‘रिदम हाउस’ की रिदम गड़बड़ाई

    • Author, चिरंतना भट्ट
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

मुंबई के कालाघोड़ा इलाके में वर्ष 1940 में शुरु हुआ म्यूज़िक स्टोर 'रिदम हाउस' संगीत के चाहने वालों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है.

पर अब ख़बरें आ रही हैं कि बदलते वक्त के साथ इस म्यूज़िक स्टोर में भी बदलाव हो रहा है और यह सिर्फ़ ऑनलाइन स्टोर बनकर रह जाएगा.

रिदम हाउस न सिर्फ़ अपने कलेक्शन बल्कि अपने स्टाफ़ के लिए भी मशहूर रहा है जिन्हें संगीतकार और उनकी रचनाओं के नाम मुंहज़बानी याद रहते थे.

अगले साल फ़रवरी से 'रिदम हाउस' के बंद हो जाने की खबर संगीत-प्रेमियों के लिए किसी झटके की तरह है.

संगीत जगत से जुड़ी कई मशहूर हस्तियों ने इस स्टोर से जुड़ी अपनी यादें बीबीसी के साथ साझा की हैं.

मशहूर तबला वादक फ़ज़ल कुरैशी जो ज़ाकिर हुसैन के छोटे भाई हैं, 'रिदम हाउस' को बेहद ख़ास मानते हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मेरा पहला एलबम मैंने जब रिदम हाउस के शेल्फ़ पर देखा तब दिल को अलग ही तसल्ली हुई थी. जो रेकॉर्ड पूरे शहर में कहीं नहीं मिलते वह ‘रिदम हाउस’ में ज़रुर मिलते हैं."

वो कहते है,"डिज़िटल होती दुनिया में समय सभी के लिए नई चुनौतियां ला रहा हैं. ऐसे में 'रिदम हाउस' अब तक चला, वह भी बड़ी बात है."

संगीतकार, गायक शंकर महादेवन के लिए 'रिदम हाउस' संगीत का पर्याय है. वह कहते हैं, "सीडी या कोई कैसेट खरीदने की सोचते थे तो सबसे पहले 'रिदम हाउस' याद आता है."

शंकर महादेवन के शब्दों में किसी दुर्लभ से दुर्लभ रिकॉर्डिंग को भी यहां ढूंढा जा सकता था और उनकी संगीत शिक्षा में इस स्टोर का बहुत बड़ा हाथ रहा है.

इस स्टोर के बंद होने की ख़बर पर ग़ज़ल गायिका पिनाज़ मसानी ने भी हैरानी जताई, वो बताती हैं, " मैं अपने कॉलेज से निकलकर संगीत सुनने के लिए अक्सर ‘रिदम हाउस’ जाया करती थी और खुद गायिका बनने के बाद वहां जाने का मज़ा और भी बढ गया."

बांसुरी वादक पंडित हरि प्रसाद चौरसिया रिदम हाउस को किसी मंदिर के बंद होने जैसा मानते हैं.

वे कहते हैं, "रिदम हाउस' का बंद होना मानो किसी मंदिर के बंद होने जैसा है, भगवान ऑनलाइन दिख जाएगा तो मंदिर बंद कर देंगे क्या? कलाकारों के प्रमोशन, नए कलाकारों की जानकारी सब रिदम हाउस से होता आया है. विदेशी भी भारतीय संगीत की जानकारी के लिए उधर जाते हैं.”

इस स्टोर को बंद करने के पीछे आर्थिक कारणों के साथ-साथ कई निजी कारण भी हैं और स्टोर के मालिक महमूद कर्माली के शब्दों में वो इस बात को ज़्यादा तूल नहीं देना चाहते क्योंकि यह वाकई एक मुश्किल फ़ैसला है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>