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रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है.
चंदन कुमार जजवाड़े, अरशद मिसाल
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जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बैठक के बाद अभ्यर्थियों ने कहा कि उनकी मांगें सरकार के सामने रख दी गई हैं.
हालांकि, फिलहाल प्रदर्शन जारी रहेगा.
छात्रों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल राजेश प्रसाद ने बताया, "मंत्रियों के सामने सभी मांगो और इन मांग का आधार रखा. मंत्रियों ने हमारी मांग को ध्यान से सुना और कहा कि ये बिल्कुल जायज़ है."
उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, "हमने छात्रों के साथ अच्छे माहौल में बैठक की. हमने छात्रों की मांगों को समझा. सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रतिबद्ध है."
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है. सरकार और अभ्यर्थियों के बीच आगे भी वार्ता होने की संभावना है.

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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद गाजियाबाद के दो निजी अस्पताल चार साल की उस बच्ची के परिवार को मुआवजा देने पर सहमत हो गए हैं, जिसकी कथित तौर पर समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मौत हो गई थी. बच्ची के साथ पहले रेप हुआ था और बाद में उसकी मौत हो गई थी.
लाइव लॉ के मुताबिक सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ इस मामले की स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि वह यौन उत्पीड़न के मामलों और अन्य मेडिकल आपात स्थितियों में मरीजों को तुरंत इलाज सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करेगी.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले एक विशेष जांच दल का गठन किया था. अदालत ने उत्तर प्रदेश प्रशासन के रवैये के साथ-साथ उन दो निजी अस्पतालों पर भी चिंता जताई थी, जिन्होंने बच्ची को भर्ती करने और इलाज देने से कथित तौर पर इनकार कर दिया था.
बच्ची के माता-पिता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि एसआईटी की रिपोर्ट अस्पतालों के रवैये की "गंभीर तस्वीर" पेश करती है. उन्होंने कहा कि यह अस्पतालों की स्पष्ट लापरवाही का मामला है.

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अमेरिका की एक संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित 40 करोड़ डॉलर के व्हाइट हाउस बॉलरूम के निर्माण पर रोक लगाने का आदेश दिया है.
यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और अब इस मामले के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने की संभावना है.
अदालत ने कहा कि व्हाइट हाउस में इतना बड़ा बॉलरूम बनाया जाए या नहीं, इसका फैसला कांग्रेस को करना है. अदालत के बहुमत ने कहा, "इतने बड़े बॉलरूम का निर्माण होना चाहिए या नहीं, यह कांग्रेस तय करेगी. कार्यपालिका अपने स्तर पर ऐसा फैसला नहीं ले सकती."
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कांग्रेस ने कार्यपालिका को व्हाइट हाउस(जनता का घर) को किसी राष्ट्रपति की व्यक्तिगत इच्छा के अनुसार बड़े पैमाने पर बदलने या पुनर्निर्माण करने का असीमित अधिकार नहीं दिया है.
इससे पहले एक संघीय न्यायाधीश ने दो बार बॉलरूम के ज़मीन के ऊपर होने वाले निर्माण पर रोक लगाई थी, हालांकि भूमिगत निर्माण कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई थी. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने अपीलीय अदालत का रुख़ किया था.
अपीलीय अदालत ने अपने आदेश को 14 दिनों के लिए स्थगित रखा है, ताकि ट्रंप प्रशासन चाहे तो इस फैसले को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सके.
व्हाइट हाउस ने इस फैसले पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि नए बॉलरूम की ज़रूरत राज्य प्रमुखों की मेजबानी, बड़े सरकारी समारोहों और आधिकारिक आयोजनों के लिए है.
उन्होंने यह भी दावा किया है कि यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. अप्रैल में व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के डिनर के दौरान हुई हत्या की कोशिश के बाद ट्रंप ने इस बॉलरूम की आवश्यकता पर फिर जोर दिया था.

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जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच शुक्रवार को राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल और अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत शुरू हो गई.
यह बातचीत रांची के स्टेट गेस्ट हाउस में चल रही है. इस वार्ता के लिए सुदिव्य सोनू समेत चार मंत्री पहुंचे हैं, वही छात्रों की तरफ से 10 छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचा है.
अभ्यर्थी जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोपों की जांच को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच वार्ता जारी है और इधर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र बड़ी बेसब्री से बातचीत के नतीजों का इंतजार कर रहे है.

