व करेगी.
ग़ौरतलब है कि हाल ही में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने एक "छह सदस्यीय टीम" का ज़िक्र किया था. उन्होंने कहा था कि अमेरिका से जुड़े मामलों में इसी टीम को फ़ैसले लेने का अधिकार है और सभी निर्णय उसके साथ समन्वय करके लागू किए जाते हैं.
सीबीएस को दिए इंटरव्यू के बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने इस समिति के सदस्यों के बारे में जानकारी दी. इनमें राष्ट्रपति, संसद अध्यक्ष, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव, सशस्त्र बलों के प्रमुख, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ़ और एक अन्य सदस्य शामिल हैं.
बग़ाई के ताज़ा बयान से अब्बास अराग़ची की इस समिति में सदस्यता की पुष्टि हो गई है.
बग़ाई ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "इस उच्चस्तरीय समिति में विदेश मंत्री की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि कूटनीतिक तंत्र राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े फ़ैसलों के साथ पूरी तरह समन्वय में काम कर रहा है."
जंतर-मंतर प्रदर्शन: सौरभ भारद्वाज और नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया
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इमेज कैप्शन, दो अक्तूबर को भी सौरभ भारद्वाज को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था (फ़ाइल फ़ोटो)
दो महिला पत्रकारों और एक प्रदर्शनकारी महिला के दिल्ली पुलिस के एक अफ़सर पर लगाए यौन हमले के आरोप में अब तक केस दर्ज नहीं होने को लेकर विरोध कर रहे आप नेता सौरभ भारद्वाज को हिरासत में ले लिया गया है.
उनके अलावा, वामपंथी छात्र संगठन आइसा की नेता नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है.
सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें देखा जा सकता है कि पुलिस उन्हें घसीटते हुए ले जा रही है. इससे दो दिन पहले दो अक्तूबर को भी उन्हें प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था.
सौरभ भारद्वाज की हिरासत पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय समन्वय अरविंद केजरीवाल ने कहा- "मोदी जी ने हिटलर को भी पीछे छोड़ दिया."
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इमेज कैप्शन, सौरभ भारद्वाज ने एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें देखा जा सकता है कि पुलिस उन्हें घसीटते हुए ले जा रही है
दरअसल, बीते शनिवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने पहुंचे सौ से अधिक प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. इस दौरान कवरेज कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उनके साथ यौन छेड़खानी की गई.
इस घटनाक्रम के बाद महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ एक प्रदर्शन भी किया. पुलिस को लिखित शिक़ायत दी गई मगर अब तक संबंधित पुलिस अफ़सर के ख़िलाफ़ केस दर्ज नहीं हुआ है.
इसी मामले पर दोपहर दो बजे कॉकरोच जनता पार्टी के सौरभ दास, रत्ना सिंह, वामनेता वृंदा करात, आइसा की नेहा बोरा आदि जंतर मंतर क्षेत्र के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे और प्रदर्शन किया.
नेहा बोरा को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया.
इस दौरान सौरभ दास ने कहा कि एक पीड़िता पुलिस से मिलना चाहती है मगर उन्हें अनुमित नहीं दी जा रही.
चिराग पासवान ने राहुल गांधी की किस बात के लिए की तारीफ़
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इमेज कैप्शन, चिराग पासवान हाल में बिहार की एनडीए सरकार के ख़िलाफ़ कड़े बयान दे चुके हैं और अब उन्होंने राहुल गांधी की एक पहल की तारीफ़ की है
केंद्रीय मंत्री और लोकजनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने राहुल गांधी के "डिजिटल सत्याग्रह" की तारीफ़ की.
रायपुर में पत्रकारों से बात करते हुए चिराग पासवान ने इस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, “यह अच्छी बात है. मैंने हमेशा युवाओं और भारतीय नागरिकों को अपनी बात रखने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा मंच उपलब्ध कराने की वक़ालत की है. इसी सोच के साथ राहुल गांधी ने सत्याग्रह की शुरुआत की थी. इसका नाम भी सही रखा गया है.”
