यहाँ पहले ही पूरा हो गया मोदी का सपना

करजात गाँव, महाराष्ट्र
    • Author, श्वेता पांडेय
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

सुनने में हैरत होती है लेकिन भारत में एक ऐसा गांव है जहां शौचालय न बनाने पर सज़ा दी जाती है.

सज़ा के तौर पर शौचालय न बनवाने वाले का नाम एक दीवार पर लिख दिया जाता है.

आदमी जब शौचालय बनवा लेता है तो उसका नाम दीवार से हटा दिया जाता है और उसे इनाम के तौर पर पांच हज़ार रुपए भी दिए जाते हैं.

करजात गाँव, महाराष्ट्र

नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत अभियान' से काफ़ी पहले से सफ़ाई अभियान चला रहे इस जागरूक गांव का नाम है, तमनाथ.

महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले के कर्जत तहसील में स्थित तमनाथ गांव दूसरे गांवों की तुलना में काफ़ी साफ़-सुथरा है.

करजात गाँव, महाराष्ट्र

यहां नालियां और सड़कें बिल्कुल साफ़ दिखती हैं. गांव में पशुओं को बांधने के लिए भी अलग जगह है.

शुरुआत

संतोष बोईर, करजात गाँव, महाराष्ट्र
इमेज कैप्शन, गाँव में सफाई अभियान शुरू करने वाले संतोष बोईर.

सफ़ाई के इस अभियान की शुरुआत तकरीबन पंद्रह साल पहले संतोष भोईर ने की थी. उन्हें इसकी प्रेरणा उनके पिता से मिली.

संतोष ने बीबीसी हिन्दी से कहा, “मेरे पिता जी की आदत थी कि सड़क पर पड़े पत्थर को भी सही जगह पर रख दें और उनसे ही यह आदत मुझमें भी आ गई."

करजात गाँव, महाराष्ट्र

संतोष कहते हैं, "पहले मेरे घर के सामने ही गांव वाले गोबर डाल दिया करते थे जिससे मक्खियां आदि भिनभिनाती थीं. इससे परेशान होकर पहले मैंने गोबर के लिए अलग से स्थान बनवाया. इसके बाद मैं किसी से कहने के बजाए खुद ही नालियों और सड़कों को साफ़ करने लगा. मुझे ऐसा करते देख बाकी लोग भी इस सफ़ाई से जुड़ गए.”

संतोष बताते हैं कि अब गांववाले खुद-ब-खुद सफ़ाई रखने लगे हैं.

उनके अनुसार साफ़-सफ़ाई के चलते दूसरे गांव के लड़कों की तुलना में इस गांव के लड़कों के लिए शादी के रिश्ते भी ज़्यादा आते हैं.

छुट्टी के दिन सफ़ाई

करजात गाँव, महाराष्ट्र

तकरीबन 1500 की आबादी वाले इस गांव को साफ़ कैसे किया जाता है?

इसके जवाब में गांव की एक वरिष्ठ महिला भगवान गुंडगूडे ने बताया, “जब भी हम सबके पास छुट्टी होती है, उस दिन मिलकर सफ़ाई करते हैं.”

अरुणा भोईर, करजात गाँव, महाराष्ट्र
इमेज कैप्शन, अरुणा भोईर दूसरी महिलाओं के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाती हैं.

वहीं गृहणी अरुणा भोईर कहती हैं, “इस गांव की महिला मंडली मिलकर साफ़-सफ़ाई के विषय पर जागरूकता फैलाने के लिए अन्य गांवों में भी जाती हैं.”

अरूणा ने बताया कि गांव की स्वच्छता का बखान उनके मायके में भी होता है.

प्रभाव

करजात गाँव, महाराष्ट्र
इमेज कैप्शन, गाँव की सरपंच रतन गोपाल वाघमारे.

तमनाथ सिरसा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला यह गांव आदिवासी बहुल है.

गाँव की सरपंच रतन गोपाल वाघमारे कहती हैं, “तमनाथ को देखकर अन्य गांव भी सफ़ाई रखने लगे हैं. हमने चालीस शौचालय बनवाए हैं."

वो बताती हैं, "पहले आदिवासी महिलाएं घर में शौचालय बनवाने के ख़िलाफ़ थीं, लेकिन मैंने खुले में शौच जाने से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया और सफ़ाई की अहमियत बताई. तब जाकर वे मानीं."

करजात गाँव, महाराष्ट्र

तमनाथ की सफ़ाई को देखते हुए आस-पास के गांव भी अब इस अभियान से जुड़ गए हैं.

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