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस स्वतंत्रता दिवस पर देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बात करने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अपने संबोधन में शिक्षा, बेरोज़गारी और बढ़ती महंगाई जैसे विषयों पर सरकार का पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.
दीपके ने अपनी पोस्ट में लिखा, "इस स्वतंत्रता दिवस पर हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री भारत के युवाओं को संबोधित करें. हम प्रधानमंत्री से अनुरोध करते हैं कि वे बताएं कि शिक्षा, बेरोज़गारी और महंगाई के मुद्दों पर सरकार क्या कर रही है."
उन्होंने लोगों से इस मांग के समर्थन में एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर करने की भी अपील की.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से पूछा कि राजधानी के जंतर-मंतर इलाके को विरोध प्रदर्शन के लिए तय स्थल के रूप में बंद करने पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा है.
कोर्ट ने कहा कि शहर को बार-बार होने वाले प्रदर्शनों के कारण अनावश्यक रूप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए.
हाईकोर्ट के इस टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने इस पर प्रतिक्रिया दी.
सौरव दास ने एक्स पर लिखा, "हमारे जंतर-मंतर से दूर रहिए."
उन्होंने लिखा, "हमारा विरोध-स्थल छीनने की कोशिश करने से पहले, हमें बताएं कि क्या आप इंडिया गेट को उस जगह के तौर पर तय करेंगे जहां हम शांतिपूर्ण विरोध करने के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कर सकें. आपने इंडिया गेट छीन लिया. हम अपना जंतर-मंतर भी छीने जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे."
बार एंड बेंच के मुताबिक, जस्टिस अमित महाजन ने सुनवाई के दौरान कहा, "आप इसे बंद क्यों नहीं कर देते? मेरे हिसाब से इस तरह की चीजें शहर के अंदर नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह सरकार का फैसला है. शहर को अनावश्यक रूप से बंधक क्यों बनाया जाए?"
हाईकोर्ट यह टिप्पणी ऑल इंडिया दलित क्रिश्चियन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कर रहा था. याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने के आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने अभी तक न तो प्रदर्शन की अनुमति दी है और न ही आवेदन खारिज किया है. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में अधिकतम 75 लोग शामिल होंगे और दिल्ली पुलिस जुलाई से उनके आवेदन पर कोई निर्णय नहीं ले रही है.
जस्टिस महाजन ने कहा, "मेरे अनुसार इसे बंद कर देना चाहिए. यह दिल्ली के अंदर नहीं होना चाहिए."
इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी इसी मुद्दे पर विचार किया जा रहा है और शीर्ष अदालत यह तय कर रही है कि क्या जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए नामित स्थल के रूप में रखा जा सकता है.

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और अभिनेता सी जोसेफ विजय की पत्नी संगीता ने शुक्रवार को तलाक़ की याचिका वापस ले ली.
इसके साथ ही चेंगलपट्टू फ़ैमिली कोर्ट में चल रही तलाक़ की क़ानूनी प्रक्रिया ख़त्म हो गई और अदालत ने मामले को बंद कर दिया.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, संगीता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट की सुनवाई में शामिल हुईं और उन्होंने जज सुजाता को बताया कि वह अपनी तलाक़ याचिका वापस लेना चाहती हैं.
जज ने करीब 15 मिनट तक उनसे सवाल-जवाब किए, जिसके बाद याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी गई और तलाक़ की कार्यवाही समाप्त कर दी गई.
संगीता ने फ़रवरी 2026 में चेंगलपट्टू फ़ैमिली कोर्ट में तलाक़ की याचिका दाखिल की थी.
याचिका में उन्होंने विजय पर वैवाहिक विश्वास तोड़ने का आरोप लगाया था.

