स्तनपान के लिए जयपुर मेट्रो में ख़ास इंतज़ाम

जयपुर मेट्रो का अमृत कक्ष
    • Author, आभा शर्मा
    • पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

“सार्वजनिक जगहों पर या सफ़र करते समय, लोगों की घूरती निगाहों के बीच शिशु को स्तनपान कराने में शर्म आती है. कुछ लोग बच्चे को रोता देख, समझकर दूसरी ओर हट जाते हैं पर बहुत से ऐसे हैं जो घूरने लगते हैं.”

जयपुर की 25 वर्षीया पूजा सैनी ने बीबीसी से यह कहा.

पर यह तकलीफ़ अकेली उनकी नहीं है. इस समस्या से तमाम दूसरी दूध पिलाती मांओं को भी जूझना पड़ता है.

एक दूसरी मेट्रो यात्री मीनल कहती हैं, “बच्चे को तो कहीं भी फ़ीड करवाना पड़ सकता है और सबके सामने स्तनपान बड़ी समस्या है. लोगों की नज़रें महिलाओं को असहज कर देती हैं.”

जयपुर मेट्रो का अमृत कक्ष

कोमल खंडेलवाल ने कहा, "कई बार बच्चा ज़िद करने लगता है. पर एकांत में दूध पिलाने की सुविधा मिलती नहीं है. कई बार बच्चे को रोता छोड़ देते हैं. कुछ माताएं मजबूरन बच्चों को जल्दी ही बोतल फीड की आदत भी डाल देती हैं. सफ़र तो करना ही पड़ता है.”

जयपुर मेट्रो ने इस समस्या से निजात पाने में महिलाओं की मदद की है. इसने दूध पिलाने के लिए अलग कमरे बनवाए हैं. इन्हें 'अमृत कक्ष' कहा जाता है.

जयपुर मेट्रो ने फ़िलहाल ऐसे दो अमृत कक्ष बनवाए हैं.

इसके अलावा अपनी सभी ट्रेनों के पहले और आख़िरी कोच में गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाती माताओं के लिए दो-दो सीटें भी आरक्षित की गई हैं.

जयपुर मेट्रो का अमृत कक्ष

जयपुर मेट्रो के सीएमडी निहाल चंद गोयल ने बीबीसी से बताया, “सेव दी चिल्ड्रन मिशन के तहत सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ शिशु- सुगम परिवहन की योजना को पूरा करने के लिए जयपुर मेट्रो ने यह व्यवस्था की है."

इन अमृत कक्षों में माताएं आराम से शिशुओं को स्तनपान करवा सकती हैं. जयपुर मेट्रो के निदेशक (ऑपरेशन्स) चैनसुख जीनगर ने बीबीसी से कहा कि यह सेवा निशुल्क है. देश के अन्य किसी मेट्रो अथवा रेल स्टेशन पर अभी तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं है.

उन्होंने कहा, "विकसित देशों में, मेट्रो में दूध पिलाती माताओं और गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से सीटें रखी जाती हैं. पर भारत में सार्वजनिक परिवहन के किसी भी साधन में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है."

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