यमन के ताइज़ से ग्राउंड रिपोर्ट: युद्ध के बीच जानिए कैसा है यहाँ का जनजीवन

इमेज स्रोत, Liam Weir/BBC
- Author, नवाल अल-मग़ाफ़ी
- पदनाम, सीनियर इंटरनेशनल इन्वेस्टिगेशन्स कॉरेस्पोंडेंट, बीबीसी वर्ल्ड
- ........से, ताइज़, यमन से
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 11 मिनट
'यह पहला ड्रोन है' दक्षिण-पश्चिमी यमन में हमारे साथ चल रहे सैनिक ने कहा. 'आमतौर पर इसके बाद हमला होता है.'
हम झाड़ियों के नीचे छिप गए. ऊपर ड्रोन की भनभनाहट लगातार तेज़ होती जा रही थी. इसके बाद हम दोबारा गाड़ी में बैठे और वहाँ से निकल गए.
क़रीब 10 मिनट बाद एक के बाद हमलों की तेज़ आवाज़ें सुनाई दीं. हालांकि, यह साफ़ नहीं था कि हमले कहाँ हुए थे.
ताइज़ शहर के दक्षिण-पश्चिम में फैले पहाड़ों के बीच यह समझना मुश्किल है कि आमने-सामने की लड़ाई वाला इलाक़ा कहाँ से शुरू होता है.
सऊदी अरब के समर्थन वाली सरकार के समर्थक बल हूती विद्रोहियों को पीछे धकेलने की कोशिश कर रहे हैं.
हूती विद्रोही इस महीने की शुरुआत में रेड सी के तट से तेज़ी से आगे बढ़े थे. उन्होंने समुद्री जहाज़ों की आवाजाही के लिए बेहद अहम एक संकरे रास्ते पर नियंत्रण कर लिया और इसके साथ ही यमन का गृहयुद्ध और तेज़ हो गया.
ख़ाली घर और सन्नाटा

लड़ाई को क़रीब से देखने के लिए हमने सरकार समर्थक बलों के साथ ताइज़ से सफ़र शुरू किया.
कई सुरक्षा चौकियों से होते हुए हम उस जगह तक पहुँचे, जहाँ उनका नियंत्रण ख़त्म होता है और ऐसा इलाक़ा शुरू होता है, जिस पर किसी भी पक्ष का नियंत्रण नहीं है.
पहाड़ी ढलानों पर जगह-जगह घर बने हैं. लेकिन लड़ाई से बचने के लिए परिवारों के चले जाने के बाद इनमें से कई घर ख़ाली पड़े हैं.
वहाँ डरावना सन्नाटा है. शहर में लगातार तेज़ी से दौड़ती कारों और मोटरसाइकिलों की आवाज़ यहाँ सुनाई नहीं देती. केवल बकरियों के मिमियाने और दोनों तरफ़ से हो रही गोलीबारी की आवाज़ सुनाई देती है.
लड़ाई वाले इलाक़े से क़रीब एक किलोमीटर दूर अपने घर के बाहर बकरियों के झुंड के साथ बैठे अली ने कहा, "मोर्टार के दो गोले यहाँ मेरी ज़मीन पर गिरे थे."
उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को विस्थापित लोगों के एक शिविर में भेज दिया है, क्योंकि वे लगातार हो रही गोलाबारी और गोलीबारी को अब सह नहीं पा रहे थे.
अली अपनी पत्नी और बहनों के साथ जानवरों की देखभाल के लिए वहीं रुक गए.
उन्होंने कहा, "मैं बहुत डरा हुआ हूँ. लेकिन मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है. इन जानवरों के बिना हम सभी भूखे रहेंगे और वैसे भी मर जाएंगे."
उन्होंने केवल अपना पहला नाम बताया. उन्हें डर है कि आने वाले दिनों में हूती विद्रोहियों ने इस इलाक़े पर नियंत्रण कर लिया, तो उन्हें इसका नतीजा भुगतना पड़ सकता है.
18 सरकारी सैनिकों के शव निकाल नहीं पा रहे

