कानपुर मुठभेड़: विकास दुबे गैंग की गोलियों से ज़िंदा बचने वाले पुलिसकर्मी की आपबीती

विकास दुबे का घर
इमेज कैप्शन, विकास दुबे का घर
    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

"रात का घुप्प अँधेरा था तभी हमें एक दो मंजिला घर की छत पर दो सिर दिखाई दिए. हमें लगा कि छत पर कुछ लोग हैं. मूवमेंट देखते ही हमने उस घर को घेरना चाहा. कुछ लोग आगे की ओर रहे और कुछ पीछे की ओर बढ़े. मैं अपने दो साथियों के साथ आगे की ओर था. हम कुछ कर पाते तभी बगल वाले घर से अचानक फायरिंग शुरू हो गई. बस आधे मिनट में ही हम पर बीसियों राउंड फायर कर दिए गए होंगे."

ये शब्द बिठूर के थानाध्यक्ष कौशलेंद्र प्रताप सिंह के हैं जिन पर विकास दुबे गैंग ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं.

सिंह के साथ-साथ उनके दो साथी भी इस घटना में गंभीर रूप से जख्मी हुए. लेकिन केपी सिंह ने अपने दो साथियों अजय सेंगर और अजय कश्यप की जान बचाई.

कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे गैंग के साथ मुठभेड़ को लेकर केपी सिंह अभी भी सोच में हैं कि जो कुछ हुआ, वो कैसे हुआ? उनके लिए अभी भी ये बात एक पहेली बनी हुई है कि आख़िर विकास दुबे गैंग ने इस तरह का कदम क्या सोचकर उठाया.

केपी सिंह ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए गुरुवार की रात का पूरा वाकया बताया.

रात के 11:30 बजे आया एक फ़ोन

के पी सिंह बताते हैं कि गुरुवार रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे उनके पास चौबेपुर थाने के एसओ विनय तिवारी का फ़ोन आया था.

वो बताते हैं, "मेरे पास लगभग 11 - 11:30 बजे एक फ़ोन आया कि "आ जाइए, एक दबिश के लिए चलना है. शिवराजपुर थाने से फोर्स आ रही है और बिल्हौर सीओ साहब भी आ रहे हैं. पड़ोसी थाने का मामला था और हम लोग सामान्यत: इस तरह का सहयोग करते रहते हैं. तो मैं तैयार हुआ और अपनी फोर्स को तैयार करके निकल पड़ा."

"इसके बाद हमारी गाड़ियां रास्ते में ही मिलीं और हम बिकरू गांव पहुंचे. जब हम गाँव में दाखिल हुए तो वहां घुप्प अंधेरा था. हमें कुछ भी दिखाई नहीं पड़ रहा था."

वीडियो कैप्शन, कानपुर एनकाउंटर के मुख्य अभियुक्त विकास दुबे का घर तोड़ा गया

सामने दिखाई दी जेसीबी

इस मुठभेड़ से जुड़ी जानकारी में अब तक ये सामने आया है कि एक जेसीबी मशीन को विकास दुबे के घर के बाहर की सड़क को ब्लॉक करने की मंशा से खड़ा किया जाए. लेकिन अब तक ये जानकारी सामने नहीं आई कि ये मशीन किसके नाम पर पंजीकृत है और इसे सड़क के बीचोंबीच किसने खड़ा किया.

जेसीबी के बारे में केपी सिंह बताते हैं, "जब हमें जेसीबी दिखी तो हमें लगा कि कुछ तो गड़बड़ है क्योंकि कोई जेसीबी को इस तरह खड़ा नहीं करेगा. इसके बाद जब हमें एक घर की छत पर दो लोग दिखाई दिए तो उन्हें घेरने के मकसद से हम आगे बढ़े. कुछ लोग घर के आगे और कुछ पीछे की ओर से गए."

"मैं अपने दो साथियों के साथ घर के आगे की ओर से गया था. हम कोई पोजिशन लेते इससे पहले ही बगल वाली छत से फायरिंग शुरू हो हुई. फायरिंग इतनी ताबड़तोड़ थी कि आधे मिनट के अंदर हम पर बीसियों राउंड फायर किए गए होंगे. इसके बाद हम सब लोग अलग-थलग पड़ गए."

"हम तीन लोग एक तरफ रह गए और बाकी लोग अलग-अलग जगहों पर चले गए. मेरे साथ अजय कश्यप और अजय सेंगर थे. मैंने अपनी पिस्तौल निकाली और उस ओर फायर किया जहां से फायरिंग हो रही थी. लेकिन मुझे लगा कि मेरी पिस्तौल की रेंज उतनी नहीं थी कि गोली वहां तक पहुंच सके. हमें कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और ऐसी स्थिति में हम दीवार के सहारे खड़े हुए थे. तभी मेरे दोनों साथियों ने बताया कि उन्हें गोलियां लगी हैं."

