ख़ुद की फ़ोटो चिपकाइए और काम पाइए!

सेल्फ़ी
    • Author, विदित मेहरा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

अपना काम शुरू करना हो तो बस अपनी एक तस्वीर खींचिए और काम हो गया.

घर में अगर कोई बेकार सामान पड़ा है या फिर कोई ऐसी चीज़ जिसे आप एक शौक़ के कारण ले आए पर अब उसका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है. अब वो चीज़ आपके घर में बस जगह घेरे हुई है और आप उससे निजात पाना चाहते हैं.

ऐसे में आपके ज़हन में दो चीज़ें आएंगी. पहली तो ये कि आप उसे अपने किसी रिश्तेदार को दे दें और दूसरी कि आप उसे बेच दें.

अब जब बेचने की बात आपके दिमाग़ में आती है तो आजकल इंटरनेट पर ऐसी कई साइट्स हैं जहां इस्तेमाल हुआ सामान ख़रीदा और बेचा जाता है. आप जिस चीज़ को बेचना चाहते हों उसकी एक तस्वीर खींचिए और डाल दीजिए, बस काम हो गया.

लेकिन ऐसी कई साइट्स पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपना हुनर बेच रहे हैं. कोई भाषा पढ़ा रहा है, कोई फ़िट रहना सिखा रहा है और कोई गिटार सिखा रहा है.

मैंने कुछ ऐसे ही लोगों से बात की और ये जानना चाहा कि उन्होंने अपना ही विज्ञापन बनाने के बारे में क्यों सोचा, ख़ुद की फ़ोटो क्यों लगाई और क्या उन्हें इससे कोई फ़ायदा भी हुआ?

फ़ोटो बताती है सब कुछ

अनुरागिनी हल्क शिद्दत

अनुरागिनी एक ट्रेन्ड फ़िटनेस ट्रेनर हैं और उन्होंने अपने विज्ञापन में अपनी तस्वीर लगाई है.

वो बताती हैं, "देखिए हम इंसान हर चीज़ को चाहे वो खाने की हो या पहनने की हो, देख कर उस पर विश्वास करते हैं. क्योंकि मैं एक फ़िटनेस ट्रेनर हूं तो मेरी फ़ोटो से लोगों को ये पता चल जाएगा कि मैं बिलकुल फ़िट हूं और मैं उन्हें फ़िटनेस के बारे में बता सकती हूं."

क्या उनको इससे कोई फ़ायदा हुआ? क्या उनको किसी ने इस सिलसिले में फ़ोन किया?

अनुरागिनी कहती हैं, "मुझे बहुत सारे लोगों ने फ़ोन किया. और तो और मुझे न्यूयॉर्क में रह रहे एक लड़के ने फ़ोन किया और कहा कि मैं उनकी मां को प्रशिक्षित कर दूं."

बिचौलिए रहते हैं दूर

रचना सचदेव

अनुरागिनी की ही तरह रचना ने भी अपनी तस्वीर अपने विज्ञापन में लगाई और वो फ़्रेंच भाषा सिखाती हैं.

रचना कहती हैं, "तस्वीर से आपकी शख्सियत झलकती है, आपका आत्मविश्वास झलकता है इसीलिए मैंने अपनी तस्वीर लगाई. जिन लोगों को मेरे काम में दिलचस्पी है वो मुझे फ़ौरन फ़ोन कर देते हैं और यहां अपना विज्ञापन देने से मैं बिचौलियों से भी बच जाती हूं."

<link type="page"><caption> ये नौकरी भारतीयों के लिए नहीं है</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/08/120828_australia_advertisement_sa.shtml" platform="highweb"/></link>

उन्होंने कहा, "शहर में कई सारे बिचौलिए हैं जो आपको किसी कंपनी से मिलवाते हैं. डील होने के बाद आपको उन्हें पैसा देना होता है. इस विज्ञापन को देने के बाद मुझे कंपनी के लोग डायरेक्ट ही कॉल करते हैं और मुझे किसी बिचौलिए की ज़रूरत नहीं पड़ती."

जो दिखता है वो बिकता है?

चन्द्र देब राय

जहां इन दोनों का काम अच्छा ख़ासा चल पड़ा, वहीं, दार्जिलिंग के चन्द्र देब राय को इसका कोई ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ. राय गिटार के साथ दूसरे वाद्य यंत्र सिखाते हैं और उन्होंने अपनी कई सारी तस्वीरें अपने विज्ञापन के साथ लगाई रखी हैं.

वे कहते हैं, "मुझे फ़ोटो डालने से ज़्यादा फ़ायदा नहीं हुआ. शुरू में बस एक-दो फ़ोन आए और उसके बाद ज़्यादा फ़ोन नहीं आए. फ़ोटो मैंने इसीलिए डाली क्योंकि जो दिखता है वही बिकता है."

अब जो दिखे वो बिके भी ऐसा मुमकिन तो नहीं, पर आज के दौर में नौकरी के लिए अपना बायोडाटा देना ही काफ़ी नहीं है.

लोग समझदार बन रहे हैं और नौकरी मिलने के किसी भी अवसर को हाथ से नहीं निकलने देना चाहते. फिर चाहे वो अपनी फ़ोटो डालकर अपने हुनर को ही बेचना क्यों न हो!

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