हूती पक्ष में मौजूद संपर्कों ने हमें बताया कि वे अपने सैनिकों को इकट्ठा कर रहे हैं और एक बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं.
हमने जब सरकार समर्थक बलों से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी है और वे भी तैयारी कर रहे हैं.
लड़ाई वाली जगह के सबसे नज़दीक बनी जांच चौकी पर हमारी मुलाक़ात कुछ लड़ाकों से हुई.
वे पहाड़ की ऊंचाई पर मौजूद मोर्चों से लौटे थे. आगे बढ़ रहे हूती विद्रोही उनसे केवल कुछ सौ मीटर दूर थे.
उनमें से एक लड़ाके ने बताया कि 18 सरकारी सैनिकों के शव ऐसे इलाक़े में पड़े हैं, जहाँ तक उनकी टुकड़ी गोली तो चला सकती है, लेकिन पहुँच नहीं सकती.
उन्होंने कहा, "हम उनके शवों के ऊपर से गोली चलाते हैं, लेकिन उन्हें वहां से निकाल नहीं सकते."
ताइज़ के आसपास लड़ाई 10 सितंबर के बाद और तेज़ हो गई.
उस दिन हूती विद्रोहियों ने शहर से 85 किलोमीटर पश्चिम में रेड सी के रणनीतिक बंदरगाह मोखा पर क़ब्ज़ा कर लिया था. इससे वह युद्धविराम टूट गया, जो क़रीब चार साल से मोटे तौर पर बना हुआ था.
हूती विद्रोहियों ने रणनीतिक रूप से अहम बाब अल-मंदब स्ट्रेट के पास एक बड़े इलाक़े पर नियंत्रण कर लिया. यूरोप और एशिया को जोड़ने वाला यह समुद्री रास्ता जहाज़ों की आवाजाही के लिए बेहद अहम है.
इस क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति में और रुकावट आने का डर बढ़ा, जिससे तेल की क़ीमतें बढ़ने में भी मदद मिली.
भीषण लड़ाई के बीच फँसा एक शहर

ताइज़ यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर और देश की सांस्कृतिक राजधानी है. यहाँ क़रीब 10 लाख लोग रहते हैं.
यह शहर उत्तरी यमन में हूती लड़ाकों के नियंत्रण वाले इलाक़ों और दक्षिण में सरकार के नियंत्रण वाले इलाक़ों को जोड़ने वाली बेहद अहम जगह पर बसा है. शहर कई दिशाओं से अग्रिम मोर्चों से घिरा हुआ है.
ताइज़ के बीच के हिस्से पर सरकारी बलों का नियंत्रण है, जबकि हूती लड़ाकों के ठिकाने शहर के उत्तर और पूर्व में हैं.
हाल में सबसे भीषण लड़ाई शहर के पश्चिमी रास्तों पर हुई है. यहाँ दोनों पक्ष उन ऊंचे इलाक़ों पर क़ब्ज़े के लिए लड़ रहे हैं, जहाँ शहर से दक्षिण की ओर जाने वाला रास्ता दिखाई देता है.
अगर हूती लड़ाकों ने इन इलाक़ों पर नियंत्रण कर लिया, तो सरकारी बलों के लिए मोखा को दोबारा अपने क़ब्ज़े में लेना और मुश्किल हो सकता है.
हम दक्षिण में स्थित अदन से ताइज़ पहुँचे थे. यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद और सरकार अदन में ही स्थित हैं.
रास्ते में क़रीब 30 जांच चौकियां थीं. सड़क के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग कमांडरों के नियंत्रण में थे. इससे साफ़ दिखाई देता है कि सरकार की तरफ़ से लड़ रहे बल कई हिस्सों में बँटे हुए हैं.
जैसे-जैसे हम शहर के पास पहुंचे, एंबुलेंस हमारे पास से गुज़रने लगीं. आधे घंटे में हमने कम से कम पांच एंबुलेंस को ताइज़ के मुख्य अस्पताल की तरफ़ जाते देखा.
यह साफ़ था कि हम एक ऐसे शहर में दाख़िल हो रहे थे, जो भीषण लड़ाई के बीच फँसा हुआ है.
हम अंधेरा होने के बाद वहां पहुंचे. दुकानें रोशनी से जगमगा रही थीं, रेस्तरां भरे हुए थे और बच्चे सड़कों पर खेल रहे थे.
लेकिन कुछ-कुछ देर में दूसरी आवाज़ें इस माहौल को चीर देती थीं. शहर के आसपास के पहाड़ों से गोलाबारी की तेज़ धमक और गोलियों की आवाज़ सुनाई देती थी.
हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन
यमन के विनाशकारी गृहयुद्ध में ताइज़ लड़ाई का एक प्रमुख मैदान रहा है.
साल 2015 में हूती लड़ाकों ने सना से सरकार को हटा दिया था. इसके बाद उन्होंने ताइज़ पर भी नियंत्रण करने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लड़ाकों ने उन्हें शहर के ज़्यादातर हिस्सों से बाहर कर दिया.
अपने ताज़ा हमले में हूती लड़ाके दूसरे हथियारों के साथ बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सऊदी अरब, पश्चिमी देशों और संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों के मुताबिक़, हूती विद्रोहियों को बाहर से सबसे ज़्यादा मदद ईरान देता है. उनका कहना है कि ईरान ने उन्हें हथियार, पैसा और सैन्य सलाह दी है.
हालांकि, ईरान पहले हूती विद्रोहियों को हथियार देने से इनकार करता रहा है. उसका कहना है कि वह उन्हें केवल राजनीतिक समर्थन देता है.
कई वर्षों से लगातार ऐसी ख़बरें आती रही हैं कि हूती विद्रोही बच्चों को सैनिक के रूप में भर्ती कर रहे हैं. सरकार के एक सैनिक ने हमें बताया कि लड़ाई वाली जगहों पर उसका सामना ऐसे बच्चों से हुआ था.
उन्होंने कहा, "किसी यमनी बच्चे को देखकर उस पर गोली चलाना मुश्किल होता है. लेकिन जब वही बच्चा आपकी तरफ़ बंदूक तान रहा हो, तो आपको अपनी रक्षा करनी पड़ती है."
हूती लड़ाकों ने 2022 में संयुक्त राष्ट्र के साथ एक 'कार्य योजना' पर दस्तख़त किए थे. इसमें उन्होंने बच्चों को सैनिक बनाने की यह प्रथा समाप्त करने का वादा किया था.

