पाकिस्तान को इस्लामिक देशों से झटका, क़ुरैशी बोले- आपसे ही उम्मीद

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इमेज कैप्शन, इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी में सऊदी अरब का ही दबदबा है लेकिन इसके सदस्य देशों से कश्मीर को लेकर पाकिस्तान को निराशा हाथ लग रही है
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पाकिस्तान ने गुरुवार को इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपेरशन यानी ओआईसी से आग्रह किया है कि वो कश्मीर को लेकर अपनी सक्रियता दिखाए.

पाकिस्तान की सरकारी समाचार एजेंसी एपीपी के अनुसार न्यूयॉर्क में ओआईसी के कॉन्टैक्ट ग्रुप को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि भारत के नियंत्रण वाले कश्मीर में लोगों के साथ जुल्म हो रहा है और उनकी सबसे ज़्यादा उम्मीद ओआईसी और इस्लामिक दुनिया से है.

क़ुरैशी ने अनुरोध किया कि कश्मीर का मुद्दा ओआईसी के सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र महासभा और मानवाधिकार परिषद समेत सभी अहम मंचों पर उठाएँ. अपने संबोधन में क़ुरैशी ने कश्मीर में भारत पर जुल्म करने का आरोप लगाया और कहा कि कश्मीर में फ़र्ज़ी एनकाउंटर में आम लोगों को मारा जा रहा है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री कश्मीर में राजनीतिक बंदियों और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी भारत को निशाने पर लिया.

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ओआईसी देशों से पाकिस्तान को झटका

दरअसल, पाकिस्तान को कश्मीर के मामले में ओआईसी के सदस्य देशों से झटका लगा है. उसे उम्मीद थी कि कश्मीर का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में ओआईसी के सदस्य देश ज़ोर-शोर से उठाएंगे. लेकिन सऊदी अरब और ईरान ने ऐसा नहीं किया.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने भले अपने संबोधन में कश्मीर का ज़िक्र किया है लेकिन इस बार उनका टोन भी पिछले साल की तुलना में नरम था. सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुल्लाज़ीज़ ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित किया लेकिन उन्होंने कश्मीर का नाम तक नहीं लिया था.

इससे पहले मंगलवार को ईरान के नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने यूएन महासभा को संबोधित किया था और उन्होंने भी कश्मीर पर कुछ भी नहीं कहा था.

इसके बाद से पाकिस्तान के भीतर से ही सवाल उठने लगे. अब पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख़ुद ओआईसी से ये बात कह रहे हैं. भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने भी कश्मीर पर सऊदी की उपेक्षा को लेकर सवाल उठाया है.

अब्दुल बासित ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूएन महासभा को संबोधित करते हुए दुनिया भर में मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात कही लेकिन कश्मीर पर एक शब्द नहीं कहा.

अब्दुल बासित ने अपने एक वीडियो ब्लॉग में कहा है, ''पाकिस्तान और सऊदी अरब के ताल्लुकात बहुत अच्छे रहे हैं. इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री बनने के बाद सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने पाकिस्तान का दौरा भी किया था. सऊदी के साथ हमारे रिश्ते काफ़ी अहम हैं. क़रीब 20 लाख पाकिस्तानी सऊदी अरब में काम करते हैं. वहाँ काम करने वालों का पाकिस्तान के विदेश मुद्रा भंडार में अहम योगदान है.''

इमरान ख़ान

सऊदी को पाकिस्तान की परवाह नहीं?

बासित ने कहा, ''कई मौक़ों पर सऊदी ने पाकिस्तान को आर्थिक संकट से निकाला भी है. लेकिन मुझे यूएन महासभा में सऊदी के किंग सलमान के भाषण का बेसब्री से इंतज़ार था. उन्होंने अपने संबोधन में हूती की दहशतगर्दी की बात की. उन्होंने सूडान और मिस्र के पानी विवाद की भी बात की. उन्होंने लीबिया और सीरिया की बात की. उन्होंने ये भी कहा कि सऊदी को आत्मरक्षा का अधिकार है. अफ़ग़ानिस्तान का भी उन्होंने ज़िक्र किया. ये तमाम अच्छी बातें उन्होंने की. ईरान को लेकर भी उन्होंने बात की और परमाणु हथियार को लेकर चिंता जताई.''

अब्दुल बासित ने कहा, ''सऊदी किंग ने तमाम अच्छी बातें कहीं लेकिन उन्होंने कश्मीर का ज़िक्र तक नहीं किया. सऊदी अरब ओआईसी के कॉन्टैक्ट ग्रुप के पाँच सदस्यों में से एक है. लेकिन किंग सलमान ने कश्मीर का ज़िक्र करना मुनासिब नहीं समझा. हम जानते हैं कि हमारे विदेश मंत्री ने ओआईसी के ख़िलाफ़ एक बयान दिया था.''

इमरान ख़ान

''उन्होंने कहा था कि अगर कश्मीर पर ओआईसी का समर्थन नहीं मिलता है तो पाकिस्तान एक अलग से फोरम बना लेगा. क़ुरैशी का यह बयान सऊदी अरब को पसंद नहीं आया था. सऊदी को मनाने के लिए प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने दौरा किया था. पिछले साल भी सऊदी नहीं किया था. ऐसा लगा रहा था कि किंग पाकिस्तान का ध्यान रखते हुए कश्मीर का ज़िक्र करेंगे लेकिन नहीं हुआ.''

