सऊदी अरब में होगी सिनेमा की वापसी?

जेद्दा में अपने बच्चों के साथ एक सऊदी नागरिक
इमेज कैप्शन, सऊदी अरब में मजहबी पुलिस को काफी अधिकार प्राप्त हैं और वहाँ सिनेमा पर कई दशकों से बैन है
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सऊदी अरब में सिनेमा पर कई दशकों से प्रतिबंध चला आ रहा है. ऐसे में जब सऊदी मनोरंजन विभाग के प्रमुख ने बयान दिया कि सरकार देश के थिएटरों में फ़िल्में फिर से चालू करने पर विचार कर रही है, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया.

कई लोगों ने इस ख़बर को सोशल मीडिया पर फटाफट साझा करना शुरू कर दिया तो कई ऐसे भी थे, जिन्होंने इसके विरोध में आवाज़ बुलंद करनी शुरू कर दी और इसे मजहब और संस्कृति के ख़िलाफ़ बताया.

एक यूजर ने दलील दी कि सिनेमा और थिएटर मनोरंजन का साधन मात्र नहीं हैं, लेकिन 'अच्छा संदेश देने वाली कला' चरमपंथ और उग्रवाद के ख़िलाफ़ लड़ने में मददगार हो सकता है.

दुबई इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल

लेकिन ऐसे भी कई यूजर हैं जिन्होंने इस कदम का स्वागत तो किया है, लेकिन इसमें कई शर्तें भी जोड़ दी हैं. मसलन लड़के और लड़कियों के लिए फ़िल्मों की सामग्री अलग-अलग हो, फिल्मों से दृश्यों की कांट-छांट होनी चाहिए.

ये भी कहा गया है कि मूवी थिएटरों को सेंसरशिप की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि जो कुछ अभी सोशल मीडिया और सैटेलाइट चैनल्स पर देखा जा रहा है, उसमें कांट-छांट की जा सके.

लेखक मोहम्मद अल मसूद ने इस कदम का स्वागत करते हुए 'बेहतर सिनेमा' दिखाने की मांग की जो मजहबी तौर पर आपत्तिजनक न हो.

फ़ाइल फोटो

कुछ लोगों ने तीखी टिप्पणियां भी की हैं. एक यूजर लिखते हैं, "जिन्हें सिनेमा या पार्टियां पसंद नहीं हैं, उन पर कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है और वे अपने घरों में ही रहें. सऊदी लोग दुनिया के किसी भी दूसरे देश की तरह बनना चाहते हैं."

फ़ाइल फोटो

एक अन्य यूजर ने लिखा, "उन सभी लोगों की सूची बनाई जानी चाहिए जो सिनेमा चालू करने का विरोध कर रहे हैं, ताकि जब वो सिनेमा देखने आएं तो उन्हें उनकी पोस्ट की याद दिलाई जाए."

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