इमेज स्रोत, Liam Weir/BBC
युद्ध के बीच कैसा है जनजीवन
बीबीसी ने सरकार समर्थक बलों के साथ काम कर रहे किशोरों से भी बात की है.
इस बीच, सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन यमन सरकार का समर्थन कर रहा है और उसे हथियार दे रहा है.
सऊदी सेना ने रेड सी के तट पर हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर सैकड़ों हवाई हमले किए हैं.
वहीं हूती विद्रोहियों ने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के शहरों और बुनियादी ढांचे को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया है.
शाम के समय ताइज़ के अल-थौरा अस्पताल में अग्रिम मोर्चों से घायलों को लाया जा रहा था. उन्हें आईसीयू में भर्ती किया जा रहा था, जहाँ हमें दिखाई देने वाला हर बिस्तर भरा हुआ था.
कुछ मरीज़ विद्रोही थे और कुछ आम लोग.

इमेज स्रोत, Liam Weir/BBC News
12 साल की ग़ना नबील बकरियां चरा रही थीं, तभी मोर्टार के एक गोले के टुकड़े उनके सिर में लगे. उनके परिवार ने बताया कि हूती लड़ाकों की तरफ़ से दागा गया मोर्टार का गोला पास में आकर गिरा था.
वह बेहोश पड़ी थीं. उनके सिर पर पट्टियां बंधी थीं और चेहरा सूजा हुआ था. चेहरे पर चोट के निशान भी थे.
उनका परिवार बिस्तर के पास बैठकर यह जानने का इंतज़ार कर रहा था कि अगर उन्हें होश आया, तो आगे उनकी ज़िंदगी कैसी होगी.
एक डॉक्टर ने मुझे बताया कि चोट से उनके दिमाग़ को नुक़सान पहुँचा है.
उन्होंने कहा, "अब वह कभी पहले जैसी नहीं हो पाएंगी."

