वसूली के लिए निकलने वाली महिलाएं

मंजू भाटिया
    • Author, मनीष शुक्ला
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

कर्ज की वसूली करने वाले व्यक्ति की मन में छवि एक हट्टे कट्टे, और थोड़े डरावने कद काठी के व्यक्ति की होती है जो कि बेहद अभद्र और शर्मसार करने वाली भाषा का प्रयोग करता है लेकिन कोई आपसे कहे कि यही वसूली का काम करने के लिए एक संभ्रात सी महिला है तो आपको यक़ीन नहीं होगा.

लेकिन लगभग 200 से 300 महिलाओं की एक ऐसी रिकवरी एजेंसी है जिसमें रिकवरी एजेंट के तौर पर सिर्फ लड़कियां काम करती हैं.

राजस्थान की मंजू भाटिया की रिकवरी कंपनी लगभग 20 बैंकों के लिए रिकवरी का काम करती है और इस अधिकृत जब्ती एवं वसूली एजेंसी ने बीते वर्ष 2014 में कई सरकारी बैंकों के करोड़ों रुपए उनके लिए वसूले हैं.

तरीका

मंजू भाटिया की टीम

इस विशिष्ट रिकवरी एजेंसी की संयुक्त प्रबंध निदेशक 28 साल की मंजू भाटिया बताती हैं कि वसूली का काम लड़कियों के ज़िम्मे रहता है और बैंक से निर्देश मिलते ही इन लड़कियों की एक टीम काम पर निकल पड़ती है.

वो अपने वसूली के तरीक़े को बयां करते हुए कहती हैं, "हम गुंडो की तरह कर्ज़दार के घर नहीं जाते बल्कि सबसे पहले उस क्षेत्र की पुलिस को जानकारी दी जाती है और फिर कर्ज़दार के पास जाकर शिष्टता से हम लोग पूछते हैं कि कर्ज़ न चुकाने के पीछे कारण क्या है."

लेकिन वसूली करने वाली मंजू अपनी पीठ ठोकना भी नहीं भूलतीं.

मंजू भाटिया

वो यहां तक दावा करती हैं कि कर्ज़दार की परेशानी सुनने के बाद उनकी टीम उसकी हरसंभव मदद भी करती है.

एक टीम में आठ से 10 लड़कियां, संबधित बैंक के अधिकारी और पुलिस का बैकअप रहता है.

मंजू बताती हैं कि कई बार उन्हें अपराधियों और अंडर वर्ल्ड से धमकी भी मिल चुकी है.

चुनौती

मंजू भाटिया
इमेज कैप्शन, अपनी मां के साथ मंजू भाटिया

मंजू एक घटना का ज़िक्र करती हैं, "इस काम में कई बार हमें ख़तरा भी होता है. एक बार हमारी टीम एक मकान खाली कराने पहुंची तो मकान मालिक ने अंदर से दरवाज़ा बंद कर लिया और मकान की मालकिन ने हमारी टीम पर एसिड से हमला करने की कोशिश की."

लेकिन लड़कियों की रिकवरी एजेंसी को कुछ आसानी भी होती है. मंजू के मुताबिक़ कई लोग लड़कियों की बात मान लेते हैं. क्योंकि उनकी टीम कर्ज़दारों से प्यार से बात करती है और कर्ज़ भरने के हर मुमकिन रास्ते के बारे में बताती है.

परिवार का साथ

मंजू की मां उनकी रिकवरी एजेंसी की निर्देशक हैं. फ़िलहाल उनकी टीम सिर्फ सरकारी बैंकों के लिए ही काम करती है लेकिन वो बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंको के लिए भी आगे काम कर सकती हैं.

उनकी एजेंसी में दो सौ से ज़्यादा महिलाएं हैं और वो दावा करती हैं कि ये महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा समेत कई राज्यों में सक्रिय है.

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