इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों के मामले में केंद्रीय मंत्री ने मेटा को तलब किया

मेटा

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इमेज कैप्शन, बीबीसी आई ने अपनी पड़ताल में पाया कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों को प्रचारित कर रहा है
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पढ़ने का समय: 3 मिनट

चेतावनी: इस र‍िपोर्ट के कुछ विवरण पाठकों को व‍िचल‍ित कर सकते हैं.

बीबीसी-आई की एक पड़ताल में पाया गया है कि इंस्टाग्राम भारत में पैसे लेकर ऐसे विज्ञापन चला रहा है, जिनके ज़रिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रसार हो रहा है.

इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को मेटा से स्पष्टीकरण मांगने और उसे तलब करने का निर्देश दिया है.

बीबीसी को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है.

समाचार एजेंसी एएनआई ने भी कहा है कि इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय मेटा से स्पष्टीकरण मांगेगा.

बीबीसी की पड़ताल में पाया गया कि इन विज्ञापनों में, 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. यूज़र को मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के चैनल के लिंक दिए गए हैं. जहाँ वे इन सामग्रि‍यों को सिर्फ़ 99 रुपए में ख़रीद सकते हैं.

हाल के दिनों में आईटी मंत्रालय की तरफ़ से मेटा के ख़िलाफ़ यह ताज़ा कार्रवाई है. इससे कुछ दिन पहले सरकार ने मेटा के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप को उसके नए यूज़रनेम फ़ीचर को लेकर नोटिस भेजा था.

बीबीसी के सवाल पर मेटा ने क्या कहा था

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बीबीसी ने जब ऐसे एक विज्ञापन को इंस्टाग्राम को रिपोर्ट किया, तब 24 घंटे बाद सोशल मीडिया कंपनी का जवाब आया कि ये पोस्ट उनकी 'कम्यूनिटी गाइडलाइन्स' का उल्लंघन नहीं करतीं.

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जब बीबीसी ने इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा से जवाब माँगा, उन्होंने कहा कि वे पहले ही कई विज्ञापन डिसेबल कर चुके हैं और उन्हें पोस्ट करनेवाले अकाउंट्स को सस्‍पेंड कर चुके हैं.

कंपनी ने कहा कि बीबीसी की पड़ताल के बाद उन्होंने और विज्ञापन हटाए हैं, अकाउंट डिसेबल किए हैं और उनकी पॉलिसी का उल्लंघन करनेवाली अन्य सामग्री के यूआरएल ब्लॉक कर द‍िए हैं.

वहीं, टेलीग्राम ने कहा कि उन्होंने साल 2026 में बाल यौन शोषण और ह‍िंसक सामग्री से जुड़े दो लाख 74 हज़ार ग्रुप और चैनल हटाए हैं.

मेटा ने बाद में बीबीसी को बताया कि "कोई सिस्‍टम परफेक्ट नहीं होता और हमारे रिव्यू प्रोसेस सभी 'पॉलिसी वॉयलेशन' नहीं पकड़ पाते."

मेटा ने कहा, "हम विज्ञापनों के लाइव होने के बाद उन पर लगातार 'प्रोऐक्टिव डिटेक्शन टेकनॉलॉजी' चलाते हैं और किसी को भी अगर लगे कि कोई विज्ञापन हमारे नियम तोड़ रहा है तो वे उसे रिपोर्ट कर सकते हैं."

साथ ही उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चलता है कि बच्चों का शोषण किया जा रहा है तब वे क़ानून के मुताबिक इसकी सूचना नेश्नल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉएटिड चिल्ड्रन (एनसीएमईसी) को देते हैं. एनसीएमईसी इंटरनेट पर बच्‍चे-बच्‍च‍ियों के यौन शोषण और ह‍िंसा के बारे में रिपोर्ट करने का वैश्विक सिस्टम है.

बीबीसी-आई की इस पूरी पड़ताल को पढ़ने के लिये यहां क्लिक करें. यूट्यूब पर इस रिपोर्ट को देखने के लिए यहां क्लिक करें.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.