परतों में जीवन को तराशता कलाकार

मनीष पुष्कले
इमेज कैप्शन, स्टूडियो में पेटिंग करते मनीष पुष्कले.
    • Author, प्रीति मान
    • पदनाम, फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

मनीष पुष्कले अमूर्तन चित्रकार हैं. 1973 में भोपाल में जन्मे मनीष बचपन में नहीं जानते थे कि आगे चलकर वो चित्रकार बनेंगे.

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भू-विज्ञान में स्नातकोत्तर मनीष का खिंचाव हमेशा कला की ओर रहा और भारत भवन ने इसे निखारने में अहम भूमिका निभाई.

मनीष पुष्कले

मनीष स्कूल से भागकर भारत भवन की कला दीर्घा में लगे चित्र देखने जाया करते थे. वहां उनका परिचय स्वामीनाथन, गायतोंडे, एस एच रज़ा, अर्पिता सिंह, विवान सुंदरम आदि के चित्रों से हुआ.

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मनीष पुष्कले

हर कलाकार की अपनी शैली होती है, जिसे वह अपनी भाषा में समझने की कोशिश करते रहते थे.

मनीष पुष्कले

तभी मंजीत बावा की सलाह पर वह आर्ट रेस्टोरेशन का कोर्स करने दिल्ली आ गए.

मनीष पुष्कले
इमेज कैप्शन, चित्रकला की शुरुआत दरअसल बचपन के खेल से ही होती है, स्टूडियो में मनीष के बच्चे आदी और आद्या.

भोपाल में रहते हुए उन्होंने रंगों और रेखाओं के माध्यम से अपनी पहचान खोजने की शुरुआत कर दी थी.

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मनीष पुष्कले का आर्टवर्क
इमेज कैप्शन, कलाकार के स्टूडियो की हर वस्तु उसकी कला का हिस्सा होती है, स्टूडियो में रखी टेबल, कलर पैलेट भी बन जाती है.

किसी कला विद्यालय में प्रशिक्षित न होने की वजह से उन्हें कुछ समस्याओं का सामना तो करना पड़ा, लेकिन इससे उनके सीखने की चाहत और प्रबल ही हुई.

मनीष पुष्कले का आर्ट

कलाकार के स्टूडियो की हर वस्तु उसकी कला का हिस्सा होती है, स्टूडियो में रखी टेबल, कलर पैलेट भी बन जाती है.

मनीष पुष्कले का आर्ट

मनीष के चित्रों में कई परतें हैं, चित्र देखकर आभास होता है कि जैसे एक परत दूसरी परत को खोल रही है.

मनीष पुष्कले का आर्ट
इमेज कैप्शन, गुरु जो अब तक की यात्रा में पथ प्रदर्शक रहे.

देश-विदेश में कई एकल व समूह प्रदर्शनियों, आर्ट कैंपों, कई मशहूर किताबों के कवर डिज़ाइन और एक किताब 'सफ़ेद साखी' लिखने के बाद मनीष की यह कला यात्रा जारी है.

मनीष पुष्कले का आर्ट

उन्हें आइफैक्स अवार्ड, संस्कृति मंत्रालय से जूनियर रिसर्च फेलोशिप, कला कौस्तुभ सम्मान, स्पंदन चित्रकला सम्मान मिला है.

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