मैं चुप नहीं रहूँगी: बांग्लादेशी ब्लॉगर की पत्नी

अविजीत रॉय और उनकी पत्नी राफिदा
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बांग्लादेशी मूल के अमरीकी ब्लॉगर अविजीत रॉय की पत्नी राफ़िदा बोन्या अहमद ने कहा है कि वो धर्मनिरपेक्षता और विज्ञान विषयों पर बोलने से नहीं कतराएंगी.

ये दोनों विषय न सिर्फ उनके लिए, बल्कि उनके पति के लिए बहुत मायने रखते थे. अविजीत रॉय की पिछले दिनों बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक पुस्तक मेले से लौटते हुए हत्या कर दी गई थी.

इस हमले में राफ़िदा भी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं. उनके पति पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था.

बीबीसी से बातचीत में राफ़िदा ने कहा कि बांग्लादेश में हाल के वर्षों में लगातार अहिष्णुता बढ़ रही है.

क्या हुआ याद नहीं...

अविजीत रॉय की हत्या का विरोध प्रदर्शन

घटना के संंबंध में राफ़िदा कहती है कि उन्हें कुछ भी ठीक-ठीक याद नहीं है.

उन्होंने बताया,"हम अपने घरवालों के साथ डिनर करने के लिेए घर लौटने वाले थे. मुझे याद है कि मैंने उनका हाथ पकड़ रखा था और हम आपस में बातें कर रहे थे. इसके बाद मुझे याद नहीं कि क्या हुआ. जहां तक मुझे याद आता है किसी ने मुझे गाड़ी में चढ़ाया और मैं खून से लथपथ थी."

अस्पताल में उन्हें यह अहसास हुआ कि उनपर हमला हुआ है और उनके सिर, हाथ और अंगुुठे पर गहरा ज़ख्म है.

वो बताती है, "अविजीत उस समय तक ज़िंदा थे और मेरे बगल वाले स्ट्रेचर पर लेटे थे. मैंने डॉक्टरों को कहा कि वो पहले उन्हें देखे क्योंकि मेरी हालत बेहतर है. अविजीत कुछ कह रहे थे लेकिन वे होश में नहीं थे."

अमरीका ने अविजीत रॉय की हत्या की कड़ी निंदा की है और इसे हिंसा की ऐसी वारदात कहा है जो हैरान करने वाली है. इस मामले में एक अन्य ब्लॉगर को गिरफ्तार किया गया है.

राफ़िदा ने कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, वो चुप नहीं बैठेंगी.

राफ़िदा ने कहा, “हाल के वर्षों में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. धार्मिक कट्टरपंथ अपनी जड़ें जमा रहा है.”

'मैं फिर से आवाज़ उठाऊंगी'

उनके परिवार का कहना है कि अविजीत को धर्मनिरपेक्षता, विज्ञान और सामाजिक मुद्दों से जुड़े लेख अपने बंगाली ब्लॉग 'मुक्त मन' पर लिखने की वजह से धमकियां मिल रही थीं.

उन्होंने अपने फ़ेसबुक पोस्ट पर नास्तिकता का समर्थन किया था. उन्होंने अपने पोस्ट में किसी भी अवैज्ञानिक और विवेकहीन आस्था के विरोध में तार्किक होने का हवाला दिया था.

अमरीका में रहने वाले अविजीत बांग्लादेश में अपनी पत्नी के साथ ढाका पुस्तक मेले में हिस्सा लेने बांग्लादेश गए हुए थे.

अविजीत रॉय

राफ़िदा ने कहा, “अगर मुझे कुछ करना ही है तो मैं फिर से आवाज़ उठाऊंगी- उस मकसद के लिए जिसमें मैं यकीन रखती हूँ और जिसके लिए अविजीत ने अपनी जान दी. मैं चुप नहीं बैठूँगी.”

पुलिस का मानना है कि अविजीत की मौत के पीछे धार्मिक कट्टरपंथियों का हाथ है.

अविजीत की हत्या के बाद राजधानी ढाका में लेखकों और शिक्षकों समेत सैकड़ों लोगों ने ब्लॉगर अविजीत रॉय की हत्या पर विरोध प्रदर्शन किया था.

दूसरी तरफ़ एक स्थानीय धार्मिक गुट ने अविजीत की हत्या को सही ठहराते हुए कई ऑनलाइन संदेश पोस्ट किए थे.

बांग्लादेश में दो साल पहले धार्मिक चरमपंथ की आलोचना करने पर एक और ब्लॉगर अहमद रजीब हैदर की भी हत्या कर दी गई थी.

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