इमेज स्रोत, Liam Weir/BBC
ताइज़ से क़रीब 20 किलोमीटर दक्षिण में अल-मोनिग विस्थापन शिविर है.
वहाँ सैकड़ों तंबुओं के बीच मोखा और लड़ाई की चपेट में आए गाँवों से भागकर निकले परिवार पहुँच रहे थे.
हमें बताया गया कि पिछले 10 दिनों में 200 परिवार वहाँ पहुँचे थे.
मरियम सालेह एक सप्ताह पहले अपने पति और पांच बच्चों के साथ मोखा से आई थीं. मरियम सालेह उनका असली नाम नहीं है. उनके सबसे छोटे बच्चे की उम्र सात साल है.
रज़िया वहां बैठी एक टोपी बुन रही थीं. वह इसे बेचकर उस दिन के भोजन के लिए पैसे जुटाना चाहती थीं.
उन्होंने मुझसे कहा, "हम नंगे पैर चलकर आए. हम अपने साथ कुछ भी नहीं लाए थे, केवल अपने बच्चों को लेकर आए थे."
उन्होंने बताया कि वहाँ से भागते समय मोर्टार के गोले के टुकड़े लगने से उनके भतीजे की मौत हो गई थी. वह उनके पीछे चल रहा था.
उन्होंने बताया कि परिवार के आगे और पीछे दोनों तरफ़ लड़ाई चल रही थी और निशाना लगाकर गोलियां चलाई जा रही थीं. इसके बाद उन्होंने पहाड़ पर हथियारबंद लोगों को देखा.
उन्होंने कहा, "हमें लगा कि अब हम नहीं बचेंगे."
उन्होंने बताया कि बच्चे चीख़ और रो रहे थे, लेकिन परिवार लगातार चलता रहा.
रज़िया के मुताबिक़, हूती लड़ाकों के शहर में घुसने के बाद मोखा के लोगों ने उनसे बात करने और उन्हें समझाने की कोशिश की, तो उन्हें धमकियां दी गईं.
उन्होंने कहा, "जब हम वहाँ से निकले, तो उन्होंने बारूदी सुरंगें बिछा दीं, ताकि हम वापस न लौट सकें."

इमेज स्रोत, Liam Weir/BBC
फ़ातिमा मोहम्मद सालेह दूसरे परिवार के तंबू के बाहर चावल की एक ख़ाली बोरी पर लेटी हुई थीं.
वह विकलांग हैं और चल नहीं सकतीं. उन्होंने मुझे बताया कि उनके पास सोने के लिए अपनी कोई जगह भी नहीं है.
उन्होंने कहा, "मेरे पास कुछ भी नहीं है... न कोई ठिकाना, न गद्दा, न परिवार. कुछ भी नहीं."
फ़ातिमा ने बताया कि जब लड़ाई उनके गांव तक पहुंची, तब वह अपने दो बेटों और उनके बच्चों के साथ थीं.
उन्होंने कहा कि उनकी वजह से परिवार की रफ़्तार धीमी हो रही थी. इसलिए उन्होंने अपने बेटों से बच्चों को लेकर भाग जाने के लिए कहा.
इसके बाद उन्होंने अगले दो दिन अपने हाथों और घुटनों के सहारे रेंगते हुए बिताए.
उन्होंने कहा, "मैं रेंग रही थी. इधर से गोलियां आ रही थीं और उधर गोले गिर रहे थे. यहां गोलियां थीं और यहां गोले थे. मेरे ऊपर से ऐसी आवाज़ आ रही थी, जैसे बादल गरज रहे हों. मैं ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी."
उन्होंने बताया कि इसके बाद मोटरसाइकिल पर जा रहे एक व्यक्ति ने उन्हें देखा और शिविर तक पहुंचाया.
उसके बाद से उन्होंने अपने परिवार को नहीं देखा है.

इमेज स्रोत, Liam Weir/BBC
22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी ने कहा कि इस महीने अब तक पूरे यमन में 1 लाख 30 हज़ार से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं. गृहयुद्ध के कारण पहले ही विस्थापित हो चुके 52 लाख लोगों के अलावा ये लोग बेघर हुए हैं.
एजेंसी ने चेतावनी दी कि अगले तीन महीनों में फ़ातिमा की तरह एक लाख और लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.
अतिरिक्त रिपोर्टिंग: जैस्मिन डायर
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.




