हालांकि फिर उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “विपक्ष को बार-बार झूठ और भ्रम फैलाने की आदत हो गई है. मुद्दे उठाना और फिर उन्हें बीच में ही छोड़ देना, ईवीएम से लेकर एसआईआर तक हर मुद्दे पर जनता के बीच भ्रम फैलाना. सच्चाई यह है कि जनता आपको नकार रही है. इसे आप सत्याग्रह के ज़रिए नहीं समझ पाएँगे, बल्कि आत्ममंथन के ज़रिए समझ पाएँगे."
डिजिटल 'सत्याग्रह' क्या है?
राहुल गांधी ने 3 अक्तूबर को 'सत्याग्रह' नाम का एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है. इसका मक़सद देशभर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलनों और लोगों के संघर्षों को एक जगह लाना है.
राहुल गांधी ने बिहार बाढ़ को लेकर बीजेपी से पूछा- '17 साल में इससे क्यों नहीं निपट सकी'
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इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने बीजेपी से सवाल करते हुए "डबल इंजन" को लेकर तंज किया है
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को बिहार में आई बाढ़ को लेकर बीजेपी पर हमला बोला.
उन्होंने पूछा कि राज्य में बीते 17 वर्षों से सत्ता में रही बीजेपी की "डबल इंजन" सरकार ने इस बार-बार आने वाली समस्या से निपटने के लिए क्या किया है.
राहुल गांधी ने एक एक्स पोस्ट में कहा कि बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए हैं. कई लोगों की मौत और लापता होने की भी ख़बरें हैं.
उन्होंने कहा कि बिहार में एक बार फिर बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उन्होंने संवेदना व्यक्त की.
राहुल गांधी ने कहा कि सबसे दुखद बात यह है कि बिहार के लिए यह कोई नई समस्या नहीं है. हर साल बाढ़ आती है, लोगों की जान जाती है, परिवार बिखर जाते हैं और बड़ी संख्या में लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है.
उन्होंने कहा, "बीजेपी की डबल इंजन सरकार को बताना चाहिए कि इस हर साल होने वाली त्रासदी को रोकने के लिए उसने पिछले 17 वर्षों में क्या किया है. ज़मीनी स्तर पर क्या बदलाव आया है?"
राहुल गांधी ने कहा कि बिहार की जनता को हर साल सिर्फ़ राहत और आश्वासनों की ज़रूरत नहीं है, बल्कि इस समस्या का स्थायी समाधान चाहिए.
टीएमसी की पूर्व सांसद कोयल मल्लिक को बीजेपी ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार, प्रभाकर मणि तिवारी, कोलकाता से बीबीसी न्यूज़ हिंदी के लिए
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इमेज कैप्शन, कोयल मल्लिक बंगाली सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री भी हैं जो पहले टीएमसी के साथ थीं और फिर बीजेपी में शामिल हो गईं
बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की पूर्व राज्यसभा सांसद अभिनेत्री कोयल मल्लिक को ही राज्यसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है.
यह सीट कोयल के इस्तीफे़ से ही खाली हुई थी.
कोयल मल्लिक बंगाली सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री भी हैं जो पहले टीएमसी के साथ थीं और फिर बीजेपी में शामिल हो गईं.
बीजेपी इससे पहले तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले तीन सांसदों को भी इसी तरीके से राज्यसभा भेज चुकी है. इसलिए कोयल के मामले में भी ऐसा ही होने के कयास लगाए जा रहे थे.
रविवार को केंद्रीय नेतृत्व ने कोयल के नाम का एलान कर इन कयासों की पुष्टि कर दी.
इस साल विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद से ही तृणमूल में टूट का सिलसिला शुरू हो गया था.
उसी दौरान बीते 16 जुलाई को कोयल ने दिल्ली में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाक़ात कर अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया था.
अब उनके इस्तीफे़ से खाली हुई सीट पर 16 अक्तूबर को उपचुनाव होना है.
कोयल से पहले सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देब और प्रकाश चिक बड़ाईक ने भी तृणमूल के राज्यसभा सांसद के तौर पर इस्तीफ़ा दे दिया था. बाद में भाजपा ने उन तीनों को ही दोबारा राज्यसभा में भेज दिया.
इस साल फरवरी में तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने राज्य पुलिस के पूर्व महानिदेशक राजीव कुमार, पूर्व मंत्री बाबुल सुप्रियो और सुप्रीम कोर्ट की वकील मेनका गुरुस्वामी के साथ कोयल मल्लिक को राज्यसभा में पार्टी का उम्मीदवार बनाया था.