विकास दुबे का घर अब तोड़ दिया गया है.
इमेज कैप्शन, विकास दुबे का घर अब तोड़ दिया गया है.

साथियों को पहुंचाया अस्पताल

विकास दुबे के गैंग के साथ हुई इस मुठभेड़ में आठ पुलिसकर्मियों की मौत हुई है. और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

केपी सिंह ने गोलियों से घायल अपने दो साथियों को किसी तरह अस्पताल पहुंचाया. वो बताते हैं, "मेरे साथियों ने मुझे बताया कि सर आपके भी खून निकल रहा है. लेकिन मुझे बिल्कुल इस बात का अहसास नहीं हुआ ता. मुझे लगा कि मेरी वर्दी पर जो खून है, वो मेरे साथियों का ही है. बाद में मुझे अहसास हुआ कि मेरे हाथ में गोली लगी थी. अजय सेंगर को पेट में गोली लगी थी. चूंकि मेरा मेडिकल का बैकग्राउंड है तो मुझे ये पता था कि पेट में गोली लगना कितना गंभीर हो सकता है."

"इसके बाद मैंने कवर फ़ायर देते हुए अपने दो साथियों को उस जगह से बाहर निकाला जहां. हम किसी तरह वहां पास में मौजूद एक ट्रैक्टर ट्रॉली के पीछे जाकर छिपे. हमारे शरीर से खू़न बह रहा था और दूसरी तरफ ताबड़तोड़ गोलियां चल रही थीं. हम किसी तरह जवाबी फ़ायरिंग करते हुए बचने की कोशिश कर रहे थे."

वो बताते हैं कि "हम ऐसी हालत में थे तभी आवाज़ आई - बम मारो, बम."

विकास दुबे गैंग की ओर से पुलिसकर्मियों पर धारदार हथियारों के साथ-साथ बमों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है.

केपी सिंह बताते हैं, "हम किसी तरह ट्रैक्टर के पीछे छिपे थे कि तभी किसी ने हमें देख लिया और कहा कि 'बम मारो, बम'. हमें लगा कि इन्होंने हमें देख लिया है और अब बम मार सकते हैं तो हम एक कच्चे मकान में घुसे. हमने सोचा कि हम दूसरी ओर से होकर बाहर निकल जाएंगे. लेकिन वहां कोई दूसरा रास्ता नहीं था. इस पर हम तत्काल बाहर निकले और हमें एक रास्ता मिल गया जिससे होते हुए हम गाड़ी तक पहुंचे."

विकास दुबे के घर के सामने का नज़ारा
इमेज कैप्शन, विकास दुबे के घर के सामने का नज़ारा

ज़िंदगी और मौत के बीच संघर्ष

इस मुठभेड़ में अब तक ये सामने आया है कि पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई जिसमें आठ पुलिसकर्मियों की मौत हुई और कई घायल हुए.

केपी सिंह कहते हैं, "रास्ते में जब हम अस्पताल की ओर जा रहे थे. तब मुझे पता चला कि मेरे पैर में भी एक गोली लगी है लेकिन उस वक़्त मेरे साथियों की हालत बिगड़ने लगी थी. मैं लगातार उनके साथ बात करता रहा और उनको हौसला बंधाता रहा कि उन्हें कुछ नहीं होगा."

"हम तीनों लोगों की जान बच गई है लेकिन दुख सिर्फ इस बात का है कि हम अपने चौकी इंचार्ज और दूसरे साथियों को नहीं बचा पाए क्योंकि वो लोग दूसरी दिशा में चले गए और इस पूरी घटना के दौरान हमसे बिछड़ गए."

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इस मुठभेड़ में घायल हुए केपी सिंह, अजय सेंगर और अजय कश्यप समेत तमाम पुलिसकर्मियों का इलाज़ जारी है. घटना में मारे पुलिसकर्मियों को सम्मान सहित विदाई दी गई है.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने जिस जेसीबी से पुलिस का रास्ता रोका गया था, उसी जेसीबी से विकास दुबे के किलेनुमा घर को गिरा दिया है.

एसटीएफ़ की कई टीमें विकास दुबे की तलाश में चप्पे-चप्पे पर निगाह बनाए हुए हैं.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतक पुलिसकर्मियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रूपये की मदद देने की घोषणा की है. साथ ही परिवार को पेन्शन और परिवार के एक सदस्य के लिए नौकरी देने की घोषणा भी की है.

सवाल और जवाब

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    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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