'सरकार विज्ञापन न करे काम करे'

राजेंद्र सिंह
प्रकाशित

भारत के कई इलाक़े इन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में हैं. इससे फ़सल ही नहीं जानमाल का भी नुक़सान हो रहा है. कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भारत में पानी के संरक्षण को लेकर जागरूकता पहले के मुक़ाबले कम हुई है.

सरकारों का काम विज्ञापन देना नहीं होता है. सरकारों का काम होता है ज़मीन पर काम करके दिखाना. जब अच्छा काम होगा तो लोग उससे सीखकर ख़ुद भी करेंगे.

हमने जब सरकार को ज्ञापन दिया, उसके बाद हमें अच्छी बात यह लगी कि सरकार ने अख़बारों में तो कम से कम यह स्वीकार किया कि हम जो कह रहे हैं वो करने लायक काम है.

लेकिन सबसे अच्छी बात यह होती कि जल सत्याग्रह के बाद वो काम ज़मीन पर होने लगता.

जब सरकारें पानी जैसी चीज़ में भी दलगत राजनीति ले आती हैं, तब पानी के काम में सियासत दिखती है. पानी के काम में दलगत राजनीति लाना ठीक बात नहीं है.

भारत

पानी का काम तो सबको मिलकर करने की ज़रूरत है, क्योंकि पानी का काम तो न अकेली भारत सरकार का है न राज्य सरकारों का है और न ग्राम पंचायतों का.

यह तो राज समाज और सबका साझा काम है. सबको मिलकर करना चाहिए.

हम दस मई को देश के 13 सूखाग्रस्त राज्यों के 306 ज़िलों में जल सुरक्षा अधिकार अधिनियम बनाने के लिए ज्ञापन देंगे.

दस मई को ही वर्षों पहले मेरठ में भारत की स्वतंत्रता का पहला आंदोलन शुरू हुआ था. इसे देखते हुए हमने यह तारीख़ चुनी है.

महाराष्ट्र के लातूर में रेलगाड़ी से पहुंचा पानी

इसके बाद हम लोग 20 तारीख़ को महाराष्ट्र के लातूर से जल-हल यात्रा शुरू करने वाले हैं, जो बुदेलखंड तक जाएगी.

अब ज़रूरत इस बात की भी है कि लोगों का पानी पर अधिकार कायम हो. उसी तरह नदी का अधिकार और प्रकृति का जल अधिकार भी कायम करने की बात सरकार को करनी चाहिए.

नदी का जल अधिकार और प्रकृति का जल अधिकार कायम किए बिना नदियां स्वस्थ नहीं हो सकती हैं. अगर नदियां स्वस्थ नहीं होंगी तो समाज स्वस्थ नहीं रह सकता है.

राजेंद्र सिंह

'वॉटरमैन' या 'जलपुरुष' के नाम से मशहूर राजेंद्र सिंह ने पानी के संरक्षण का काम राजस्थान के अलवर ज़िले की थानागाजी तहसील से वर्ष 1975 में शुरू किया था. उन्होंने रेगिस्तान के गाँवों को पानी के प्रबंधन में सक्षम बनाया.

इसके लिए राजेंद्र सिंह को मैग्सेसे पुरस्कार भी मिला. बाद में उन्होंने स्टॉकहोम वाटर प्राइज़ भी जीता, जिसे पानी का नोबेल पुरस्कार कहा जाता है.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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