मार्च में हुए चुनाव में उनको ऊपरी सदन के लिए चुना गया था. कोयल ने छह अप्रैल को राज्यसभा के सांसद के तौर पर शपथ ली थी. लेकिन संसद के किसी अधिवेशन में शामिल हुए बिना उन्होंने 16 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया था.
दिल्ली पुलिस के एक अफ़सर पर यौन छेड़छाड़ के आरोप में फिर जुटे प्रदर्शनकारी, सौरभ दास ने ये कहा
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जंतर मंतर पर महिला पत्रकारों और प्रदर्शनकारी महिला के साथ शनिवार को हुए यौन छेड़खानी के मामले में एफ़आईआर दर्ज करने की मांग तेज हो गई है.
कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य सौरभ दास ने एक्स पर पोस्ट करके बताया है कि वे संसद मार्ग पुलिस थाना के पास मौजूद हैं. उनका कहना है कि इस घटना की एक पीड़िता पुलिस से मिलना चाहती हैं मगर उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा है.
सौरभ ने बताया है कि उनके साथ सीपीएम नेता वृंदा करात, जेएनयू की पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष आयशी घोष, वकील ऋषण रंजन हैं.
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने एक एक्स पोस्ट में जानकारी दी थी कि तीन अक्तूबर को नई दिल्ली क्षेत्र में हुए प्रदर्शन के दौरान क़ानून व्यवस्था की स्थिति संभालते समय तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए.
पोस्ट में कहा गया कि "नई दिल्ली ज़िले को उनकी शिकायतें मिली हैं. निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए इन शिकायतों को क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है."
अखिलेश यादव बोले- 'सीट बंटवारे से ज़्यादा अहम गठबंधन की जीत'
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इमेज कैप्शन, अखिलेश यादव (फ़ाइल फ़ोटो)
अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है, ऐसे में अखिलेश यादव ने इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है.
अखिलेश यादव ने रविवार को एक्स पर एक पोस्ट करके कहा है कि कि सीटों के बंटवारे से ज़्यादा महत्वपूर्ण जीत है.
वे बोले, "यह अहम नहीं है कि अलायंस में किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, बल्कि यह बात अहम है कि आख़िर में गठबंधन की जीत सुनिश्चित हो."
उन्होंने आगे कहा, "जब लक्ष्य साफ़ होता है तो लोग हाथ मिलाकर साथ चलते हैं. जब मंज़िल नज़र आने लगती है तो सफ़र आसान हो जाता है."
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण की रक्षा के लिए सभी विपक्षी दलों को मिलकर काम करना होगा.
ग़ौरतलब है कि यह बयान ऐसे वक़्त आया है जब सपा सांसद शिवपाल सिंह पटेल ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस की 150 सीटों की कथित मांग की आलोचना की और इसे अव्यावहारिक बताया है.
फ़्लाईदुबई के को-पायलट को लेकर ऑस्ट्रेलिया में जांच जारी, क्या है वजह?, क्लेयर कीनन
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इमेज कैप्शन, फ़्लाईदुबई फ़्लाइट पर यात्रियों के नियंत्रण के बाद इसे सऊदी अरब की ओर डायवर्ट किया गया था
ऑस्ट्रेलिया फ़्लाईदुबई फ़्लाइट के
उस को-पायलट की देश से संबंधों की जांच कर रहा है, जिसने इसराइल के तेल अवीव जा रहे एक विमान को अपने नियंत्रण में लेने
की कोशिश की थी.
दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान के
दौरान को-पायलट पर आरोप लगे कि उसने फ़्लाइट के कैप्टन पर क्रैश ऐक्स से हमला
किया. इसके बाद यात्रियों ने उसे काबू में कर लिया और विमान को सुरक्षित तरीके से
नियंत्रित करने में कामयाब रहे.
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने को-पायलट
की पहचान नहीं बताई है. हालांकि, रॉयटर्स,
सीएनएन और द न्यूयॉर्क टाइम्स समेत कई मीडिया
संस्थानों ने उसका नाम हमाम अल-हमामी बताया है.
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के
प्रॉसिक्यूटर ने कहा है कि वह इस घटना और इसके पीछे की संभावित वजहों की जांच कर
रहे हैं.
