चारों तरफ़ पानी और बीच में अटकी ज़िंदगी

नाव नदी पानी
    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, इंग्लिश गांव (भागलपुर) से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

हम जहां खड़े हैं, वहां से दूर आकाश तक सिर्फ़ पानी दिखता है, मानो समंदर हो. लेकिन, यह गंगा है. कल तक अपनी तलहटी में बहने वाली गंगा, आज इंग्लिश गांव में घरों के आंगन तक गंगा बह रही है.

इंग्लिश गांव, फरका पंचायत का हिस्सा है. इस पंचायत की 11 हज़ार की आबादी बाढ़ के पानी से घिर गई है. इंग्लिश, फरका और घोसपुर गांवों में लोग छतों पर ठिकाना बनाकर बैठे हैं.

गली और बच्चे

इन गांवों में 12 दिनों से बाढ़ का पानी है. हर तरफ़, हर घर में पानी. सड़कें नहीं दिख रहीं. गांव का संपर्क भागलपुर से टूट चुका है. कुछ उम्मीद की नावें चल रही हैं. नाविक 10 रुपये लेकर लोगों को सबौर तक छोड़ते हैं. ऐसी ही एक नाव लेकर हम भी यहां पहुंचे.

इंग्लिश गांव का सरकारी मिडिल स्कूल डूब चुका है. सैकड़ों बीघे में लगी मकई और दूसरी फ़सलें बर्बाद हो रही हैं. पशुओं के लिए भूसा, खली और घास का भी अकाल है.

73 साल के चंद्रिका यादव ने बीबीसी को बताया कि ऐसी बाढ़ पहली बार आई है. वो परिवार समेत छत पर टिके हैं. यहां दिन मे कड़ी धूप है, तो रात को शीत. घर के तमाम लोग खांस रहे हैं. उनके पोते सूरज को तो बुख़ार भी हो गया था. उनकी बहुएं बग़ैर घूंघट उनके सामने से नहीं गुजरती थीं. अब मजबूरी में एक ही छत पर परदा डाल कर सो रही हैं.

महिला

यहीं के चक्रधर यादव ख़ासे नाराज़ हैं. कहते हैं कि सरकार का कोई नुमाइंदा उनके गांव नहीं आया. विधायक और सांसद भी नहीं आए. विधायक पड़ोस के गांव के हैं. उनके गांव मे भी बाढ़ का पानी है.

छत पर परिवार

गांव की पीसीसी सड़क के 4 मीटर हिस्से पर पानी नहीं है. यहां नाव लंगर डालती है. बाक़ी के सारे घर डूब चुके हैं. बाढ़ ने इंसान और जानवर के बीच का फ़र्क़ ख़त्म कर दिया है. लोगों ने मवेशियों को भी छतों पर चढ़ा लिया है. संकट उनके लिए चारा लाने का है. बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा.

इंग्लिश में यादवों की ख़ासी आबादी है. कुछ घर दलितों के भी हैं. इसी मुहल्ले के पप्पू कुमार राम आटो चलाते हैं. पिछले 10 दिनों से उनका आटो गांव में ही खड़ा है. पप्पू ने बताया कि उनके सारे पैसे ख़त्म हो गए. अब खाने का संकट है. इस बाढ़ ने सबकुछ छीन लिया है.

महिला

अव्वल तो यह कि चारो तरफ़ पानी से घिरे गांव मे पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध नहीं. श्रवण यादव कहते हैं कि लोग सबौर जाकर मिनरल वाटर के जार ख़रीद कर ला रहे हैं. जिनके पास पैसे नहीं हैं, वो इसी गंगा का पानी पीने को विवश हैं.

नाव से उतरने के बाद कमर भर, तो कहीं उससे भी ज़्यादा पानी में उतरकर लोग अपने घरों तक पहुंच रहे हैं. मिट्टी के कई घर टूट गए हैं और ऐसे लोग बग़ल के पक्के घरों की छत पर डेरा जमाए बैठे हैं.

इंग्लिश गांव में लोगों को बाढ़ का पानी घटने का इंतज़ार है. ज़िंदगी थम गई है और लोग इसे फिर से पटरी पर लाने को छटपटा रहे हैं.

उधऱ, औरतें गंगा की पूजा कर उनसे वापस लौटने की प्रार्थना कर रही हैं.

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