इंस्टाग्राम पर बीबीसी की पड़ताल के बाद सुप्रीम कोर्ट का अहम फ़ैसला, दिव्या आर्य, बीबीसी संवाददाता

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सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण और हिंसक सामग्री (सीएसईएएम) पर सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश का बड़ा असर हो सकता है.
जुलाई में बीबीसी की इनवेस्टिगेशन में हमने पाया था कि मेटा के प्लेटफ़ॉर्म इंस्टाग्राम पर सीएसईएएम कंटेंट वाले विज्ञापन चलाए जा रहे हैं.
हमारी पड़ताल का हवाला देते हुए एक बाल-अधिकार एनजीओ 'जस्ट राइट्स फ़ॉर चिल्ड्रन' ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की.
इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए 15 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है. आदेश में केंद्र सरकार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर सीएसईएएम कंटेंट की पहचान करने और हटाने के लिए दिशा-निर्देश और एसओपी यानी स्टैन्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स बनाने को कहा गया है.
इसके लिए ज़रूरत पड़ने पर आईटी एक्ट और आईटी रूल्स में बदलाव करने की बात भी कही है. कोर्ट ने कई निर्देश भी दिए हैं.
- लॉ एनफ़ोर्समेंट एजेंसीज़ की मदद के लिए ऐसे कंटेंट की जानकारी देने वाला नेशनल डेटाबेस बनाया जाए.
- सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जब भी ऐसा कंटेंट हटाएँ तो दो घंटे के अंदर उसकी जानकारी अधिकारियों को दें.
- सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म हर महीने ऐसे कंटेंट को हटाने की पूरी जानकारी के साथ रिपोर्ट दें.
- सीएसईएएम कंटेंट की शिकायतों को देखने के लिए एक ग्रीवैन्स ऑफ़िसर नियुक्त किया जाए.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो महीने के अंदर इन सब बिंदुओं को लागू करने पर रिपोर्ट माँगी है. साथ ही सुझाया है कि वह सोशल मीडिया इंटरमीडियरी पर सीएसईएएम कंटेंट के संबंध में आईटी एक्ट का उल्लंघन करने पर फ़ाइन लगाने और ऐसे कंटेंट से हुए मुनाफ़े को ज़ब्त करने पर विचार करे.































