ब्लॉग: ताकि भारत-पाकिस्तान समझ पाएँ...

दिलीप कुमार
    • Author, वुसतुल्लाह ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
  • प्रकाशित

ज़रा वर्ष 1982 की फ़िल्म विधाता याद कीजिए. दिलीप कुमार उर्फ़ शोभराज और अमरीश पुरी उर्फ़ जगावर चौधरी, दोनों ही बड़े स्मगलिंग डॉन हैं.

एक सीन में इत्तेफ़ाक से दोनों एक ही विमान में सफ़र कर रहे हैं. दिलीप अपने पोते से मिलने जा रहे हैं और अमरीश पुरी दिलीप से उनके समुद्री जहाज़ का सौदा करने की बातचीत करने के लिए इस फ़्लाइट में हैं.

दिलीप जहाज़ का सौदा करने से इंकार कर देते हैं. लैंडिंग के बाद अमरीश पुरी दिलीप को अपने गाड़ी में बैठने की दावत देते हैं और दिलीप की खाली गाड़ी भी पीछे-पीछे चल पड़ती है.

दोस्ती और दुश्मनी

अमरीश पुरी

अमरीश पुरी दिलीप कुमार के साथ पिछली सीट पर बैठे उन्हें कुछ अख़बार दिखा रहे हैं.

और उनके बीच बाते हो रही हैं, "ये पढ़िए साहब, पुणे में सावंत परिवार का खून, कातिल का अब तक पता नहीं चला. मैंने करवाया था. और ये 12 फ़रवरी का अख़बार दमन के स्मगलर श्रीचंद का कार एक्सिडेंट. मुझसे दुश्मनी मोल लेने की कोशिश कर रहा था. "

"ये भी आप ही ने करवाया होगा".

"हां, काफ़ी समझदार हैं आप. "

"समझने की कोशिश कर रहा हूं. "

"लेकिन आप से तो दोस्ती का इरादा है हुज़ूर"

"और अगर दुश्मनी भी हो तो क्या"

"तो वो जो आपकी कार पीछे आ रही है ना, आप उसमें होते और मैं इसमें. और आपकी ज़िंदगी का फ़ैसला पल भर में हो जाता. "

"वो कैसे?"

"मैं इस बटन को दबा देता, ऐसे"

तब ही धमाका होता है और पीछे आने वाली गाड़ी उड़ जाती है.

"हाहाहाहाहाहाहहाहहाहहहाहा"

"आप हंस रहे हैं."

"जी हां, लेकिन वो मेरी गाड़ी नहीं थी. किसी ग़लत गाड़ी में बम रख दिया आपने."

"जी!"

" किसी बेकसूर की गाड़ी उड़ा दी. मेरी गाड़ी तो इसके पीछे आ रही है. ये सामने नारियल वाले की छापड़ी है. मेरे ख्याल में गाड़ी रोककर नारियल पी लें तो दिमाग दुरूस्त हो जाएगा. "

"ऐसे एक रेस्टोरेंट भी था नज़दीक ही"

"नज़दीक ही आपकी मौत भी थी चौधरी साहब. आज बच गए आप"

"मतलब"

"मतलब ये कि ये जो छिछोरापन आपने पीछे दिखाया है इसके बावजूद हमने सोचा कि आपको ज़िंदा रहने का एक और मौका दिया जाए."

"शोभराज जी आपकी बातों से दुश्मनी की बू आती है. "

"दुश्मनी की बू नहीं, दोस्ती की महक कहो. देखो किस तरह से तुम्हारी लाल गाड़ी से खींचकर हम तुम्हें यहां ले आए. वर्ना तुम इसी में बैठे होते और हमारे पास होती छड़ी और छड़ी में होती बारूद की सलाख और हम इसको खोलते यहां से, और दबाते ये छोटा सा बटन और तुम बारूद के साथ धुंआ बन जाते."

"कैसे?"

"ऐसे"

नुकसान और फ़ायदा

धमाका होता है और जगावर चौधरी की गाड़ी उड़ जाती है.

दिलीप कुमार कहते हैं, "बड़ा आदमी अगर बनना हो चौधरी तो छोटी हरकतें मत करना."

यह कहते हुए दिलीप कुमार अपनी गाड़ी में बैठकर आगे चले जाते हैं और अमरीश पुरी उर्फ जगावर चौधरी वहीं खड़ा रह जाता है.

हां तो मैं कहना यह चाह रहा था कि ये जो भारत और पाकिस्तान इन दिनों शोभराज और जगावर चौधरी बने फिर रहे हैं, इनके नेताओं को साथ बैठकर विधाता देखनी चाहिए ताकि छिछोरेपन के नुकसान और नारियल पानी के फ़ायदे समझ में आ सकें.

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