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बहराइच ज़िले में एक बार फिर तेंदुए का आतंक देखने को मिला है. ज़िले के कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में एक तेंदुए ने घर में घुसकर एक महिला पर हमला कर दिया.
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के डीएफ़ओ अपूर्व दीक्षित ने बताया, "यह घटना गुरुवार और शुक्रवार की आधी रात को सुजौली रेंज के धनिया बेली गांव में हुई. यहां जय प्रकाश की 26 वर्षीय पत्नी लाली देवी अपने घर में अपनी मासूम बेटी के साथ सो रही थीं."
"इसी दौरान एक तेंदुआ घर में घुस आया और उसने लाली देवी पर अचानक हमला कर दिया. तेंदुए के हमले के बाद महिला ने अपनी और अपनी बेटी की जान बचाने के लिए करीब पांच मिनट तक उसका सामना किया. शोर सुनकर परिवार के अन्य सदस्य जाग गए और उन्होंने चिल्लाकर तेंदुए को भगाने की कोशिश की. इसके बाद तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया."
हमले में घायल लाली देवी को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया.
वन अधिकारी अनिल पटेल ने घायल महिला के परिवार को तीन हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी.

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डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि इलाक़े में तेंदुए की तलाश के लिए अभियान तेज़ कर दिया गया है. साथ ही ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है और लोगों को सलाह दी गई है कि वे शाम के समय अकेले बाहर न निकलें.
जंगली जानवर के हमले से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
मई में भी मां ने तेंदुए से लड़कर बचाई थी बच्चे की जान
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में इसी साल 20-21 मई को भी तेंदुए के हमले की ऐसी ही घटना सामने आई थी. उस समय एक मां ने अपने छह साल के बच्चे को बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ गईं थी.
यह घटना कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी की कतर्नियाघाट रेंज के तेलियनपुरवा गांव में हुई थी.
उस समय मीना देवी अपने बेटे मोहित के साथ सड़क किनारे बैठी थीं. तभी पास के घने गन्ने के खेत से अचानक एक तेंदुआ बाहर निकला और बच्चे पर हमला कर दिया.
मीना देवी ने तुरंत तेंदुए का सामना किया और अपने बेटे को बचाने के लिए उससे भिड़ गईं.
इस घटना में मीना देवी को कई जगह चोटें आई थीं, जबकि उनके बेटे मोहित को मामूली चोट लगी थी.

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भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में स्थित भारत के सभी दूतावास इस मुद्दे पर लगातार सक्रिय हैं.
उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास, शिपिंग मंत्रालय, समुद्री प्राधिकरणों और संबंधित स्थानीय एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके.
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय मिशनों ने 24x7 हेल्पलाइन भी संचालित कर रखी हैं. इन हेल्पलाइनों के जरिए न सिर्फ नाविक, बल्कि ज़रूरतमंद अन्य भारतीय नागरिक भी सहायता प्राप्त कर सकते हैं.
उन्होंने कहा कि ये हेल्पलाइन पिछले कई महीनों से लगातार संचालित हो रही हैं और आगे भी उपलब्ध रहेंगी.

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यूपीआई भुगतान पर शुल्क यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान पर पलटवार किया है.
उन्होंने वित्त मंत्री के तर्कों को "पांच संदिग्ध दावों" पर आधारित बताते हुए कहा कि सरकार ज़ीरो-एमडीआर की वैधानिक सुरक्षा को खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है.
दरअसल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि एमडीआर केवल व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं.
उन्होंने यह भी कहा था कि यूपीआई एवं सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी को अभी एमडीआर पर फैसला लेना है और इस विषय पर संसद में रचनात्मक चर्चा हो सकती थी.
जयराम रमेश ने कहा कि वित्त मंत्री का यह दावा भ्रामक है कि एमडीआर सिर्फ व्यापारियों पर लागू होगा, ग्राहकों पर नहीं. उनका तर्क है कि व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में जोड़कर अंततः उपभोक्ताओं पर डाल सकते हैं.
उन्होंने कहा कि इसका असर छोटे व्यापारियों, किराना दुकानों और रेहड़ी-पटरी वालों पर भी पड़ेगा, जो यूपीआई के सबसे बड़े उपयोगकर्ताओं में शामिल हैं.
कांग्रेस नेता ने सरकार के इस तर्क पर भी सवाल उठाया कि एमडीआर से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सुरक्षा में निवेश करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने कहा कि यूपीआई एक सार्वजनिक डिजिटल व्यवस्था है और इसकी सुरक्षा व संचालन की ज़िम्मेदारी सरकार की है.
उनके मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बिना व्यापारियों या ग्राहकों पर शुल्क डाले भी इस व्यवस्था को समर्थन देने में सक्षम है.
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार का यह कहना कि एमडीआर पर अंतिम फैसला अभी होना बाकी है, पर्याप्त नहीं है.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए के तहत ज़ीरो-एमडीआर की वैधानिक गारंटी को समाप्त कर देता है और भविष्य में शुल्क लगाने का अधिकार सरकार के नोटिफिकेशन पर छोड़ देता है.
उन्होंने संशोधन के समय पर भी सवाल उठाए.
संसद में इस मुद्दे पर चर्चा न होने के सवाल पर जयराम रमेश ने सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष की मांगों पर चर्चा से परहेज किया और जवाबदेही से बचते हुए विधेयक को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित करा लिया.


