'मेरी बेटी का पुनर्जन्म हुआ है'

द्युति चांद
    • Author, संदीप साहू
    • पदनाम, भुवनेश्वर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

द्युति के घर में इस समय उत्सव का माहौल है. जबसे द्युति पर अंतराष्ट्रीय खेलों में भाग लेने पर लगा प्रतिबंध हटने का समाचार मिला है घर के सभी सदस्य ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे.

द्युति की बड़ी बहन और मेंटॉर सरस्वती, जो ख़ुद चोटी की धाविका रह चुकीं हैं, कहतीं हैं, "मुझे शुरू से ही विश्वास था कि प्रतिबंध ज़रूर हटेगा क्योंकि मैं जानती थी कि वह सही है."

उस सुखद पल को याद करते हुए सरस्वती कहती हैं, "जब से उस पर प्रतिबंध लगा है, जब भी उसका फ़ोन आता था मन में एक डर पैदा हो जाता था, इस बार भी वही हुआ.''

वो आगे कहती है, ''मैंने सोचा रात के 10 बजे फ़ोन कर रही है, कहीं फिर कोई गड़बड़ी तो नहीं हो गई? लेकिन जिस अंदाज़ से उसने मुझे दीदी पुकारा मैं समझ गई कि अबकी बार कोई अच्छी ख़बर है."

'बेटी का पुनर्जन्म हुआ है'

द्युति चांद के माता-पिता
इमेज कैप्शन, द्युति चांद के माता-पिता

द्युति की माँ कहती हैं उनकी बेटी का पुनर्जन्म हुआ है. "जिस तरह इस साल प्रभु जगन्नाथ का नवकलेबर हो रहा है, उसी तरह मेरी बेटी का भी मानो नवकलेबर हो रहा है."

वे कहती हैं, "द्युति ने पिछले एक वर्ष में काफ़ी ज़िल्लत उठाई है, वो फूट-फूट कर रोई है. लेकिन अब उसके हंसने-खेलने के दिन आए हैं. उसने मुझे वादा किया है कि वह ओलंपिक खेलों में पदक जीतेगी."

द्युति के पिता पेशे से बुनकर हैं और बहुत ही मुश्किल से अपने सात बच्चों, जिनमें छह बेटियां हैं, उनका गुज़ारा कर पाते हैं. लेकिन अपनी बेटियों को उन्होंने हमेशा खेलकूद के लिए प्रोत्साहित किया है.

द्युति चांद

वे कहते हैं "द्युति स्कूल में थी तभी से उसकी प्रतिभा की झलक साफ़ नज़र आती थी. मैंने द्युति से कहा कि अगर तुमने खेल को चुना है, तो जी-जान से खेलो."

उन्हें भी पूरा विश्वास है कि द्युति अगले वर्ष रिओ डी जेनेेरो में होने वाले ओलंपिक खेलों में पदक जीतेगी.

'द्युति ने बहुत मेहनत की'

द्युति चांद का घर
इमेज कैप्शन, द्युति चांद का घर

द्युति के पड़ोसी अशोक दत्त हमें वे जगहें दिखाते हैं जहाँ द्युति बचपन में दौड़ का अभ्यास किया करती थी. वे कहते हैं, ''उसने काफ़ी मेहनत की है.''

उन्होंने आगे बताया, ''रेत पर दौड़ती थी, घुटने तक ऊंचाई के पानी में दौड़ते हुए मैंने उसे कई बार देखा है. वो ऐसे ही चोटी की एथलीट नहीं बन गई."

केवल अशोक को ही नहीं, बल्कि पूरे गांव को विश्वास है की द्युति रिओ से पदक लेकर आएगी और गोपालपुर गांव का नाम पूरी दुनिया में रोशन करेगी.

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