अब्दुल बासित को लगता है कि किंग सलमान ने कश्मीर का ज़िक्र इसलिए नहीं किया क्योंकि भारत के संबंध बहुत ही जबर्दस्त हैं. बासित ने कहा, ''लेकिन इसके बावजूद मेरा मानना है कि सऊदी में पाकिस्तान की जो भूमिका रही है उसे भारत रिप्लेस नहीं कर सकता. लेकिन मुझे लगता है कि पाकिस्तान ख़ुद भी ग़लतियां करता है. कश्मीर नीति को लेकर कोई निरंतरता नहीं है. एक तरफ़ हम कहते हैं कि मोदी का पीएम चुना जाना कश्मीर के लिए बेहतर होगा. फिर अगले ही साल उन्हें फासीवादी कहना शुरू कर देते हैं.''

''ऐसे बयानों को लेकर दुनिया हमारा मज़ाक भी उड़ाती है कि हम क्या करना चाहते हैं. तुर्की के अलावा किसी ने भी कश्मीर का ज़िक्र नहीं किया. हमें ज़रा सोचना होगा. सिर्फ़ बातों से आज़ादी नहीं मिलेगी. सऊदी अरब का ज़िक्र नहीं करने के पीछे भारत के साथ बढ़ते ताल्लुकात तो हैं, लेकिन हमारी अपनी ग़लतियां भी हैं. हमें आत्ममंथन की ज़रूरत है.''

तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन
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पाकिस्तान के आरोप

ओआईसी कॉन्टैक्ट ग्रुप में पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के नियंत्रण वाले कश्मीर में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन पर शोधपरक डोज़िए या फ़ाइल तैयार किया है.

क़ुरैशी ने कहा कि 131 पन्ने के डोज़िए में 3,432 पीड़ितों की पीड़ा है. क़ुरैशी ने ओआईसी के महासचिव से अपील की है कि यह डोज़ियर सभी सदस्यों के बीच बाँटना चाहिए.

क़ुरैशी ने कहा, ''दक्षिण एशिया में जब तक जम्मू-कश्मीर का उचित समाधान नहीं हो जाता है तब तक शांति की उम्मीद नहीं कर सकते हैं. जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा जनसांख्यिकी बदलने में लगी है. 42 लाख लोगों को फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट जारी किया गया है. इन सर्टिफिकेट में लोगों को कश्मीर के निवासी होने का डोमिसाइल दिया गया है.''

क़ुरैशी ने इस बैठक में सैयद अली शाह गिलानी की मौत का हवाला देते हुए कहा कि उनकी मौत के बाद भी अमानवीय व्यवहार किया. गिलानी की मौत इसी महीने एक सितंबर को हुई थी. उन्होंने कहा, ''ख़राब सेहत के बावजूद उन्हें मेडिकल जाँच की अनुमति नहीं दी गई. यहाँ तक कि परिवार को मन के हिसाब से अंत्येष्टि की भी अनुमति नहीं मिली.''

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी
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अर्दोआन पड़े नरम तो महातिर के हाथ में नहीं रही सत्ता

कश्मीर के मामले में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के एजेंडे के हिसाब से तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन और मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद बोलते रहे हैं.

महातिर मोहम्मद अब सत्ता में नहीं हैं और अर्दोआन का टोन भी कश्मीर पर नरम हुआ है. अर्दोआन ने अपने संबोधन में कश्मीर को संवाद के ज़रिए सुलझाने की बात कही है जबकि अनुच्छेद 370 को लेकर इस बार कुछ नहीं कहा.

ऐसे में इस्लामिक दुनिया से कश्मीर पर पाकिस्तान का साथ देने वाला कोई इस्लामिक देश अब नहीं दिख रहा है.

पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान और सऊदी संबंधों का उतार-चढ़ाव काफ़ी स्पष्ट रहा है. जब 2018 में इमरान ख़ान ने सरकार संभाली थी, तब सऊदी अरब ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और क़र्ज़ चुकाने में आने वाली मुश्किलों को दूर करने के लिए तीन अरब डॉलर का क़र्ज़ दिया था. सऊदी अरब ने न केवल तीन अरब डॉलर का क़र्ज़ दिया था, बल्कि उतनी ही क़ीमत का उधार तेल मुहैया कराने का भी वादा किया था.

जब भारत ने भारत प्रशासित कश्मीर के विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त कर दिया, तो पाकिस्तान को सऊदी अरब से समर्थन नहीं मिला. इसकी शिकायत पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में की थी.

शाह महमूद क़ुरैशी ने कश्मीर मुद्दे पर मुस्लिम देशों के संगठन (ओआईसी) की बैठक नहीं बुलाने पर सऊदी अरब की तीखी आलोचना की थी. इसके बाद सऊदी अरब ने क़र्ज़ को जल्द चुकाने की माँग की थी.

(कॉपीः रजनीश कुमार)

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