सीपीएम से 'बात करने को तैयार' संघ प्रमुख

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संघ के कार्यक्रम में
    • Author, प्रगित परमेश्वरन
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

ख़बरें हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि कन्नूर में चल रही राजनीतिक हत्याओं की संस्कृति का अंत करने के लिए संघ सीपीआईएम से बातचीत को तैयार है.

मोहन भागवत ने कोच्चि में सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ एक बातचीत में यह कहा.

प्रतिनिधिमंडल में शामिल आरटीआई कार्यकर्ता डीबी बिनू के मुताबिक़, संघ प्रमुख ने कहा कि उनका संगठन कन्नूर में केवल आत्मरक्षा में लगा है. उन्होंने वहां हो रही हत्याओं के लिए सीपीआईएम की असहिष्णुता को ज़िम्मेदार ठहराया.

दूसरी ओर, सीपीएम के कन्नूर ज़िला सचिव पी जयराजन का भी यही कहना है.

उन्होेंने कहा, "हम सिर्फ़ आत्मरक्षा कर रहे हैं. हमने भारतीय जनता पार्टी के ज़िला अध्यक्ष और सचिव से नाराज़ कुछ कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है. हम हिंसा नहीं करते, हमारा बदला यही है कि हम लोगों का दिल जीत लेते हैं."

उन्होंने कहा, "दोस्ताना बातचीत के लिए पार्टी को संघ की तरफ़ से कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है. पार्टी इस मुद्दे पर कोई भी पत्र मिलने के बाद ही फ़ैसला करेगी".

केरल की राजनीति में लंबे समय से ख़ूनी लड़ाई चल रही है. केरल पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक़, राज्य में बीते दस साल में 80 से ज़्यादा लोग राजनीतिक हिंसा का शिकार हुए हैं.

आरएसएस के ज़िला शारीरिक शिक्षण प्रमुख ई. मनोज के एक सितंबर को हुए क़त्ल के बाद इस तरह की और हत्याओं का डर बढ़ गया है.

एक दूसरे के लोगों को अपनी ओर खींचने की होड़ में सीपीएम और भाजपा, दोनों पार्टियों में पहले से ही तनाव है.

भाजपा के राज्य सचिव के सुरेन्द्रन ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से इस ज़िले में संघ कार्यकर्ताओं को काफ़ी प्रोत्साहन मिला है, इसलिए सीपीआईएम ज़ोरदार तरीके के भाजपा-आरएसएस का विरोध कर रही है ताकि इस इलाक़े में संघ परिवार का विस्तार रोका जा सके. इसलिए यहां हत्याएं भी हो रही हैं."

राजनीतिक विश्लेषक जैकब जॉर्ज के मुताबिक़, राजनीतिक हत्याएं रोकने के लिए बातचीत से ज़मीनी स्तर पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा, ''इससे पहले भी बातचीत की पहल की गई थी, लेकिन उसका कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला. उस समय भी दोनों ही पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने एक दूसरे से शांतिपूर्वक रहने का वादा किया था. लेकिन ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को इसकी कोई जानकारी नहीं है और दोनों के बीच दुश्मनी जारी है."

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