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अमेरिका के न्यू मेक्सिको में एक जज ने गुरुवार को मेटा को 56.7 करोड़ डॉलर का अतिरिक्त ज़ुर्माना भरने का आदेश दिया.
अदालत ने माना कि कंपनी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बच्चों को होने वाले संभावित ख़तरों के बारे में लोगों को पर्याप्त चेतावनी नहीं दी.
बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले में मेटा के ख़िलाफ़ यह अब तक का सबसे बड़ा फ़ैसला है.
जज ब्रायन बीडशाइड ने कहा कि मेटा एक "सार्वजनिक उपद्रव" की तरह है, जिसकी तुलना वायु प्रदूषण से की जा सकती है.
उन्होंने निर्देश दिया कि यह राशि एक ऐसे फंड में जमा कराई जाए, जिसका इस्तेमाल भविष्य में बच्चों को होने वाले नुक़सान को कम करने के लिए किया जाएगा.
यह आदेश पहले लगाए गए 37.5 करोड़ डॉलर के ज़ुर्माने के अतिरिक्त है. इस मामले में अब मेटा को कुल अब तक 94.2 करोड़ डॉलर का भुगतान करने को कहा गया है.
जज ने अपने फ़ैसले में मेटा की तुलना एक फैक्ट्री से की. उन्होंने कहा कि कंपनी का उत्पाद "विज्ञापन और सोशल मीडिया कंटेंट" है, जबकि बच्चों को होने वाला मानसिक नुक़सान और उनका यौन शोषण उस प्रदूषण की तरह है, जिसे रोकना जरूरी है.
इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक, वाट्सऐप और थ्रेड्स का संचालन करने वाली कंपनी मेटा के प्रवक्ता ने कहा, "हम इस फ़ैसले से सहमत नहीं हैं और इसके ख़िलाफ़ अपील करेंगे."
प्रवक्ता ने कहा, "हम अपने प्लेटफॉर्म पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम करते हैं. ग़लत इरादे वाले लोगों और नुक़सान पहुंचाने वाले कंटेंट की पहचान कर उन्हें हटाने में आने वाली चुनौतियों के बारे में भी हम पारदर्शी रहे हैं."

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार छात्रों से बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है और इसके लिए पहले ही संवाद का एक माध्यम तय किया जा चुका है.
उन्होंने कहा कि सरकार हर छात्र की समस्याओं को समझना चाहती है और उसी के आधार पर आगे का रास्ता तय करेगी.
मुख्यमंत्री ने कहा, "हम पहले ही संवाद का एक माध्यम तय कर चुके हैं. हम बातचीत के लिए तैयार हैं. सरकार हर छात्र की समस्या को समझने की इच्छुक है."
उन्होंने कहा कि सरकार अब छात्रों की मांगों और सुझावों को सिर्फ रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम तक सीमित नहीं रखना चाहती.
मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकार सभी ज़िलों के छात्रों की राय और सुझाव जुटाएगी, ताकि किसी भी फैसले में हर क्षेत्र के युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके. इससे समाधान ज्यादा व्यापक और सभी के हित में होगा."
हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार जल्द ही झारखंड और देशभर के छात्रों, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं से सुझाव एकत्र करेगी. इन सुझावों के आधार पर तय समय सीमा के भीतर ज़रूरी सुधार और सकारात्मक बदलाव की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे.
रांची में हुए छात्र प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब छात्र विभिन्न मांगों को लेकर सरकार से संवाद और समाधान की मांग कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि वह छात्रों की बात सुनकर आगे की रणनीति तय करेगी.

