पौराणिक पात्रों को मंच पर लाते कलामंडलम अमलजीत

    • Author, प्रीति मान
    • पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 2 मिनट

कथकली कलाकार कलामंडलम अमलजीत का जन्म केरल के अल्लेपी में पारंपरिक परिवार में हुआ.

12 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने दादा चम्पकुलम् पाछू पिल्लै से कथकली नृत्य का प्रशिक्षण लेना शुरू किया.

इसके बाद अमलजीत ने केरल कलामंडलम से कथकली में 6 साल का डिप्लोमा व दो साल का पोस्ट डिप्लोमा किया.

2000 में उन्होंने दिल्ली के इंटरनेशनल सेंटर फॉर कथकली में बतौर शिक्षक व कलाकार प्रशिक्षण देना शुरू किया.

उन्होंने कई राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय मंचों पर रामायण व महाभारत के करदारों के अलावा शेक्सपियर का 'ऑथेलो एंड मैकबेथ', नाइजीरिया का नाटक 'सकारा' व फ़िनलैंड के लोकसाहित्य से 'कलेवाला' आदि का कथकली के ज़रिए मंचन किया है.

2010 में अमलजीत को संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली द्वारा 'उस्ताद बिस्मिल्लाह खां' पुरस्कार, 2011 में डॉ गुरु गोपीनाथ ट्रस्ट (कोट्टयम ) द्वारा 'नटना प्रवीण' पुरुस्कार आदि प्राप्त हुए.

अमलजीत कोलकाता में अपने परिवार के साथ रहते हैं और कथकली का प्रशिक्षण भी देते हैं.

कथकली कलामंडलम अमलजीत
इमेज कैप्शन, कथकली नृत्य केरल प्रदेश का शास्त्रीय नृत्य नाटक है. कथकली का अर्थ है 'एक कथा का नाटक'.
कलामंडलम अमलजीत
इमेज कैप्शन, इस नृत्य शैली में अभिनेता रामायण व महाभारत से लिए गए चरित्रों का अभिनय करते हैं.
मान्यता है 17 वीं शताब्दी में कोट्टारकरा तंपुरान राजा ने जिस रामनाट्टम का अविष्कार किया था उसी के विकसित रूप को आगे चलकर कथकली कहा गया. कथकली को आर्य और द्रविड़ सभ्यता के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है.
इमेज कैप्शन, मान्यता है 17 वीं शताब्दी में कोट्टारकरा तंपुरान राजा ने जिस रामनाट्टम का अविष्कार किया था उसी के विकसित रूप को आगे चलकर कथकली कहा गया. कथकली को आर्य और द्रविड़ सभ्यता के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है.
कथकली
इमेज कैप्शन, कथकली अभिनय, नृत्य और संगीत से बनी सम्पूर्ण कला है.
कलामंडलम अमलजीत
इमेज कैप्शन, कथकली के हर पात्र की अपनी वेश-भूषा और शृंगार होता है. उनकी वेश-भूषा के आधार पर ही पात्र को पहचाना जाता है.
कथकली शृंगार
इमेज कैप्शन, कथकली का शृंगार पाँच भागों में बंटा होता है, पच्चा (हरा), कत्ति (छुरी), करी (काला), दाढ़ी और मिनुक्कु (मुलायम, शोभायुक्त). शृंगार में इस्तेमाल होनेवाले रंग प्राकृतिक होते हैं.
कथकली कलाकार
इमेज कैप्शन, कथकली में छोटे-छोटे भेदों को 'चिट्टकल' कहते हैं. नवरसों की नाट्य प्रस्तुति कथकली की विशेषता है.
कथकली में दो गायक होते हैं. पहले एक गायक गाता है दूसरा उसको दोहराता है. पहले गायक को 'पोन्नानी' और दूसरे गायक को 'शिंकटी' कहते हैं.
इमेज कैप्शन, कथकली में दो गायक होते हैं. पहले एक गायक गाता है दूसरा उसको दोहराता है. पहले गायक को 'पोन्नानी' और दूसरे गायक को 'शिंकटी' कहते हैं.
कथकली
इमेज कैप्शन, माना जाता है सोपान संगीत से कथकली संगीत का जन्म हुआ है. कर्णाटक संगीत व गीत गोविन्द का भी कथकली संगीत पर प्रभाव है. कथकली का रंगमंच जमीन से उठा हुआ चौकोर तख़्त होता है, इसे 'रंगवेदी' या 'कलियरंगु' कहते हैं. दीप जलाकर प्रत्येक पात्र प्रार्थना करता है उसके बाद नाटक का मंचन किया जाता है. धनाशी ' नाम के अनुष्ठान के साथ कथकली का समापन होता है.

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