प्रदूषण के ख़िलाफ़ आंदोलन, हत्या का सबब?

झारखंड के सामाजिक कार्यकर्ता प्रह्लाद प्रसाद उर्फ़ लादू बाबू
इमेज कैप्शन, झारखंड में प्रह्लाद प्रसाद उर्फ़ लादू बाबू की हत्या कर दी गई है.
    • Author, नीरज सिन्हा
    • पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

झारखंड के चंदवा में एक राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता प्रह्लाद प्रसाद उर्फ़ लादू बाबू की हत्या से एक साथ कई सवाल खड़े हो गए हैं.

प्रह्लाद प्रसाद पिछले कई महीने से टोरी स्टेशन साइट पर कोयले से होने वाले प्रदूषण के ख़िलाफ़ मुखर थे.

आसपास के इलाके में उड़ने वाले कोयले की धूल के ख़िलाफ़ संघर्ष के लिए उन्होंने जन कल्याण समिति का गठन किया था. इसमें स्थानीय स्तर पर कई लोग जुटे थे.

चंदवा थाना के प्रभारी हरिलाल चौहान कहते हैं, "पुलिस इस मामले में कई बिंदुओं पर तहक़ीक़ात कर रही है, लेकिन कोल डस्ट के ख़िलाफ़ उन्होंने जो मुहिम छेड़ी थी, उस पर हमारी ख़ास नज़र है."

पुलिस अधिकारी चौहान ने हत्या की इस घटना में सुपारी (भाड़े पर हत्या) का इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई है.

सुपारी हत्या का शक़

मामले की छानबीन के दौरान पता चला है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फ़ैसले का असर कोयले के कारोबारी पर पड़ सकता था.

इसके अलावा उनके घरवालों ने बताया है कि 2010 के जिला परिषद् चुनाव में उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई थी.

सोमवार 14 जून को चंदवा में मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ता प्रह्लाद प्रसाद की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी.

प्रह्लाद प्रसाद कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता थे. उनकी पत्नी अनिता देवी लातेहार जिला परिषद की उपाध्यक्ष हैं.

इस घटना के बाद जन कल्याण समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने कोल डंपिग साइट पर कई वाहनों में आग लगा दी.

सड़क जाम करते हुए चंदवा बाजार भी बंद रखा गया. पुलिसकर्मियों पर पथराव किए गए.

प्रतिवाद मार्च

झारखंड वैश्य संघर्ष मोर्चा ने सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या की इस घटना के ख़िलाफ़ राजधानी रांची में प्रतिवाद मार्च निकाला है.

मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहू कहते हैं कि सरकार इस घटना की सीबीआई जांच कराए.

उनका आरोप है कि प्रह्लाद की हत्या कोयला माफ़ियाओं की साज़िश की वजह से हुई है.

दूसरी ओर प्रह्लाद प्रसाद के भाई रामबाबू का भी दावा है कि इस घटना में सौ फ़ीसदी कोयला के बड़े कारोबारी और माफ़ियाओं का हाथ है. वो कहते हैं कि ये 2010 में हुए चुनाव से जुड़ा मामला नहीं है.

रामबाबू कहते हैं, "हाल ही में झारखंड सरकार के मंत्री सरयू राय ने टोरी स्टेशन क्षेत्र का जायजा लिया था और प्रदूषण पर सख़्त नाराज़गी जताई थी."

जन कल्याण संघर्ष समिति से जुड़े एक युवा प्रमोद कहते हैं कि प्रह्लाद जी की अगुआई में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग प्रदूषण के ख़िलाफ़ आंदोलन से जुड़े थे.

प्रमोद का कहना है कि प्रह्लाद इसी लड़ाई का शिकार हो गए.

इस घटना से लोगों में ग़ुस्सा और दहशत है.

स्थानीय पत्रकार राजेश प्रसाद का कहना है कि लादू बाबू सामाजिक कार्यों की वजह से पूरे क्षेत्र में लोकप्रिय थे.

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