प्रेसिडेंसी पर हमले की भीड़ में तृणमूल नेता

ममता बनर्जी (फाइल)
इमेज कैप्शन, ममता बनर्जी सत्ता में आने के पहले दिन से ही विवादों में रही हैं.
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बांग्ला टेलीवीजन चैनल 24 घंटे ने एक तस्वीर प्रसारित की है जिसमें पार्टी के पार्षद पार्था बसु कोलकाता के मशहूर प्रेसिडेंसी कालेज पर हमले के लिए गई कथित भीड़ के साथ खड़े दिख रहे हैं.

बाद में भीड़ मशहूर कालेज में घुस गई, वहां तोड़-फोड़ की और छात्रों पर हमले किए.

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इस बात से इंकार किया है कि उसका कोई भी कार्यकर्ता प्रेसिडेंसी कालेज के हमले में शामिल था.

इस बीच प्रेसिडेंसी के छात्रों और शिक्षकों की एक रैली राईटर्स बिल्डिंग की तरफ़ बढ़ रही है. वहां पहुंचकर वो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक ज्ञापन सौंपेंगे.

हमले का जवाब

विश्वविद्यालय कुलपति मालाबिका सरकार के हवाले से कहा गया है कि कालेज परिसर में गए लोगों के हाथों में तृणमूल पार्टी के झंडे थे और वो नारे लगा रहे थे. उन्होंने गेट तोड़ दिया और कैंपस में घुस गए और छात्रों से मारपीट की.

मीडिया में एक महिला छात्रा का भी बयान ये कहते आया है कि उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें ये भी बलात्कार की धमकी भी दी गई थी.

ये हमला बुधवार को हुआ था जिसके बारे में कहा गया था कि वो दिल्ली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हुए हमले का जवाब था.

ममता बनर्जी के अलावा मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा के साथ भी धक्का-मुक्की की थी.

'दि्ल्ली सुरक्षित नहीं'

बाद में ममता बनर्जी ने यहां तक बयान दिया कि दिल्ली सुरक्षित नहीं है. वो विशेष विमान से वापस कोलकाता वापस चली गईं.

हमले से गुस्साई ममता बनर्जी ने केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम से तय अपनी मुलाक़ात को भी कैंसेल कर दिया था.

ख़बरें हैं कि इसके जवाब में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्य में कई दूसरी जगहों पर भी सीपीएम के लोगों पर हमले किए और तोड़-फोड़ की.

हाल में ही कोलकोता में सीपीएम के छात्र संगठन स्टूडेंट फेडेरेशन ऑफ इंडिया के एक सदस्य की 'पुलिस के बल प्रयोग के कारण मौत' हो गई थी.

ममता बनर्जी ने इस बहुत मामूली घटना बताया था.