क्या करना चाहते हैं 'पीके' के गीतकार?

स्वानंद किरकिरे
    • Author, सुप्रिया सोगले
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

"मैं जहां भी जाता हूं लोग मुझसे 'ओ री चिरैया' गाने को कहते हैं."

ये कहना है गीतकार स्वानंद किरकिरे का जिन्होंने कई फ़िल्मों के गीत लिखे हैं.

18 दिसंबर को रिलीज़ हुई फ़िल्म 'पीके' के गाने भी स्वानंद ने लिखे हैं.

पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ चुनिंदा अंश.

राजकुमार हिरानी और निर्देशन

राजकुमार हिरानी

राजकुमार हिरानी के साथ स्वानंद ने काफ़ी काम किया है. स्वानंद ने 'पीके' से पहले 'लगे रहो मुन्नाभाई' और 'थ्री इडियट्स' के लिए गाने लिखे जिनके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.

हिरानी के बारे में स्वानंद ने कहा, "राजू हमें सिर्फ़ स्क्रिप्ट सुनाते हैं और गाने की सिचुएशन बताते हैं और एक ही बात समझाते हैं कि ये कहानी है और ये चरित्र है और इन्हीं के लिए गाने लिखने हैं."

उन्होंने कहा, "हमें गाने ढूंढने पड़ते हैं जो फ़िल्म की कहानी को आगे ले जाएं और उस फ़िल्म के भाव को अच्छी तरह दर्शाए."

स्वानंद गाने लिखते हैं, कंपोज़ करते हैं, गाते हैं और अभिनय भी करते हैं. पर सबसे ज़्यादा मज़ा उन्हें इनमें से किस काम में आता है.

थ्री इडियट्स
इमेज कैप्शन, आमिर ख़ान अभिनीत 'थ्री इडियट्स' बॉक्स ऑफ़िस पर सफल रही थी.

इस सवाल पर स्वानंद कहते हैं, "ये कहना थोड़ा मुश्किल होगा कि मुझे किस चीज़ में सबसे ज़्यादा मज़ा आता है. पर हां, एक चीज़ जो मैं करना चाहता हूं और जो मैंने अभी तक नहीं की वो है फ़िल्म निर्देशन."

डर गए थे मां बाप

स्वानंद इंदौर के रामबाग में पले-बढ़े. उनके माता-पिता दोनों शास्त्रीय गायक हैं.

जब स्वानंद ने अपने घर में बॉलीवुड जाने की बात की तो क्या उनके माता-पिता ने किसी तरह की असहमति जताई या वो ख़ुश हुए?

इस पर स्वानंद कहते हैं, "जिस समय मैंने बॉलीवुड में जाने की अपनी ख़्वाहिश जताई, मेरे मां-बाप दोनों डर गए थे. वे चाहते थे कि मैं डॉक्टर, इंजीनियर या चार्टेड अकाउंटेंट बन जाऊं."

स्वानंद किरकिरे

उन्होंने कहा, "मेरे माता-पिता ने कहा कि अगर तुम्हें नाटक का शौक़ है तो कहीं नौकरी कर लो, फिर करते रहना नाटक. पर अपना मन थोड़ा ज़्यादा बावरा था तो मैं निकल पड़ा अपनी राह पर. आज मेरे माता-पिता काफ़ी ख़ुश हैं."

स्वानंद का कहना है कि अगर उन्हें बॉलीवुड में कुछ बदलना होगा तो वो फ़िल्म के लेखकों का मेहनताना बदल देंगे क्योंकि उनकी हालत गीतकारों से भी बुरी है.

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