आर्किटेक्ट बनते-बनते बन गईं चित्रकार

    • Author, प्रीति मान
    • पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 2 मिनट

पूजा इरन्ना को कंटेम्पररी आर्टिस्ट के तौर पर जाना जाता है. पूजा का जन्म दिल्ली में हुआ. इनके माता-पिता रामेश्वर और शोभा ब्रूटा दोनों जाने-माने चित्रकार हैं.

बचपन से ही रंगों और चित्रों के बीच बड़ी हो रही पूजा ने उन दिनों दिल्ली में तेज़ी से हो रहे बदलाव को महसूस किया.

अपने आसपास बन रही इमारतों ने पूजा को बहुत आकर्षित किया और आगे चलकर उन्होंने इसी विषय को अपने कलाकर्म के लिए चुना.

दस साल तक भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लेने वाली पूजा कभी आर्किटेक्ट बनना चाहती थीं पर आगे चलकर उन्होंने चित्रकला का चुनाव किया.

माता-पिता के सुझाव पर उन्होंने पहले फाइन आर्ट में पढ़ाई करना तय किया और दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट से चित्रकला में स्नातक किया.

उन्होंने अपनी कला अभिव्यक्ति के लिए अलग माध्यम चुना और उस पर अडिग रहीं. उनके पति आर इरन्ना भी कलाकार हैं. पूजा ने कई माध्यमों में काम किया जिनमें वॉटर कलर, मिक्स मीडिया, विज़ुअल ग्राफ़िक्स, फोटोग्राफ़ी, वीडियो प्रेज़ेंटेशन, डिजिटल वर्क और स्कल्पचर शामिल हैं.
इमेज कैप्शन, उन्होंने अपनी कला अभिव्यक्ति के लिए अलग माध्यम चुना और उस पर अडिग रहीं. उनके पति आर इरन्ना भी कलाकार हैं. पूजा ने कई माध्यमों में काम किया जिनमें वॉटर कलर, मिक्स मीडिया, विज़ुअल ग्राफ़िक्स, फोटोग्राफ़ी, वीडियो प्रेज़ेंटेशन, डिजिटल वर्क और स्कल्पचर शामिल हैं.
पूजा कहती हैं प्रसिद्ध कलाकारों के बच्चों को अपनी अलग पहचान बनाने के लिए सामान्य से अधिक संघर्ष करना पड़ता है. इनकी कृतियां भारत व अन्य देशों में कई संग्रहालयों व आर्ट गैलरी के निजी संग्रह का हिस्सा हैं.
इमेज कैप्शन, पूजा कहती हैं प्रसिद्ध कलाकारों के बच्चों को अपनी अलग पहचान बनाने के लिए सामान्य से अधिक संघर्ष करना पड़ता है. इनकी कृतियां भारत व अन्य देशों में कई संग्रहालयों व आर्ट गैलरी के निजी संग्रह का हिस्सा हैं.
उन्हें नए प्रयोग पसंद है. इसके चलते वो आजकल स्टेपल पिन से इमारतों का इंस्टालेशन बना रही हैं. पूजा अब तक कई एकल व समूह प्रदर्शनियों में भाग ले चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हैं.
इमेज कैप्शन, उन्हें नए प्रयोग पसंद है. इसके चलते वो आजकल स्टेपल पिन से इमारतों का इंस्टालेशन बना रही हैं. पूजा अब तक कई एकल व समूह प्रदर्शनियों में भाग ले चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हैं.
पूजा ने अपनी कलायात्रा में कई संघर्षों का सामना किया और अपनी अभिव्यक्ति के लिए नई भाषा गढ़ी. पूजा दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहती हैं.
इमेज कैप्शन, पूजा ने अपनी कलायात्रा में कई संघर्षों का सामना किया और अपनी अभिव्यक्ति के लिए नई भाषा गढ़ी. पूजा दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहती हैं.
एक कलाकार के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वो किस तरह अपने आसपास के वातावरण को और उसमें होने वाले बदलावों को देखता है.
इमेज कैप्शन, एक कलाकार के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वो किस तरह अपने आसपास के वातावरण को और उसमें होने वाले बदलावों को देखता है.
बतौर कलाकार उन्होंने वर्षों से चले आ रहे ट्रेंड को अपनाने के बजाए अपने लिए चुनौती भरा रास्ता चुना और उसमें कामयाब भी हुईं.
इमेज कैप्शन, बतौर कलाकार उन्होंने वर्षों से चले आ रहे ट्रेंड को अपनाने के बजाए अपने लिए चुनौती भरा रास्ता चुना और उसमें कामयाब भी हुईं.
पूजा को शुरू में अपना विज़न माता-पिता व शिक्षकों को समझाने में वक़्त लगा क्योंकि उस दौर में इस तरह के काम की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था.
इमेज कैप्शन, पूजा को शुरू में अपना विज़न माता-पिता व शिक्षकों को समझाने में वक़्त लगा क्योंकि उस दौर में इस तरह के काम की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था.
पूजा कलाकार होने के साथ गृहणी भी हैं और मानती हैं कि अगर स्त्री चाहे तो पारिवारिक ज़िम्मेदारी निभाते हुए अपनी कला के साथ तालमेल बिठा सकती है.
इमेज कैप्शन, पूजा कलाकार होने के साथ गृहणी भी हैं और मानती हैं कि अगर स्त्री चाहे तो पारिवारिक ज़िम्मेदारी निभाते हुए अपनी कला के साथ तालमेल बिठा सकती है.
पूजा का मानना है कि आस पास लगातार बदलाव हो रहे हैं और यही बदलाव वो अपनी कला के ज़रिए दिखाने की कोशिश करती हैं. उनको 2002 में 'चार्ल्स वालस इंडिया ट्रस्ट अवॉर्ड', 2009 में 'आउटस्टैंडिंग वुमन अचीवर्स अवॉर्ड' से सम्मानित किया जा चुका है.
इमेज कैप्शन, पूजा का मानना है कि आस पास लगातार बदलाव हो रहे हैं और यही बदलाव वो अपनी कला के ज़रिए दिखाने की कोशिश करती हैं. उनको 2002 में 'चार्ल्स वालस इंडिया ट्रस्ट अवॉर्ड', 2009 में 'आउटस्टैंडिंग वुमन अचीवर्स अवॉर्ड' से सम्मानित किया जा चुका है.

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