राहत शिविर में जन्मी ‘बाढ़’ , नाव पर ‘राजा’

बिहार में आई बाढ़ के दौरान राहत शिविर में पैदा हुए बच्चे के साथ उसकी मां.
    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, भागलपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

भागलपुर हवाई अड्डा स्थित बाढ़ राहत शिविर के एक तंबू में थोड़ी हलचल है. औरतें सोहर (जन्म पर गाया जाने वाला भोजपुरी गीत) गा रही हैं. पतली-सी एक महिला की नाक पर भी सिंदूर लगा है. इस महिला ने बेटी को जन्म दिया है और उसकी बेटी का छठिहार (जन्म के छठे दिन का पारंपरिक उत्सव) है. वह अपनी बेटी का नाम 'बाढ़' रखने पर विचार कर रही है.

इस महिला का नाम कंचन देवी. पति का नाम है रामदेव मंडल. ये लोग भागलपुर ज़िले के प्रखंड नाथनगर के गांव विशनपुर के निवासी है. लेकिन अस्थायी पता है बाढ़ राहत शिविर.

इसी शिविर के एक छोटे-से तंबू में वो अपनी बेटी को गोद में लिए बैठी हैं.

बिहार में आई बाढ़ के दौरान लगा राहत शिविर.

उनकी सास आशा देवी ने बीबीसी को बताया कि जब 15 दिन पहले उनके गांव में बाढ़ आई तो कंचन का नौंवा महीना चल रहा था. घरवाले नाव से कंचन को पहले नाथनगर फिर भागलपुर ले आए. यहां आने के कुछ ही दिन बाद कंचन ने बेटी को जन्म दिया.

गोराडीह प्रखंड के जलसी गांव की रेणु देवी को बेटा हुआ है. उनके पति सुनील ने बताया कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही अपनी पत्नी को लेकर वे भागलपुर आ रहे थे. रास्ते में ही रेणु को प्रसव पीड़ा हुई. कुछ ही देर में उन्होंने बच्चे को जन्म दे दिया.

बिहार में आई बाढ़ के दौरान राहत शिविर में पैदा हुए बच्चा अपनी मां के साथ.

उनके साथ चल रही आशा कार्यकर्ता रामरति कुमारी ने बीबीसी को बताया कि जन्म के तुरंत बाद नाव पर लादकर रेणु को गोराडीह लाया गया. फिर वहां से एंबुलेंस से भागलपुर. रेणु ने अपने बेटे का नाम राजा रखा है. वे सदर अस्पताल में भर्ती हैं. सरकार ने उन्हें 10 हजार रुपए का चेक दिया है.

शाहकुंड प्रखंड के मुंजत गांव की ज्ञानती देवी को नाव पर ही प्रसव पीड़ा होने लगी. गंगा की लहरों पर तैरती नाव पर ही साड़ियों से परदा किया गया. ज्ञानती की सास उन्हें लेकर पचरुखी स्थित राहत शिविर जा रही थीं. ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके. इस बीच नाव पर ही किलकारियों की आवाज गूंजने लगी. फिर स्टील की थाली को पीटकर बच्चे के जन्म की मुनादी की गई. अभी वे अस्पताल में भर्ती हैं.

बाढ़ राहत शिविर में पैदा हुए बच्चे के साथ अस्पताल में भर्ती मां.

दरअसल, बाढ़ के कारण हर तरफ फैले मातम के बीच गूंजती किलकारी खुशी के अवसर उपलब्ध करा रही हैं. गंगा की लहरों ने अपनी सरहद का विस्तार कर लिया है. वरना इन नन्ही जानों को भी अस्पताल नसीब हुआ होता.

बिहार सरकार बाढ़ पीड़ित इलाकों में बच्चे के जन्म पर सहायता दे रही है. बेटियों के जन्म पर 15 और बेटे के जन्म पर 10 हजार रुपए की सहायता राशि दी जा रही है. राहत शिविरों में सेनेटरी नैपकिन भी बांटने का निर्देश दिया गया है.

खबरों के मुताबिक़ बिहार में 16 बच्चों का जन्म नाव या फिर राहत शिविरों में हुआ है.

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