कइयों से मोहब्बत करने से बढ़ेगी ईमानदारी!

पॉलीएमरी
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कहते हैं जोड़ियां ऊपर से बनती हैं. जोड़ियां यानी जीवन साथियों के जोड़े. मगर क्या ज़रूरी है कि प्यार सिर्फ़ एक से हो? ज़िंदगी सिर्फ़ एक के साथ बिताई जाए?

क़ुदरती नियम भी इसके ख़िलाफ़ है कि सिर्फ़ एक से रिश्ता हो. लेकिन कमोबेश हर देश में एक ही जीवनसाथी के साथ ज़िंदगी बिताने को अच्छा माना जाता है.

हालांकि हर समाज में आपको रिश्तों में छल देखने को मिलेगा. लोग एक साथी से संतुष्ट नहीं होते. होते भी हैं तो नए तजुर्बे की नीयत से दूसरा साथी तलाश लेते हैं.

बेवफ़ाई, अफ़ेयर आम है. तो, ऐसा क्यों न हो कि एक साथ कई लोगों से मुहब्बत का रिश्ता रखा जाए. इससे कम से कम रिश्तों में ईमानदारी तो रहेगी.

ब्रिटेन के रहने वाले फ्रैंकलिन व्यू ऐसे ही शख़्स हैं. वो बताते हैं कि बचपन में उनकी स्कूल टीचर एक राजकुमारी का क़िस्सा सुनाती थीं, जिसके दो प्रेमी थे और उसे दोनों में से एक को चुनना था.

तभी फ्रैंकलिन सोचते थे कि राजकुमारी को आख़िर एक को ही क्यों चुनना है? वो दोनों के साथ राज़ी-ख़ुशी क्यों नहीं रह लेती.

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शायद ये फ्रैंकलिन के किरदार का शुरुआती संकेत था. वो अपनी ज़िंदगी में कभी भी एक वक़्त में एक साथी के साथ नहीं रहे.

अपनी पहली डेट पर वो दो लड़कियों को एक साथ लेकर गए थे. पहली बार जब उन्होंने सेक्स किया तो तीन साथी थे.

आज वो अपनी गर्लफ्रैंड के साथ रहते हैं, जो अपने दूसरे ब्वॉयफ्रैंड के साथ रहती है. कभी कभार उसकी बेटी भी आ जाती है साथ रहने के लिए.

यही नहीं, फ्रैंकलिन इस वक़्त चार लंबी दूरी के प्रेम संबंध भी निभा रहे हैं. उन सबसे वो वक़्त और ज़रूरत के मुताबिक़ मिलते रहते हैं.

वो सबके प्रति ईमानदार हैं. सबको अपनी दूसरी मोहब्बतों के बारे में बता चुके हैं.

एक साथ कई मोहब्बतें करने वाले फ्रैंकलिन और उनकी गर्लफ्रैंड, इकलौते जोड़े नहीं. बहुत से ऐसे लोग हैं, दुनिया में. हालांकि ये बात खुलकर मानने वालों की तादाद कम है.

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लेकिन जब से दुनिया भर में समलैंगिकों को सामाजिक और क़ानूनी मान्यता मिलने लगी है, कई मोहब्बतें करने वाले लोग भी अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाने लगे हैं.

समाज में ऐसे लोगों को अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता. आम तौर पर ये कहा जाता है कि आपको किसी के साथ प्यार हुआ तो उससे शादी रचाइये और फिर उसके साथ ही पूरी ज़िंदगी बिताइये.

हालांकि क़ुदरती तौर पर ऐसा चलन नहीं है. चाहे दूसरे जानवर हों या फिर इंसान के भाई-बिरादर, जैसे चिंपांजी या बोनोबो, सबके बीच पॉलीगैमी या कई साथियों के साथ ज़िंदगी बिताने का चलन है.

ख़ुद आदि मानव भी पहले एक साथ कई साथी रखता था. लेकिन, जैसे-जैसे समाज का चलन बढ़ा, लोग एक जीवनसाथी के साथ ज़िंदगी बिताने को तरजीह देने लगे.

इसकी वजह साफ़ थी. इससे उनके ऊपर ख़र्च का बोझ कम रहता था और आने वाली पीढ़ी के बीच संपत्ति, जैसे ज़मीन का बंटवारा आसान हो जाता था.

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लेकिन, आम मान्यता के उलट, दुनिया भर में 83 फ़ीसद समाजों में बहुविवाह या कई लोगों से संबंध की इजाज़त है.

पिछले दो दशक में एक साथ कई लोगों से प्यार करने के चलन पर लोगों का ध्यान गया है. अंग्रेज़ी में इसके लिए शब्द गढ़ा गया है, 'पॉलीएमरी'.

जिसका मतलब है कई लोगों से प्यार करना. लैटिन भाषा से लिया गया ये शब्द ज़ाहिर करता है कि आप एक ही वक़्त में कई लोगों से मोहब्बत करते हैं. हालांकि ऐसे रिश्तों के भी कई रंग होते हैं.

ये कहें कि कई लोगों से एक साथ रिश्ते रखने के भी कई तरीक़े होते हैं, तो ग़लत नहीं होगा.

अब फ्रैंकलिन को ही लीजिए. वो अपनी गर्लफ्रैंड के साथ लिव इन में रह रहे हैं. साथ ही चार दूसरी औरतों से भी रिश्ते निभा रहे हैं.

एक साथ कई रिश्ते निभाना बहुत चुनौती भरा काम है. कई लोगों से बात करनी होती है.एक दूसरे के बारे में बेहतर समझ कायम करनी पड़ती है.