बीबीसी को दिए एक बयान में
ऑस्ट्रेलियन फ़ेडरल पुलिस (एएफ़पी) ने "इस व्यक्ति के ऑस्ट्रेलिया से
संबंधों" की जांच की पुष्टि की.
एएफ़पी ने कहा कि इस जांच में स्टेट
पुलिस और देश की सुरक्षा एजेंसी भी शामिल है. उसने कहा कि इस बारे में अपडेट
"सही समय पर दिया जाएगा."
इस मामले से परिचित सूत्रों ने
ऑस्ट्रेलियाई मीडिया को बताया कि को-पायलट को 2014 में स्टूडेंट वीज़ा जारी किया
गया था और उसने 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की. इसके बाद वह देश से
चला गया.
ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन
(ABC) ने बताया कि को-पायलट का स्टूडेंट
वीज़ा 2019 में रद्द कर दिया गया था, क्योंकि
उसने किसी कोर्स में दाख़िला नहीं लिया था और इस वजह से वह वीज़ा के लिए पात्र
नहीं रह गया था.
नमस्कार!
अब तक बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह
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प्रियंका गांधी महिला पत्रकारों पर यौन हमले से जुड़े मामले पर क्या बोलीं?
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इमेज कैप्शन, प्रियंका गांधी ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल उठाए हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला
पत्रकारों पर कथित यौन हमले से जुड़े मामले पर अब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की
प्रतिक्रिया आई है.
उन्होंने महिला सुरक्षा का मुद्दा
उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना
साधा है.
प्रियंका गांधी ने एक्स पर लिखा,
"जंतर-मंतर पर रिपोर्टिंग के दौरान
महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है. दर्जनों
पत्रकारों के प्रदर्शन के बावजूद न एफ़आईआर दर्ज की गई, न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई."
उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं का भी आरोप
है कि पुलिस उनके साथ बहुत अभद्र तरीक़े से पेश आ रही है. जिस पुलिस का काम
सुरक्षा देना है, उससे ही महिलाएं ख़तरा महसूस कर रही
हैं. कॉलेज की छात्राओं से लेकर पत्रकार तक, हर जगह महिलाएं असुरक्षा का सामना कर रही हैं."
प्रियंका गांधी ने पीएम मोदी और अमित
शाह को टैग करते हुए सवाल किया कि महिलाओं के साथ ऐसा बर्ताव किया जाना क्या सही
है?
इस मामले को लेकर इससे पहले लोकसभा
में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी अमित शाह पर हमला बोला है और पुलिस
अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाया है.
शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के
दौरान महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन हिंसा के आरोप लगाए थे. इसको
लेकर कई पत्रकारों ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर धरना भी दिया और एफ़आईआर
दर्ज करने की मांग की.
पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज
कर ली और शिकायत को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है. इसके अलावा महिला पत्रकारों का
मेडिकल भी कराया गया है.
महिला पत्रकारों पर यौन हमले से जुड़े मामले पर दिल्ली पुलिस की डीसीपी क्या बोलीं?
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इमेज कैप्शन, डीसीपी नेहा यादव ने कहा कि शिकायत के बाद महिला पत्रकारों का मेडिकल कराया गया
दिल्ली
पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों पर महिला पत्रकारों के साथ यौन हिंसा से जुड़े
आरोपों के मामले में डीसीपी नेहा यादव का बयान आया है.
उन्होंने
बताया कि महिला पत्रकारों से शिकायत मिलने के बाद उनका मेडिकल कराया गया और शिकायत
क्राइम ब्रांच को भेज दी गई है.
डीसीपी नेहा
यादव ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, "नई दिल्ली इलाक़े में बीएनएसएस की धारा 163
लागू होने के बावजूद आइसा और अन्य पार्टियों ने एसआईआर के विरोध में तीन अक्तूबर
को प्रदर्शन किया. धारा 163 के बारे में जानकारी देते हुए प्रदर्शनकारियों को जगह
से हटाने की चेतावनी दी गई, जिसे न मानने पर उन्हें हिरासत में लिया गया."
उन्होंने
बताया, "शाम को
क़रीब छह बजे अपने-आप को पत्रकार बताने वाली तीन महिलाओं ने डिटेंशन के दौरान
धक्का-मुक्की की शिकायत दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों के ख़िलाफ़ की.
