बलोच छात्रों की नेता- 'मेरी बारी कभी भी आ सकती है'

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पाकिस्तान में बलूचिस्तान छात्र संगठन (बीएसओ) की प्रमुख करीमा बलोच का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी ने बलूचिस्तान की लड़ाई को ताक़त दी है.

करीमा बलोच से बीबीसी संवादाता हारून रशीद ने बलूचिस्तान में चल रहे आंदोलन पर बात की.

करीमा बलूच का कहना है कि उनके नेता ज़ाहिद बलोच का मार्च 2014 में अपहरण कर लिया गया था और तब से वो ही इस आंदोलन को संभाल रही हैं.

बीएसओ पर कई तरह के आपराधिक मामले दर्ज़ हैं. इस संगठन के रैलियां करने पर एफ़आईआर दर्ज हुए हैं और साथ ही इस पर सुरक्षा बलों की बंदूकें छीनने का भी आरोप है.

करीमा कहती हैं, "ये बेबुनियाद आरोप हैं, हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण होता है. बीएसओ का मक़सद बलूचिस्तान की आज़ादी है. इसलिए हमें सरकार की तरफ से निशाना बनाया जा रहा है."

उनका कहना है कि उनके कई नेताओं और सेन्ट्रेल कमेटी के सदस्यों का अपहरण किया गया है. चेयरमैन ज़ाकिर मज़ीद 2009 से ही लापता हैं."

करीमा बलोच कहती हैं, "मुझे इस आंदोलन का नेतृत्व करने का गर्व है. जब से हमें मारा जा रहा है, हम छुपकर काम करते हैं. हम सरकार से भी कोई शिकायत नहीं करते हैं क्योंकि इसका फ़ायदा कोई नहीं."

"लेकिन किसी छात्र संगठन पर इतनी पाबंदियां नहीं होनी चाहिए. हम दुनिया से मांग करते हैं ये पाबंदियां हटाने के लिए वो पाकिस्तान सरकार पर दबाव डाले".

बलूचिस्तान में अलगाववादियों की ग़ुमशुदगी और कई लोगों की मौत एक बड़ा मुद्दा है. इसके ख़िलाफ़ महिलाओं ने कई बार आंदोलन किया है.

इस पर करीमा बलोच कहती हैं, "हमारे समाज में आंदोलन करने वाली महिलाओं का बड़ा सम्मान है. इन्हीं की वजह से दुनिया को लापता लोगों के बारे में पता चला है."

वो कहती हैं कि इससे दुनिया को पता चला है कि पाकिस्तान में सियासी आवाज़ उठाने वालों का क्या अंजाम होता है.

वो आरोप लगाती हैं, "यहां कथित अपराधियों को अदालत में पेश करने की जगह मारकर फेंक दिया जाता है. इसने मानवाधिकार संगठनों को झकझोर कर रख दिया है."

उनके मुताबिक़, "इस घटना से बलोच समाज संगठित हो रहा है. यहां ऐसा कोई नहीं है जो मारे गए लोगों के नक्शेक़दम पर नहीं चलना चाहता है. हमारा मक़सद एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक बलूचिस्तान हासिल करना है. उसमें महिलाओं की भी शासन में भागीदारी होगी."

बलूचिस्तान के तनाव भरे माहौल पर करीमा कहती हैं, "मेरे सामने ही चेयरमैन को उठाकर ले गए थे. मुझे भी हर वक़्त डर लगा रहता है कि कभी भी मेरी बारी आ सकती है."

"वो लोग हमारे पढ़े-लिखे लोगों को ख़त्म करना चाहते हैं. इससे बीएसओ और उसकी किताबों-आर्टिकल की मदद से चल रहे आंदोलन को ख़त्म किया जा सकता है."

करीमा के मुताबिक़ उनके घर पर कई बार हमला हुआ है. कई बार घंटों तक तलाशी हुई है और सुरक्षा बलों ने मारने की भी धमकी दी है.

करीमा बलोच का कहना है कि बलूचिस्तान में ऐसा कई लोगों के साथ हो रहा है.

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