टीवी के ज़रिए शिशु मृत्यु रोकने की कोशिश

अंधविश्वास के ख़िलाफ़ टीवी धारावाहिक

इमेज स्रोत, THINK STOCK

प्रकाशित

कपड़ों में लिपटी बीस वर्षीया विमला फ़र्श पर पड़ी हुई है और दो महिलाएं उसकी मदद करने पास ही खड़ी हैं. तनाव का माहौल है. विमला पहली बार मां जो बनने जा रही हैं.

उसी वक़्त आवाज़ आती है, कट...कट...कट. सब कुछ थम जाता है.

ये बांग्ला धारावाहिक ‘ऊजान गांगेर नैया’ ( हिंदी में कहें तो ‘धारा के उलट नाव खेना’) के एक दृश्य की शूटिंग हो रही था. बांग्लादेश में फ़िल्माए जा रहे इस दृश्य में विमला का क़िरदार निभा रही थीं जोयीता महालनबीस.

ब्रिटेन की हिट टीवी धारावाहिक ‘कॉल द मिडवाइफ़’ के लोग इस धारावाहिक में मदद कर रहे हैं.

इसका मक़सद अंधविश्वासों के ख़िलाफ़ लोगों को जागरूक करना और मां व नवजात शिशु के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है.

धारावाहिक के निर्देशक जॉर्जिस बशर कहते हैं कि इस तरह का दृश्य लोगों को नागवार लग सकता है.

जहां सेक्स पर बात करना मना है

ब्रिटेन की मदद से बांग्ला धारावाहिक

इमेज स्रोत, THINK STOCK

दक्षिण बांग्लादेश के बारीशाल ज़िले का एक शख़्स कहता है, जन्म का दृश्य बुजर्गों के लिए निहायत ही संवेदनशील है, वे नहीं चाहते कि मर्दों के ये सब बातें बताई जाएं.

धारावाहिक से जुड़ी ब्रिटिश धाय टेरी कोट्स का मानना है कि यह दृश्य उतना चौंकाने वाला नहीं है जितना लोगों को आशंका थी.

मां व नवजात बच्चे की मौत के मामले में बांग्लादेश में काफी सुधार होने के बावजूद यहां जन्म देते समय सालाना 20 महिलाओं की मृत्यु हो ही जाती है. तीन सौ बच्चे जन्म के बाद के पहले महीने ही मर जाते हैं.

कई संस्कृति यों में बुरी नज़र को इसके लिए ज़िम्मेदार माना जाता है. दक्षिणी अफ़्रीकी देशकोट दी आइवर में माना जाता है कि

जड़ी बूटी से बने एनीमा के इस्तेमाल से जन्म देते समय ज़्यादा तकलीफ़ नहीं होती है. सच तो यह है कि इसके उलट अनचाहे गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है.

कई देशों में यह गर्भवती महिलाओं के बुरी नज़र से बचाने के लिए दोपहर में चलने फिरने से मना किया जाता है.

अंधविश्वास के ख़िलाफ़

अंधविश्वास के ख़िलाफ़

इमेज स्रोत, THINK STOCK

कई जगहों पर महिला के पेट के आकार को देख कर अनुमान लगाया जाता है कि लड़का होगा या लड़की होगी. हालांकि ज़्यादातर मामलें में अनुमान गल़त ही साबित होता है.

कहीं कहीं यह भी माना जाता है कि चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण का भी असर गर्भवती महिला पर पड़ता है.

बीबीसी मीडिया एक्शन ने शोध में पाया कि बांग्लादेश में ज़्यादातर लोग यह मानते हैं कि यह सब महज अंधविश्वास है. पर वे इसका पालन भी करते हैं.

सबसे बड़ी बात तो यह है कि लोग गर्भ या प्रजनन से जुड़ी बातें नहीं करना चाहते क्योंकि यह सेक्स से जुड़ा हुआ मामला जो है.

बीबीसी मीडिया एक्शन की कैथरीन टॉमलिनसन कहती हैं, ‘हम चाहते हैं कि ‘ऊजान गांगेर नैया’ पूरे परिवार को अपील करे क्योंकि बांग्लादेश में महिलाओं व बच्चों से जुड़े फ़ैसले पति व सास लेती हैं.’

बहरहाल, इस बीच जन्म देने का यह दृश्य पूरा हो चुका है. यह धारावाहिक इस साल गर्मियों के पहले लोगों को दिखाया जाएगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप<link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और<link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)