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झारखंड विधानसभा की ओर छात्रों के मार्च के दौरान आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेता नेहा बोरा पर स्याही फेंकने का मामला सामने आया.
इस घटना के बाद नेहा बोरा ने बीजेपी और आरएसएस पर आरोप लगाए.
नेहा बोरा ने कहा, "जो बीजेपी और आरएसएस के लोग छात्रों के साथ होने का दावा करते हैं, वही छात्र मार्च के दौरान मुझ पर स्याही फेंक रहे हैं. छात्र जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे."
उन्होंने कहा, "क्या उन्हें लगता है कि स्याही फेंकने से छात्रों और युवाओं का गुस्सा दब जाएगा? हम खुली चुनौती देते हैं कि अगर उभरता हुआ छात्र आंदोलन उनकी नफ़रत की राजनीति की नींव नहीं हिला पाया, तो यह छात्र राजनीति के लिए शर्म की बात होगी."
आइसा नेता ने आरोप लगाया कि जिन लोगों का छात्रों के मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है, वे अपने राजनीतिक हितों के लिए छात्रों के मुद्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
नेहा बोरा पर स्याही फेंकने वाले शख्स को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ 14 दिनों से स्टूडेंट्स का विरोध प्रदर्शन चल रहा है.
स्टूडेंट्स का आरोप है कि जेपीएससी के पेपर लीक किए गए, सीटें बेची गई हैं और उन्हें सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है, मामले की जांच ईडी या सीबीआई को सौंपी जाए.
रांची में दो छात्र संगठनों ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा तक मार्च निकालने की घोषणा की थी. झारखंड में फ़िलहाल विधानसभा का सत्र चल रहा है.

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जेन ज़ी को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी है.
अभिजीत दीपके ने कहा, "मैं चाहता हूं कि बीजेपी वाले एक बार मोहन भागवत की सुनें. क्योंकि मोहन भागवत बीजेपी के मेंटर हैं. आरएसेस बीजेपी की गॉडफ़ादर है. बीजेपी ने आरएसएस और मोहन भागवत को सुनना बंद कर दिया है."
"मोहन भागवत जी कहते हैं इनको (जेन ज़ी) एंटी नेशनल मत कहिए. बीजेपी के नेता हमें वायरस कहते हैं. नितिन नबीन कहते हैं कि ये कॉकरोच वायरस है. धर्मेंद्र प्रधान हमें आतंकवादियों की बी टीम कहते थे."
अभिजीत दीपके ने कहा, "मुझे लग रहा है कि बीजेपी वाले आरएसएस से अलग जाकर बोल रहे हैं. मुझे लगता है कि लोकतंत्र में सरकार को जनता का डर होना चाहिए."
उन्होंने कहा, "हमारे प्रधानमंत्री हर साल स्वतंत्रता दिवस पर लाल क़िले से भाषण करते हैं, मैं चाहता हूं कि इस बार का उनका भाषण देश के युवाओं के लिए हो, देश के जेन ज़ी के लिए. प्रधानमंत्री बताएं कि बेरोज़गारी पर उन्होंने क्या किया है और वो बेरोज़गारी को कैसे कम करेंगे."
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को जेन ज़ी से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल हुए.
वहां पर उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि हाल में हुए जेन-ज़ी प्रदर्शन में जो शिकायतें थीं, वो जायज़ हैं.
अभी तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब बीबीसी संवाददाता अरशद मिसाल रात दस बजे तक आप तक ताज़ा ख़बरें पहुंचाएंगे.
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- मोहम्मद यूनुस की सरकार में बांग्लादेश के 'विदेश मंत्री' रहे तौहीद हुसैन ने भारत को लेकर किए कई दावे

