जब तेंदुआ बन गया परिवार का सदस्य

    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

तेंदुए जैसा ख़तरनाक जानवर जंगल में दिख जाए तो लोग घबरा सकते हैं, लेकिन कश्मीर के इलियास मजीद ने न केवल डेढ़ साल तक एक शावक को पाल पोसकर बड़ा किया, बल्कि अब उसे इसके बिछड़ने का दुःख भी सता रहा है.

इलियास मजीद ने डेढ़ साल पहले अपने गाँव की नदी के पास दो शावक देखे थे. वो एक नदी को पार करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन थक कर हार गए और उनकी कोशिश नाकाम हो गई. शावकों की हालत देखकर इलियास इन्हें अपने घर ले आए और इनकी देख रेख करने लगे.

हालाँकि एक शावक को तो लोगों नें पीट पीटकर मारा डाला लेकिन इलियास ने दूसरे को बचा लिया. बाद में इलियास ने इसका नाम 'बुक्क' रखा.

शावक से तेंदुआ बनने के सफ़र में बुक्क और इलियास के बीच गहरी दोस्ती हो गई.

डेढ साल के इस सफ़र में बुक्क और इलियास साथ ही उठते, बैठते, सोते और खाना खाते थे.

इलियास जब बुक्क को घर लेकर आए थे तो वह महज़ तीन महीने का शावक था और उसका वज़न 7 किलो था. लेकिन डेढ़ साल में उसका वज़न 85 किलो के आस पास का हो गया.

कश्मीर घाटी के कुलगाम ज़िले के कोट बल के रहने वाले इलियास चार्टर एकाउंटेंसी के छात्र हैं.

इलियास के मुताबिक़ डेढ़ साल के दौरान 'बुक्क' को पालने पोसने में उन्होंने 4 लाख रुपए ख़र्च कर दिए.

वो कहते हैं, "पहले एक महीने तक मैं तेंदुए को दूध और मल्टी विटामिन्स देता था, लेकिन एक महीने के बाद उसने दूध पीना बंद कर दिया, उसके बाद मैंने उसे गोशत खिलाना शुरू किया, जो वह ख़ुशी ख़ुशी खाता था."

इस नन्हें शावक को घर ले जाने के बाद लोगों ने इलियास पर दबाव डालने की पूरी कोशिश की कि वह या तो उसे को छोड़ दे या फिर मार दे, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया.

इलियास के मुताबिक़, "जब मैं उसे अपने घर ले गया तो लोग कहने लगे कि ये हमारे लिए ख़तरा है. लोग अक्सर कहते रहे कि या तो इस को छोड़ दो या फिर इस को मार दो, लेकिन मैंने किसी की नहीं सुनी. मैंने घर में उसके लिए अलग से पिंजड़ा बनवाया और उसे इसी पिंजड़े में रखता था."

इलियास का कहना है कि जब वह घर में नहीं होते थे तो बुक्क किसी के हाथ से कुछ भी नहीं खाता था.

इलियास का मानना है कि कोई भी जंगली जानवर किसी का दुश्मन नहीं होता, बल्कि वह एक अच्छा दोस्त भी बन सकता है.

वो बताते हैं, "मैंने इस तेंदुए को केवल इसलिए पाला ताकि लोगों में यह संदेश जाए कि कोई भी जानवर इंसान का दुश्मन नहीं है, अगर हम जानवर को छेड़ेंगे तभी वह अपने बचाव के लिए हमला करता है, नहीं तो वह किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता है."

लेकिन अब इलियास बुक्क को लेकर काफ़ी दुःखी है.

कुछ दिन पहले ही इलियास ने इस तेंदुए को वन्य प्राणी विभाग के हवाले कर दिया है. विभाग ने डेढ़ साल तक तेंदुए की परवरिश करने के बदले अभी तक उनको कोई मुआवज़ा नहीं दिया है.

इलियास के कहना है कि उन्होंने तेंदुए को वन्य प्राणी विभाग के हवाले इसलिए किया क्योंकि उनको अपनी पढ़ाई के लिये कश्मीर से बाहर जाना पड़ता है. इस दौरान वह घर के किसी और सदस्य का दिया हुआ खाना नहीं खाता था. साथ ही उनका ये भी कहना है कि गांव के लोग तेंदुए की मौजूदगी से डरते भी थे.

'बुक्क' के जाने से इलियास और उनका परिवार काफ़ी दुःखी है. इलियास ने ख़ुद भी 'बुक्क' के जाने के बाद कई दिनों तक खाना नहीं खाया.

इलियास कहते हैं, "बुक्क हमारे घर के एक सदस्य जैसा था. उसके जाने के बाद मेरा दिल उदास है, मुझे पैसे नहीं चाहिए, बल्कि अगर वह वापस मिले तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा ईनाम होगा."

जंगली जानवरों से पैदाइशी प्रेम करने वाले इलियास ने इससे पहले भी गांव में भटक रहे जंगली जानवरों को बचाया है.

वन्य प्राणी विभाग के मुताबिक़ किसी भी वन्य जीव को घर में रखना या पालना अपराध है.

कुलगाम के वन्य प्राणी विभाग के प्रभारी शबीर अहमद का कहना है कि इलियास को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वन्य जीव को घर में रखना अपराध है, बल्कि शकील अहमद के मुताबिक़ उन्होंने इलियास को एक जानवर की जान बचाने के लिए प्रमाणपत्र भी दिया है.

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