बॉंबशेल बैंडित को मिली 66 महीनों की कैद

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बॉंबशेल बैंडित कहलाई जानेवाली कैलिफ़ोर्निया में रहने वाली एक भारतीय मूल की महिला संदीप कौर को एक अमरीकी अदालत ने चार बैंक डकैतियों के आरोप में 66 महीनों की क़ैद की सज़ा सुनाई है.

अदालती दस्तावेज़ों के अनुसार चौबीस साल की संदीप कौर ने पिछले साल आठ हफ़्तों के अंदर चार बैंकों में कैशियर को बम विस्फोट करने की धमकी देकर लगभग 44,000 डॉलर (लगभग 27 लाख रूपए) लूट लिए.

अमरीकी जांच एजेंसी एफ़बीआई ने उनका नाम बॉंबशेल बैंडित (Bombshell Bandit) रखा हुआ था.

उनके वकील जे विनवर्ड ने बीबीसी को बताया कि संदीप कौर भारत और अमरीका की संस्कृति में तालमेल नहीं बिठा पाईं और ये सब उसीका परिणाम है.

'तनाव का शिकार'

वकील का कहना है संदीप तनाव का शिकार हुई हैं.
इमेज कैप्शन, वकील का कहना है संदीप तनाव का शिकार हुई हैं.

वकील का कहना है कि अमरीका पर ग्यारह सितंबर के हमले के बाद सिखों को अरब या मुसलमान समझकर उनपर कई हमले हुए और ताने कसे गए.

वो कहते हैं, "संदीप कौर उस तनाव का शिकार बनीं. उनपर ताने कसे जाते थे और उन्हें आतंकवादी कहा जाता था."

वकील ने बताया कि संदीप कौर और उनके एक भाई को उनके माता-पिता ने उस दौरान दो साल के लिए भारत भेज दिया था.

लौटकर उन्होंने 16 साल की उम्र में हाई-सकूल या बारहवीं की पढ़ाई खत्म की और फिर कॉलेज में दाखिला लिया जहां उन्होंने नर्सिंग की ट्रेनिंग हासिल की.

वकील के अनुसार 2008 में उन्होंने शेयर बाज़ार में पैसा लगाया और दो साल में अच्छे पैसे भी कमाए.

वकील का कहना है, "इन पैसों ने उन्हें अमरीका की आज़ाद ज़िंदगी जीने का मौका दिया और उन्हें 2011 में लास वेगस के जुआघरों की आदत लग गई. वहीं उनकी मुलाक़ात के भारतीय मूल के नौजवान से हुई और उन्होंने उससे शादी कर ली."

डकैती

वकील के अनुसार संदीप कौर ने जुए में काफ़ी पैसा गंवाया और कुछ ख़तरनाक क़िस्म के लोगों से पैसा उधार लिया जिसे चुकाने के लिए उन्हें बैंकों में डकैती करनी पड़ी.

वकील ने ये बताया कि संदीप कौर के पति काफ़ी कंट्रोलिंग किस्म के थे लेकिन ये नहीं बताया कि जुए की लत दोनों ही को थी या फिर ये शादी परिवार की मर्ज़ी से हुई थी या फिर दोनों अभी भी शादीशुदा हैं या नहीं.

उन्होंने संदीप कौर के परिवार के बारे में भी कुछ भी बताने से इंकार किया.

वकील के अनुसार गिरफ़्तारी के बाद से संदीप कौर काफ़ी धार्मिक प्रवृत्ति की हो गई हैं, सिख धर्म की क़िताबों में डूबी रहती हैं और जेल से निकलकर उन भारतीय मूल के अमरीकी बच्चों की मदद करना चाहती हैं जिन्हें यहां के समाज के साथ तालमेल बिठाने में मुश्किलें आ रही हों.

हर्जाना

इन डकैती के मामलों में उन्हें 20 साल तक की सज़ा हो सकती थी और हर्जाने के तौर पर ढ़ाई लाख डॉलर देने पड़ सकते थे लेकिन अदालत ने उन्हें साढ़े पांच साल की सज़ा सुनाई.

यूटा के सैंट जॉर्ज इलाके के एक बैंक में डकैती के बाद वो पकड़ी गईं थीं और वहीं की डिस्ट्रिक्ट अदालत में उनके मुकदमे की सनवाई हुई.

वहां के जज ने कहा कि ख़तरनाक लोगों से लिए कर्ज़ को चुकाने के लिए उन्होंने बैंक डकैती की ये बात समझ में आती है लेकिन उसे सही बिल्कुल ही नहीं ठहराया जा सकता.

बचाव पक्ष के वकील ने ये भी कहा कि कैशियरों को बम और गोली की जो धमकी दी गई वो सिर्फ़ धमकी थी क्योंकि उन्होंन अपने कपड़ों के अंदर अपनी ऊंगली को बंदूक की तरह तान रखा था और न ही उनके पास कोई बम था.

जज का कहना था, "अगर ये बात सही भी है तो बैंक के कैशियर्स को इस बारे में पता नहीं था. ज़ाहिर है वो काफ़ी डरे हुए थे और इसलिए उन्होंने वो पैसा सौंप दिया."

वकील जे विनवर्ड का कहना है कि वो चार साल तीन महीने में जेल से बाहर आ जाएंगी.

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