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झारखंड की राजधानी रांची में भूख हड़ताल पर बैठे एक शख़्स की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से सदर अस्पताल में शिफ़्ट किया गया है.
मौक़े पर मौजूद डॉक्टर दिव्यांशु ने कहा, "उनका ब्लड प्रेशर काफ़ी बढ़ गया है, जिसकी वजह से उसे तेज सिरदर्द हो रहा है. उन्हें बुखार की भी शिकायत है, इसलिए तुरंत सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया है. बाक़ी लोगों की स्थिति सामान्य है. उनके वाइटल्स और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जांच की गई है और सभी रिपोर्ट सामान्य हैं."
झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) और अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ 14 दिनों से स्टूडेंट्स का विरोध प्रदर्शन चल रहा है.
स्टूडेंट्स का आरोप है कि जेपीएससी के पेपर लीक किए गए, सीटें बेची गई हैं और उन्हें सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है, मामले की जांच ईडी या सीबीआई को सौंपी जाए.
इन्हीं मांगों को लेकर 25 जुलाई से रांची में छात्रों का प्रदर्शन चल रहा है.
इस दौरान छह प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर हैं.
रांची में दो छात्र संगठनों ने घोषणा की है कि वे शुक्रवार को राज्य विधानसभा तक मार्च निकालेंगे. झारखंड में फ़िलहाल विधानसभा का सत्र चल रहा है.

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बीसीसीआई ने बताया है कि गुरुवार को अभ्यास के दौरान कप्तान शुभमन गिल के दाएं हाथ की रिंग फ़िंगर में चोट लग गई.
बीसीसीआई ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया, “शुभमन गिल एहतियात के तौर पर श्रीलंका-11 के ख़िलाफ़ अभ्यास मैच के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरेंगे. बीसीसीआई की मेडिकल टीम उनकी प्रगति पर नज़र रख रही है.”
गिल की ग़ैर-मौजूदगी में केएल राहुल टीम की कमान संभालेंगे.
भारत और श्रीलंका-11 के बीच कोलंबो में तीन दिवसीय वार्म अप मैच खेला जा रहा है. इस मैच में श्रीलंका-11 ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फ़ैसला किया है.
श्रीलंका के ख़िलाफ़ भारत की पुरुष क्रिकेट टीम दो टेस्ट मैचों की एक सिरीज़ खेलने वाली है. इस सिरीज़ का पहला मैच 15 अगस्त से खेला जाएगा, जबकि दूसरा टेस्ट मैच 23 अगस्त से शुरू होगा.

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आज़ाद समाज पार्टी के संस्थापक और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा है कि 'जिन लोगों का उत्थान हो चुका है, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं लेना चाहिए' यह बात आरएसएस प्रमुख को हमें या देश को कहने के बजाय अपनी सरकार को कहना चाहिए.
उन्होंने कहा, "आरएसएस प्रमुख सरकार को कहें कि जल्दी जातीय जनगणना करवाए और उसके आंकड़े सार्वजनिक कर दे ताकि लोगों को पता चल सके किनका उत्थान हो चुका है, कौन मज़बूत हो चुका है, कौन-सा समाज आगे बढ़ गया है, किसकी हिस्सेदारी पूरी हो गई है."
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि नौजवानों को लेकर आरएसएस के मन में विरोध है. नौजवान उन्हें साल 2014 में कंधे पर बैठाकर लाए थे और इस बार उन्हें प्रदेशों और देश से, हर जगह से छोड़कर आएगा."
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को जेन ज़ी से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल हुए. वहां पर उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि हाल में हुए जेन-ज़ी प्रदर्शन में जो शिकायतें थीं, वो जायज़ हैं.
इसी कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा, "सामाजिक कारणों से आरक्षण है. जब तक सामाजिक भेदभाव है, आरक्षण चलेगा. जिनको मिल गया और जिनका ठीक हो गया, उन्हें बड़ा दिल दिखाकर दे देना चाहिए. और अगर ठीक से होता है तो वहां ऐसे स्वर भी उठ रहे हैं, ऐसे थोड़े कम स्वर हैं लेकिन उठ रहे हैं कि अब हमारा हो गया तो दूसरे को दे दो."

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चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा, "प्रधानमंत्री जी को 'हैंडलूम दिवस' याद है, जबकि आज ही के दिन यानी 7 अगस्त 1990 को तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने मंडल कमीशन की सिफ़ारिशों को लागू करने की बात कही थी. कमीशन की 40 में से 2 सिफ़ारिशें लागू हुई हैं. मुझे अच्छा लगता कि प्रधानमंत्री जी लोगों को 'मंडल दिवस' की भी बधाई देते."
हर साल 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा (हथकरघा) दिवस मनाया जाता है. गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर हैंडलूम दिवस को लेकर संदेश दिया था.