भारत के दो मेडल पर चीनी मीडिया हैरान, परेशान

    • Author, जेफ़ ली और तूलिका भटनागर
    • पदनाम, बीबीसी मॉनीटरिंग
  • प्रकाशित

रियो ओलंपिक में चीन के खिलाड़ियों ने 70 और भारतीय खिलाड़ियों ने केवल दो मेडल जीते.

चीन के अख़बारों में भारत के इस प्रदर्शन की खासी चर्चा है और चीनी मीडिया हैरान है कि भारतीयों को इससे कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा है.

चीन के अखबारों और न्यूज़ वेबसाइट्स पर भारत के प्रदर्शन पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं हैं.

कई अख़बारों ने तो भारत को हिदायत भी है कि वो चीन से सीख ले और यदि ज़रूरत हो तो हिचकिचाए बिना चीन से इस क्षेत्र में मदद ले.

चीन की लोकप्रिय वेबसाइट <link type="page"><caption> सिना</caption><url href="http://finance.sina.com.cn/stock/usstock/c/2016-08-23/doc-ifxvcsrm2254322.shtml" platform="highweb"/></link> ने लिखा, "सवा सौ करोड़ भारतीयों को 36 साल में बस एक गोल्ड मेडल मिला. लेकिन फिर भी भारतीयों को इससे कोई फर्क पड़ता नहीं दिखता."

कुछ अखबारों का कहना है कि भारत में 'खेल संस्कृति' ही नहीं है.

चाइना डेली ने भारतीय ओलंपिक संघ के प्रमुख नारायण रामाचंद्रन के हवाले से लिखा है कि भारत में यदि शिक्षा और खेल की तुलना की जाए तो खेल एक कदम पीछे ही रहा है.

अखबार ने <link type="page"><caption> रामाचंद्रन</caption><url href="http://www.chinadailyasia.com/opinion/2016-08/22/content_15482774.html" platform="highweb"/></link> के हवाले से लिखा है, "भारत के ज़्यादातर परिवार अपने बच्चों को डेंटिस्ट बना देंगे, अकाउंटेंट बना देंगे, पर ओलंपिक की तैयारी नहीं कराएंगे."

उनका आरोप है कि भारतीय एथलीटों को सरकार पूरा सहयोग नहीं देती. इसलिए कई अखबारों ने तो यहां तक सुझाव तक दे डाला कि भारत अपने खेलों के बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए चीन की मदद क्यों नहीं लेता.

चीन के सरकारी अखबार <link type="page"><caption> ग्लोबल टाइम्स</caption><url href="http://opinion.huanqiu.com/1152/2016-08/9324039.html" platform="highweb"/></link> का कहना है, "भारतीय समाज बच्चों के खेल-कूद को बढ़ावा नहीं देता. सरकार के पास प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए धन की कमी है."

यही नहीं, ग्लोबल टाइम्स के अंग्रेजी संस्करण के अनुसार भारत खेल के क्षेत्र में इसलिए आगे नहीं बढ़ पाता क्योंकि यहां राजनीति, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का प्रभाव अधिक है.

कुछ मिलते जुलते स्वर में हॉंन्ग कॉन्ग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने लिखा कि भारत का एकमात्र गोल्ड मेडल लाने वाले अभिनव बिन्द्रा को सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिली.

अखबार में पदक तालिका का जिक्र करते हुए चीन के 70 पदकों की तुलना भारत के दो पदकों से की गई है.

इस बीच कुछ चीनी सोशल मीडिया यूजर ने भारत की ओर सकारात्मक रुख दिखाया है. उन्होंने कहा है कि इससे बस ये जाहिर होता है कि भारत का फोकस दूसरी बातों पर है.

एक यूजर ने <link type="page"><caption> कमेंट</caption><url href="http://weibo.com/1887344341/E4QKT2bPr?refer_flag=1001030103_" platform="highweb"/></link> किया, "इससे ये साबित होता है कि भारत बेहद व्यावहारिक है. ये खेलों पर अपने पैसे बर्बाद नहीं करता."

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