इनकी शिकायत दर्ज कर इनका मेडिकल करा दिया गया है और शिकायत क्राइम ब्रांच को भेज
दी गई है.''
शनिवार को
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर यौन हिंसा
के आरोप लगाए थे.
इसको लेकर कई पत्रकारों ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर धरना
भी दिया और एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की.
ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ जांच के आदेश देने के बाद केरल के गृह मंत्री क्या बोले, इमरान क़ुरैशी, बेंगलुरु से बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
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इमेज कैप्शन, चेन्निथला ने जांच के आदेश को राजनीतिक बदले की कार्रवाई से जोड़ने से इनकार किया है (फ़ाइल फ़ोटो)
कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की याचिका पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के
ख़िलाफ़ जांच के आदेश देने के बाद अब केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला की
प्रतिक्रिया आई है.
उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "मैंने क़ानूनी राय ली थी और मुझे बताया गया कि जब वह (ज्ञानेश कुमार) लोक निर्माण विभाग के सचिव थे, इस 215 करोड़ रुपये की परियोजना में गंभीर अपराध हुआ है. इसलिए मैंने विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो से जांच के आदेश दिए हैं."
रमेश चेन्निथला ने यह भी कहा कि जब इंजीनियर ने आत्महत्या की थी, उस समय एलडीएफ़ की सरकार सत्ता में थी. कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ़्रंट (यूडीएफ़) 10 साल के अंतराल के बाद सत्ता में लौटा है.
वहीं, एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि मलेशियाई प्रोजेक्ट इंजीनियर ली के 'सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का साफ़ तौर पर ज़िक्र' किया गया है.
उन्होंने एएनआई से कहा,
"इसलिए सरकार हाथ पर हाथ रखकर नहीं
बैठ सकती. मैं चुपचाप बैठे ये नहीं देख सकता. मैंने इसे विजिलेंस डायरेक्टर के पास
भेज दिया है, जिससे कि याचिका के विवरण की जांच की
जा सके और न्याय दिलाने के लिए क़ानूनी कार्रवाई की जा सके."
चेन्निथला ने इस आदेश को राजनीतिक
बदले की कार्रवाई से जोड़ने से इनकार किया है.
उन्होंने कहा, "बेशक, हम सभी
विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं... हम उनके ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं. लेकिन यह मामला अलग
है. एक मंत्री के तौर पर यह मेरी ज़िम्मेदारी है कि मैं पूरे मामले की जांच करूं
और अगर कोई अपराध है, तो इसे आगे की जांच के लिए विजिलेंस
डायरेक्टर के पास भेजना मेरा काम है."
ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ ये जांच
विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (वीएसीबी) करेगी, जिसमें 2006 में केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (केएसटीपी) सड़क
निर्माण परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों और इससे जुड़े एक मलेशियाई ठेकेदार की
मौत को लेकर जांच होगी.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की 'जीवन आस्था' हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एमएनएस का ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ मार्च, जान्हवी मुले, बीबीसी संवाददाता
इमेज कैप्शन, मुंबई में दो अक्तूबर को भी ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए थे
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के
इस्तीफ़े की मांग को लेकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र
नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने रविवार को मुंबई में 'गर्जना मोर्चा' का
आह्वान किया है.
इस मार्च में शामिल होने के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे मौक़े पर पहुंच चुके हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में उनके समर्थक जुटे हुए हैं.
दोनों दल मेट्रो सिनेमा से छत्रपति
शिवाजी महाराज टर्मिनस के पास स्थित बृहन्मुंबई नगर निगम की इमारत तक पैदल मार्च
करेंगे.
इस मार्च में लोगों से तिरंगे झंडे
के साथ शामिल होने की अपील की गई है. मार्च के दौरान किसी भी पार्टी का झंडा नहीं
दिखाई देगा.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस
की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े
की मांग लगातार हो रही है.
दो अक्तूबर को भी शिवाजी पार्क के
पास कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने विरोध प्रदर्शन किया था.
इमेज कैप्शन, हर्षल चिपलुनकर को एसआईआर में शामिल होने के लिए दोबारा फ़ॉर्म जमा करना पड़ा