'धंधे' में अभिनय का नया फंडा

    • Author, चिरंतना भट्ट
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

थिएटर कलाकारों को तो हमने अक्सर कॉरपोरेट जगत में काम कर रहे लोगों की नक़ल करते देखा है, लेकिन कॉरपोरेट के कर्मचारियों को थिएटर कलाकारों से ट्रेंनिंग लेते कम ही देखा होगा.

अब प्रतिस्पर्धा और चुनौतियों से लड़ने के लिए कॉरपोरेट कंपनियों के कर्मचारी थिएटर और नाटक से जुड़े लोगों से मदद ले रहे हैं.

आम तौर पर कर्मचारियों के कामकाज के तरीक़े में बदलाव लाना या उन्हें कोई ट्रेनिंग देने का काम उस कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) का होता है.

लेकिन अब इसके लिए कॉरपोरेट के कर्मचारी थिएटर आर्टिस्ट की ओर रुख़ कर रहे हैं.

'पॉवर पॉइंट' हुआ पुराना

दस साल से थिएटर में काम कर रहीं युकी इलियास ने बीबीसी से कहा, "कॉरपोरेट लोगों को 'प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' देना उतना ही ज़रूरी है, जितना उनके लिए पॉवर पॉइंट पर प्रेज़ेंटेशन देना."

माइक्रोसॉफ़्ट और डैलॉइट जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों में ट्रेनिंग दे चुकीं युकी बताती हैं, "कर्मचारियों को 'रीयल टाइम' यानी किसी प्रकार की घटना का नाट्य रूपांतरण कर उसे सुलझाने की ट्रेनिंग देना बहुत उपयोगी होता हैं."

युकी का मानना है कि ऐसी ट्रेनिंग से कर्मचारियों के विचार ही नहीं, व्यवहार में भी काफी फ़र्क आता है.

ढर्रे से हटकर सोचना

कॉरपोरेट की थिएटर ट्रेनिंग में कर्मचारियों को आपसी संवाद, साथी कर्मचारियों से जुड़ाव और पर्सनैलिटी डवलपमेंट जैसे गुणों पर काम कराया जाता है.

ट्रेनी से लेकर चेयरमैन तक के पदाधिकारी इसमें हिस्सा लेते हैं.

डैलॉइट में काम कर रहे दीपक रामकृष्णन अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताते हैं, "सालों से अगर आप एक ही पद या स्थिति में काम कर रहे हैं तो उसमें नई संभावनाएं कैसे ढूंढ़ी जा सकती हैं, वह हमें इस ट्रेनिंग में सीखने को मिलता है."

वहीं, यूटोपिया कम्युनिकेशन के प्रीतीश सोढ़ा कहते है, "कर्मचारियों को ढर्रे से हटकर सोचने में यह ट्रेनिंग बहुत मददगार है."

अलग सोच एक मंच पर

प्रीतीश का मानना है कि थिएटर से जुड़े खेलों से कर्मचारियों में अंदर की झिझक कम होती है.

वो उदाहरण देते हैं,"किसी घटना या हादसे का नाट्य रूपांतरण करने के बाद उसे सबके सामने एक मंच पर प्रस्तुत किया जाता है जिससे सभी लोग उस घटना का हिस्सा बन जाते हैं."

प्रीतीश आगे कहते हैं, "ऐसा करने से हमें उस हादसे या घटना को सुलझाने के अलग-अलग तरीक़े मिल जाते हैं."

इस तरह की ट्रेनिंग और थिएटर के ज़रिए हर स्थिति का संपूर्ण मूल्यांकन और कर्मचारियों की मनःस्थिति जानना कॉरपोरेट्स के लिए आसान हो गया है और इसी वजह से इस तरह की ट्रेनिंग लोकप्रिय होती जा रही है.

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