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फ्रैंकलिन की एक दूर रहने वाली साथी ईव रिकर्ट कहती हैं कि ऐसे रिश्ते बेहद चुनौती भरे होते हैं.

अमरीका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के टेरी कॉनले ने इस बारे में काफ़ी रिसर्च किया है.

वो कहती हैं कि समाज में 'पॉलीएमरी' को लेकर बहुत बुरी राय है. यहां तक कि टेरी को इस बारे में अपनी क़िताब छपवाने में भी अच्छी ख़ासी मशक़्क़त करनी पड़ी.

वैसे 'पॉलीएमरी' के कई फ़ायदे हैं. टेरी ने अपने तजुर्बे में पाया है कि कई लोगों से रिश्ते रखने वाले लोग, दोस्ती को अच्छे से निभाते हैं. उनके ज़्यादा दोस्त होते हैं.

वो प्रेम संबंध टूटने के बाद भी अपने पूर्व साथियों से दोस्ती का रिश्ता क़ायम रखते हैं.

उनके मुक़ाबले मोनोगैमी या एक साथी के साथ जीवन बिताने वाले, लोग प्रेम संबंध टूटने के बाद पूरी तरह से दूरी बना लेते हैं.

कई लोगों से मोहब्बत होने के बावजूद इनके अंदर जलन की भावना कम होती है. अपने रिश्तों से इन्हें ज़्यादा तसल्ली रहती है.

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टेरी कहती हैं कि जो लोग एक जीवनसाथी के साथ ज़िंदगी बसर करते हैं, वो इन 'पॉलीएमरी' लोगों से काफ़ी कुछ सीख सकते हैं. इससे उनकी ज़िंदगी आसान हो जाएगी.

हालांकि समाज में एक वक़्त में कई मोहब्बतें करने वालों को अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता.

आम तौर पर माना जाता है कि वो ज़्यादा सेक्स संबंधों के लिए ऐसा करते हैं.

हालांकि हमेशा सेक्स के लिए ही 'पॉलीएमरी' हो, ऐसा ज़रूरी नहीं. इसके लिए कई लोगों से प्यार करना ज़रूरी नहीं.

ये तो एक-दूसरे के प्रति ईमानदारी का नमूना है कि लोग, तमाम रिश्तों के प्रति खुलापन रखते हैं.

ये भी माना जाता है कि कई लोगों से रिश्ते रखने वालों के बच्चे भी ख़राब परवरिश के शिकार होते हैं.

उनका बचपन भी ग़लत संगत में गुज़रता है. लेकिन ये ख़्याल भी ठीक नहीं. ऑस्ट्रेलिया की मारिया पलोटा-शियारोली ने इस बारे में रिसर्च की तो इसके उल्टे नतीजे सामने आए.

उन्होंने पाया कि 'पॉलीएमरी' रिश्तों में रहने वालों के बच्चों को परवरिश का बेहतर माहौल मिला.

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उनकी देखभाल के लिए कई लोग थे. उनके साथ वक़्त बिताने के लिए, उनसे बातें करने के लिए, सीख देने के लिए कई लोग थे. ऐसे में उनका बचपन काफ़ी अच्छा बीता.

उन्होंने अच्छी आदतें सीखीं. साथ ही अलग-अलग तरह के लोगों से तालमेल की आदत भी उनमें अच्छे से आ गई.

हालांकि कई लोगों से प्यार करने वालों की ज़िंदगी इतनी आसान भी नहीं होती, एक साथ कई रिश्ते निभाने की चुनौती, उनका अच्छा ख़ासा वक़्त ले लेती है.

ऐसे संबंधो को मान्यता देने की मांग उठ रही है, जिसमें एक साथ कई लोगों के साथ शादी को क़ानूनी जामा पहनाया जा सके.

समलैंगिक रिश्तों को मान्यता मिलने के बाद ये मांग ज़ोर पकड़ रही है.

'पॉलीएमरी' रिश्ते निभाने वाले 76 फ़ीसद लोगों की राय है कि मौक़ा मिलने पर वो अपने तमाम साथियों के साथ शादी के रिश्ते में बंधना चाहेंगे.

हालांकि बहुविवाह को क़ानूनी जामा पहनाना आसान काम नहीं. बच्चों की परवरिश की ज़िम्मेदारी से लेकर संपत्ति के बंटवारे तक, कई पेचीदगियां इसमें हैं.

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पहली शर्त तो ये कि समलैंगिकता कि तरह इसे भी एक तरह की यौन आदत माना जाए.

इससे 'पॉलीएमरी' रिश्ते रखने वालों की अलग पहचान बनेगी. बहुविवाह की वक़ालत करने वाले मानते हैं कि ये आदत उनमें क़ुदरती तौर पर है.

ये उनका चुना हुआ विकल्प नहीं. वो कहते हैं कि अपने साथी से बेवफ़ाई करने से अच्छा है कि अपने तमाम रिश्तों को शीशे की तरह साफ़ रखा जाए.

कम से कम साथी से बेवफ़ाई का आरोप तो नहीं लगेगा.

वैसे भी इंसान, एक वक़्त के बाद एक रिश्ते से उकता जाता है. दूसरे साथी की तलाश करने लगता है. तलाक़ के बढ़ते मामले इस बात के सबूत हैं.

तो बेहतर यही है कि तमाम मोहब्बतों के बारे में ईमानदारी बरती जाए.

वैसे इंसानी रिश्तों के इतने पहलू हैं, इनमें इतनी तहे हैं कि कोई एक पैमाना तय नहीं किया जा सकता. हर इंसान के लिए मुहब्बत के मानी अलग होते हैं.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20160623-polyamorous-relationships-may-be-the-future-of-love" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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