क़तर को अलग-थलग करने के लिए सऊदी अरब खोदेगा नहर

सऊदी अरब, क़तर
इमेज कैप्शन, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और क़तर के आमिर शेख तमीम बिन हमाद अलथानी
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सऊदी अरब और क़तर की सरहद पर नहर की खुदाई का प्लान दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद में एक नया मोड़ कहा जा सकता है.

साल 2017 के जून की शुरुआत में सऊदी अरब ने क़तर को खाड़ी देशों के साथ 'हुक्का-पानी बंद करने की कार्रवाई' शुरू की थी.

सऊदी अरब के इस क़दम में उसे बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र का साथ मिला था.

क़तर पर सऊदी अरब के अंदरूनी मामलों में दखल देने, चरमपंथी संगठनों को मदद मुहैया कराने और ईरान के साथ नज़दीकियां बढ़ाने का आरोप लगाया गया.

लेकिन इस बहिष्कार के बावजूद क़तर ईरान और तुर्की के साथ नए कारोबारी रिश्तों बनाने में कामयाब रहा.

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सलवा नहर प्रोजेक्ट

सऊदी अरब और क़तर की सरहद पर सलवा नहर परियोजना की ख़बर खाड़ी देशों की मीडिया में छाई हुई है.

कहा जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट का मक़सद क़तर को भौगोलिक दृष्टि से अलग-थलग करने का है.

सऊदी अरब के अख़बार 'सबक़' का दावा है कि नहर परियोजना को सरकारी मंजूरी मिलने का इंतज़ार किया जा रहा है.

अख़बार के मुताबिक़ 750 मिलियन डॉलर की लागत से इस प्रोजेक्ट को साल भर के अंदर पूरा किया जा सकता है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 60 किलोमीटर लंबा, 200 मीटर चौड़ा और 15 से 20 मीटर गहरा ये नहर क़तर को उसके दक्षिणी पड़ोसियों से अलग-थलग कर देगा.

सऊदी अरब के सलवा और खव्र अल-उदायद इलाकों के बीच खोदी जाने वाली ये नहर क़तर के साथ ज़मीनी रास्ते से होने वाले व्यापार को पूरी तरह बंद कर देगी.

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सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

इस नहर परियोजना को लेकर खाड़ी देशों में ट्विटर पर गर्मागर्म बहस भी चल रही है.

क़तर के लोग इसे सऊदी अरब की तरफ़ से उकसावे की कार्रवाई की तरह देख रहे हैं और इससे खाड़ी संकट बढ़ने की आशंका जता रहे हैं.

क़तर का बहिष्कार कर रहे देशों में लोगों का कहना है कि सऊदी अरब की सल्तनत ने ये क़दम अपनी सरहदों की सुरक्षा के लिए उठाया है.

कुछ इसे क़तर को एक अलग-थलग द्वीप में बदलने की मुहिम के तौर पर भी देख रहे हैं.

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स्थायी अलगाव

फ़ोर्ब्स मैगज़ीन की रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब में कई लोग ये चाहते हैं कि रेगिस्तान में एक नहर की लकीर दोनों देशों के बीच एक स्थायी बाधा के तौर पर खड़ी हो जाए.

सबक़ अख़बार का कहना है कि इस परियोजना के लिए नौ स्थानीय फ़र्म्स की एक कंसोर्शियम इस प्रोजेक्ट से जु़ड़ी हुई है.

एक सवाल ज़रूर है कि नहर परियोजना से क्या हासिल होगा और इसकी वाकई में कितनी ज़रूरत है.

इस सरहदी इलाके की आबादी ज़्यादा नहीं है और सऊदी अरब के औद्योगिक इलाके भी यहां से काफी दूर हैं.

अगर ये मान भी लिया जाए कि क़तर की सीमाएं बंद कर दी जाएँगी तो किसी आर्थिक और पर्यटन गतिविधि के लिए नज़दीकी बाज़ार पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा.

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