मछुआरा जो बचाता है लोगों की ज़िंदगी

राजाराम जोशी
इमेज कैप्शन, राजाराम जोशी, जो अब तक 22 लोगों की जान बचा चुके हैं.
    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

मुंबई में नवी मुंबई का बेहद लोकप्रिय इलाका हैं वाशी. वाशी में सभी बड़ी बड़ी कंपनियों के दफ्तर हैं.

और इस इलाके में भारत का सबसे बड़ा ऐपीएमसी यानी एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्किट कमिटी का मार्किट है और ये इलाका बेहद महंगा हैं.

यहाँ रहते ज़रूर पैसे वाले हैं लेकिन उन पैसे वालों से भी ज़्यादा लोकप्रिय है यहाँ का एक मछुआरा, जिसे यहाँ रहने वाले लोग राजा राम भाओ कहकर बुलाते हैं. लेकिन इनका पूरा नाम हैं राजा राम जोशी.

आत्महत्या

आत्महत्या
इमेज कैप्शन, डूब कर आत्महत्या की कोशिश करने वालों को बचाते हैं राजाराम जोशी

एक साधारण मछुआरा होने के बावजूद भी वाशी में राजा राम जोशी का दबदबा है.

यहाँ रहने वाले सभी लोग राजा राम के नाम और उनके काम से परिचित हैं. यहाँ तक कि पुलिस भी उन्हें बेहद पसंद करती हैं.

राजाराम का परिवार पिछली 5 पीढ़ियों से मछुआरा है.

उनकी उम्र अब 37 साल हो चली है. नवी मुंबई के वाशी क्रीक के पास राजाराम मछलियां पकड़ते हैं.

मुंबई के लिए यह एक प्रवेश द्वार की तरह है. यहां स्थित एक पुल, जो कि सियोन-पनवेल हाईवे का हिस्सा है, आत्महत्या के लिए कई लोगों की मुरीद जगह बन गया है.

यहां आकर आत्महत्या करने वाले लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है.

राजा राम जोशी कहते हैं,"जब भी पुलिस को किसी आत्महत्या की कोशिश के बारे में जानकारी मिलती है, वह मुझसे संपर्क करती है. पुलिस कंट्रोल रूम से फोन कर मुझे डूब रहे व्यक्ति की जान बचाने को कहा जाता है. मैं 7 मिनट के अंदर मैं अपनी बाइक से वाशी क्रीक पहुंच जाता हूं. कई बार तो मैं अग्निशमन सेवा के आने से से पहले ही पहुंच चुका हुआ होता हूँ. पिछले 3 साल में मैं पुल से छलांग लगा कर आत्महत्या की कोशिश करने वाले लोगों में से 22 की जान बचा चुका हूँ.

और इसी दौरान मुझे 18 लाशें भी मिली हैं.

पछतावा होता है

आत्महत्या

राजाराम बताते हैं कि जिन लोगों की जान बचाई उनमें से ज्यादातर युवा थे जिन्होंने प्रेम संबंध के टूट जाने पर आत्महत्या करने की कोशिश की.

कई बार लोग पारिवारिक कारणों, जैसे शादी में दिक्कत, तनाव, अपमान, आर्थिक तंगी या फिर शादी के बिना ही गर्भवती हो जाने जैसे कारणों से आत्महत्या करने की कोशिश करते हैं.

कई लोगों को ऐसा लगता है कि पुल से कूद कर मरना आसान है. लेकिन ऐसा है नहीं.

इससे उन्हें और ज्यादा शारीरिक दर्द होता है और लोग असहाय होकर बचाने के लिए चीखते चिल्लाते रहते हैं.

आत्महत्या करने के बाद उन्हें पछतावा होता हैं और वो उम्मीद करते हैं कि उन्हें कोई आकर बचा ले. इसीलिए मेरे लिए ज़रूरी हो जाता है कि मैं उनकी जान बचाकर उन्हें आखिरी उम्मीद दूं.'

पैसे की पेशकश

राजाराम जोशी

राजाराम को कई बार परिवार वालों ने पैसे की पेशकश की. लेकिन उनका कहना है कि उन्होंने कभी किसी की जान बचाने के बदले पैसे नहीं लिए.

"किसी की जान बचाने में मेरा पूरा दिन गुजर जाता है और मैं मछलियां नहीं पकड़ पाता. जान बचाने के लिए फोन कभी भी आ जाता है, सुबह या शाम, कभी भी. चाहे ज्वार का समय हो या फिर भाटा का.

ज्यादातर तो किसी की जान बचाने में 10 से 30 मिनट तक का समय लगता है, लेकिन अगर कोई डूब जाए तो उसकी लाश को खोजने में ज़्यादा समय लगता है. कई बार तो 3 से 4 घंटे लग जाते हैं.'

सम्मान

राजाराम जोशी
इमेज कैप्शन, राजाराम को अग्निशमन सप्ताह के दौरान सम्मानित भी किया जा चुका है

राजाराम को नवी मुंबई के कमिश्नर दिनेश वाघमरे ने राष्ट्रीय अग्निशमन सप्ताह के दौरान सम्मानित भी किया था.

राजाराम का कहना है कि वह किसी सम्मान या पहचान के लिए काम नहीं करते हैं.

पुलिस अधिकारी काले कहते हैं, " राजा राम बहुत अच्छा काम कर रहा हैं. वो मच्छी पकड़ने जाता है और हमारी मदद करता है. कई बार हम उसे बुलाते हैं आत्महत्या करने वाले को बचाने के लिए तो कभी किसी की लाश निकालने के लिए."

परिवार वालों का साथ

राजा राम जोशी के भाई संजय कहते हैं,"पहले मैं उस पर बहुत चिल्लाया करता था क्योंकि उसका खुद का भी परिवार है. बीवी और दो बच्चे. कल को कुछ हो जाएगा तो क्या होगा उसके परिवार का? लेकिन एक बार राजा राम ने मुझसे कहा कि हम मछुआरों की ज़िन्दगी वैसे भी मुश्किल भरी है. क्यों ना अपनी ज़िन्दगी में कुछ ऐसा काम करें कि लोग मरने के बाद याद रखे. उस दिन के बाद से हम परिवार वालों ने उसका साथ देने का फैसला कर लिया है."

दुःख

राजा राम जोशी को सिर्फ एक ही बात का दुःख है. वो कहते हैं," साल 2012 से मैंने अब तक जिन लोगों को बचाया, उन सबका हिसाब मेरे पास है. एक पुलिस अधिकारी ने मुझे ऐसा करने की सलाह दी. मुझे सरकार की ओर से कोई पहचान नहीं मिली, ना ही मेरे पास कोई पुलिस मित्र का कार्ड है. मुझे केवल अपने परिवार की चिंता है. अगर किसी इंसान की जान बचाते हुए मुझे कुछ हो जाता है तो मेरे परिवार को प्रशासन की ओर से किसी तरह का कोई बीमा नहीं मिलेगा."

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