रिव्यू: इस 'उंगली' से घी निकलेगा?

'उंगली'
    • Author, मयंक शेखर
    • पदनाम, फिल्म समीक्षक
  • प्रकाशित

फ़िल्म: 'उंगली'

कलाकार: इमरान हाशमी, कंगना रानाउत

निर्माता: करण जौहर

निर्देशक: रेंसिल डीसिल्वा

रेटिंग: *1/2

आपने ज़रूर कई वीडियो या फ़िल्म के प्रोमो देखे होंगे जिसमें हाथ की बीच वाली उंगली को धुंधला (ब्लर) करके दिखाया जाता है.

ऐसा करने के पीछे हमारी मंशा होती है कि बच्चे इस नए तरह की साइन लैंग्वेज ना सीखे.

क्योंकि इस इशारे को अभद्र समझा जाता है.

इस फ़िल्म में 'अच्छे इरादों' वाले एक गैंग के सदस्य इसी उंगली को दिखाकर एक दूसरे को संकेत देते हैं.

सेंसर ने परिपक्वता दिखाते हुए इसे 'अभद्र' नहीं माना है.

'सिस्टम' से लड़ाई की कहानी

'उंगली'

फ़िल्म में हमारी व्यवस्था यानी सिस्टम को खलनायक बताया गया है.

वो ऑटो वाले जो सवारी को ले जाने से मना कर देते हैं, आरटीओ अधिकारी जो बिना टेस्ट लिए ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर देते हैं, यहाँ तक कि पूरी मुंबई पुलिस और तमाम राजनेता. सभी को भ्रष्ट बताया गया है.

वैसे सच कहा जाए तो हम सभी किसी ना किसी तरीके से भ्रष्ट हैं. कुछ कम, कुछ ज़्यादा.

ये भी सच है कि इस भ्रष्टाचार की समस्या का निदान होना ज़रूरी है.

फ़िल्म के हिसाब से इसे सिस्टम से बाहर रहकर, कानून हाथ में लेकर ही सुलझाया जा सकता है.

क्योंकि सिस्टम अपने आप में ही एक 'समस्या' है.

फ़िल्म की थीम: भ्रष्टाचार

'उंगली'

फ़िल्म में दिखाई गई समस्याएं दक्षिण मुंबई में हरने वाले अमीर वर्ग को बड़ा परेशान करती हैं.

सड़कों पर गड्ढे, ख़राब रोड, भ्रष्ट राजनेता.

लेकिन भारत के बाकी हिस्से के लोगों के लिए अब ये कोई 'समस्याएं' ही नहीं रह गई हैं.

उंगली गैंग, भ्रष्टाचारियों को और समाज के मासूम लोगों को परेशान करने वालों के स्टिंग ऑपरेशन कर उन्हें बेनक़ाब करती है.

जैसे भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई के प्रतीक के तौर पर अरविंद केजरीवाल उभरे थे.

ये अलग बात है कि बाद में मुख्यधारा के मीडिया ने किन्ही ख़ास वजहों और कुछ दबावों के मद्देनज़र उन्हें उपेक्षित कर दिया हो.

लेकिन शायद फ़िल्म के पीछे की प्रेरणा केजरीवाल ही हैं.

'उंगली'

उंगली गैंग लेकिन कई क़दम आगे बढ़कर काम करता है.

वो भ्रष्ट लोगों को पकड़ता है, उन्हें मारता है, बेइज़्ज़त करता है और उन्हें अगवा भी कर लेता है.

वो इस पूरे मिशन की वीडियो क्लिप बनाती है जिन्हें कई समाचार चैनल दिखाते हैं.

दर्शक ख़ुश हो जाते हैं और 'इंसाफ़' हो जाता है.

कलाकारों के साथ इंसाफ़ नहीं

इमरान हाशमी

ऐसे परेशान करने वाले सीन इस रियलिस्टिक होने का दावा करने वाली फ़िल्म में बार-बार दिखाए गए हैं.

उंगली में कई नामचीन कलाकारों को उनकी प्रतिभा से बहुत कमतर रोल मिला है.

शायद करण जौहर से अच्छे संबंधों की वजह से इन कलाकारों ने ये फ़िल्म की.

'उंगली'

मेरे ख़्याल से सबके साथ बेहतरीन संबंध रखने की कला के चलते करण जौहर को हाउ टू विन फ़्रेंड्स एंड इन्फ़्लूएंस पीपल नाम की किताब लिख डालनी चाहिए.

रणदीप हुडा ने फ़िल्म में उंगली गैंग के लीडर की भूमिका निभाई है. गैंग में कंगना रानाउत भी हैं.

छोटे और गैर-अहम रोल में महेश मांजरेकर और नेहा धूपिया जैसे कलाकार भी हैं.

ओह, भूल गया. फ़िल्म में इमरान हाशमी भी तो हैं.

बचकानी फ़िल्म

'उंगली'

फ़िल्म में उंगली गैंग के सदस्य राजनेताओं के घर पर, सार्वजनिक जगहों पर और अधिकारियों के घर पर अपनी हरकतों के निशान छोड़ जाते हैं और उसके बावजूद कोई उन्हें पकड़ नहीं पाता.

इससे ज़ाहिर होता है कि भारत में 'अक्षम' लोगों की कितनी भरमार है.

पुलिस, रिश्वत लेकर काम करे या बिना लिए करे.

उसकी अक्षमता पर रत्ती मात्र भी असर नहीं पड़ता.

शायद हमारा सिस्टम उतना ही नौसिखिया है जितनी ये फ़िल्म.

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